12 साल की उम्र में जीता रियलिटी शो, पहले ही गाने के लिए मिला नेशनल अवॉर्ड, जानें कौन हैं ये सिंगर
Shreya Ghoshal Birthday: भारतीय संगीत जगत की सबसे मधुर आवाजों में शुमार मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल आज यानी 12 मार्च को अपना 42वां जन्मदिन मना रही हैं. अपनी सुरीली आवाज और शानदार गायकी से उन्होंने पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया है. जी हां, आज वो बॉलीवुड ही नहीं बल्कि भारत की कई भाषाओं के संगीत इंडस्ट्री की पहचान बन चुकी हैं. लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, संगीत के प्रति जुनून और बचपन से मिली मजबूत ट्रेनिंग की लंबी कहानी छिपी है.
बचपन से ही संगीत से जुड़ाव
कहा जाता है कि मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है और श्रेया घोषाल के जीवन में भी यह बात बिल्कुल सच साबित हुई. उनकी मां खुद बहुत अच्छा गाती थीं और उन्होंने ही अपनी बेटी में संगीत के प्रति रुचि को पहचाना. जब श्रेया केवल 6 साल की थीं, तभी से उनकी मां ने उन्हें शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी थी. छोटी उम्र से ही श्रेया स्कूल के इवेंट्स और कल्चरल कार्यक्रमों में गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर देती थीं. बाद में उन्होंने मशहूर संगीतकार कल्याणजी भाई (Kalyanji Virji Shah) और गुरु Mukta Bhide से भी संगीत की फॉर्मल एजुकेशन प्राप्त की. इस प्रशिक्षण ने उनकी गायकी की नींव को बेहद मजबूत बनाया.
‘सारेगामा’ से मिली पहचान
वहीं साल 1996 में, जब श्रेया केवल 12 साल की थीं, तब उन्होंने मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो Sa Re Ga Ma के चिल्ड्रन स्पेशल में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया. इस शो में अपनी अद्भुत आवाज से उन्होंने न सिर्फ जजों बल्कि पूरे देश का दिल जीत लिया. शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने इस प्रतियोगिता की ट्रॉफी अपने नाम की. हालांकि उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटी बच्ची आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी प्लेबैक सिंगर्स में से एक बन जाएगी.
साइंस की छात्रा से बनीं म्यूजिक आइकन
बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रेया घोषाल शुरुआत में साइंस की छात्रा थीं. उन्होंने 12वीं तक साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई की. लेकिन संगीत के प्रति अपने गहरे लगाव के कारण उन्होंने आगे की पढ़ाई में आर्ट्स विषय का चुनाव किया, ताकि वो संगीत की दुनिया में पूरी तरह अपना करियर बना सकें. उनका यह फैसला आगे चलकर सही साबित हुआ और उनकी आवाज ने उन्हें संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई.
कैसे मिला ‘देवदास’ का पहला बड़ा मौका
श्रेया घोषाल के करियर में असली मोड़ तब आया जब मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली ने उन्हें पहली बार गाते हुए सुना. कहा जाता है कि एक दिन भंसाली अपनी मां के साथ टीवी पर Sa Re Ga Ma Pa देख रहे थे. उसी दौरान उन्होंने श्रेया की आवाज सुनी और बेहद प्रभावित हो गए. उस समय वे फिल्म Hum Dil De Chuke Sanam बना चुके थे और आगे चलकर अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म Devdas की तैयारी कर रहे थे. श्रेया की आवाज सुनकर उन्होंने तय किया कि फिल्म में पारो के किरदार के लिए वही आवाज देंगी. उस समय श्रेया की उम्र महज 15 साल के आसपास थी.
‘बैरी पिया’ से बदली किस्मत
फिल्म देवदास में श्रेया घोषाल को पहला बड़ा मौका मिला और उन्होंने Bairi Piya गाया. खास बात यह थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्होंने पहली ही टेक में गाना इतनी खूबसूरती से गाया कि संजय लीला भंसाली बेहद भावुक हो गए और उन्होंने श्रेया को गले लगा लिया. यह गाना रिलीज होते ही सुपरहिट हो गया और श्रेया को पहले ही गाने के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. इसी के साथ उनकी जिंदगी और करियर ने नई उड़ान भर ली.
आधी रात को लगने वाली भूख देती है खराब स्वास्थ्य का संकेत, धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है शरीर
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। भूख लगना और खाना दोनों ही हमारे सेहत के लिए लाभकारी होते हैं, क्योंकि भोजन से ही शरीर को काम करने की ऊर्जा मिलती है। रात के समय भी अचानक से भूख लगना शुरू हो जाती है, और हम उस भूख को शांत करने के लिए पैक्ड फूड्स का सहारा लेते हैं। कभी बिस्किट या नूडल्स खाकर छोटी भूख को शांत कर लेते हैं, लेकिन रात के समय भूख क्यों लगती है?
यह बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इसे विज्ञान की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें दिन में ओवरईटिंग करने पर कंट्रोल पा लिया जाता है, लेकिन रात को भूख इतनी तेज लगती है कि बिना खाए रहा नहीं जा सकता है। यही कारण है कि कुछ रात के खाने पर संयम नहीं रख सकते। कई बार लोग नींद से उठकर खाने के लिए बैठ जाते हैं। यह सभी लक्षण खराब जीवनशैली को भी दर्शाते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, यह अक्सर दिनचर्या और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा होता है। देर रात तक जागना भी इसका एक कारण हो सकता है। जब शरीर का प्राकृतिक भोजन समय बिगड़ जाता है, तो पाचन प्रणाली भी प्रभावित होती है। रात का समय शरीर के आराम और मरम्मत का समय माना जाता है। यदि इस समय बार-बार भोजन किया जाए, तो पाचन पर असर पड़ सकता है। धीरे-धीरे इससे वजन बढ़ना और सुबह भारीपन जैसी समस्या दिख सकती है। इससे नींद भी बुरी तरीके से प्रभावित होती है और पूरा दिन शरीर में भारीपन महसूस होता है।
इस सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए आयुर्वेद में कई तरीके बताए गए हैं, जिससे जीवनशैली में धीरे-धीरे सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए रात में कोशिश करें कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें और भोजन हल्का हो। आहार में तली-भुनी चीजें न हों, क्योंकि इससे भोजन को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है।
दूसरा तरीका है सोने से पहले गुनगुने दूध का सेवन। गुनगुना दूध अच्छी नींद लाने में सहायक है। इसे पीने से मन और मस्तिष्क शांत होते हैं और गहरी नींद आती है। इसके साथ ही रात के समय मोबाइल से दूरी बनाकर रखें। फोन की रोशनी नींद को प्रभावित कर सकती है।
--आईएएनएस
पीएस/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation


















.jpg)




