फूड फैक्ट : स्नैक्स खरीदने से पहले पलटें पैकेट, सेहत के लिए तीन चीजें चेक करना बेहद जरूरी
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। बाजार में मिलने वाले चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और दूसरे पैक्ड फूड आइटम्स की पैकेजिंग इतनी आकर्षक होती है कि उन्हें देखकर खरीदने का मन हो जाता है।
कई बार पैकेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में हेल्दी, लो फैट, नेचुरल और शुगर फ्री जैसे दावे भी किए जाते हैं। लेकिन पैकेट के सामने लिखी ये बातें किसी खाद्य पदार्थ की पूरी सच्चाई नहीं बतातीं। असल जानकारी तो पैकेट के पीछे दिए गए फूड लेबल में छिपी होती है।
इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लोगों को जागरूक किया है। मंत्रालय ने बताया कि किसी भी पैकेटेड फूड को खरीदते समय उसकी आकर्षक पैकेजिंग या बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करने के बजाय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासतौर पर उसमें मौजूद शुगर, सोडियम और सैचुरेटेड फैट की मात्रा जरूर देखनी चाहिए। इससे आप अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।
पैकेटेड फूड खरीदते समय सबसे पहले उसमें मौजूद शुगर की मात्रा पर ध्यान दें। कई बार ऐसे खाद्य पदार्थ भी मीठे होते हैं, जिनका स्वाद बहुत ज्यादा मीठा नहीं लगता। बिस्कुट, फ्लेवर्ड ड्रिंक्स और दूसरे पैक्ड स्नैक्स में अतिरिक्त चीनी हो सकती है। ज्यादा चीनी का सेवन वजन बढ़ने, दांतों की समस्याओं और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले लेबल जरूर पढ़ें।
सोडियम आमतौर पर नमक में पाया जाता है। चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स और प्रोसेस्ड फूड में इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है। जरूरत से ज्यादा सोडियम का सेवन हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए पैकेट पर लिखी सोडियम की मात्रा जरूर चेक करें।
पैकेटेड स्नैक्स खरीदते समय सैचुरेटेड फैट की मात्रा देखना भी जरूरी है। इसका अधिक सेवन शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों को चुनें, जिनमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
6जी तकनीक 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का योगदान कर सकती है: उद्योग जगत
नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। छठी पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक यानी 6जी वर्ष 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान कर सकती है। हालांकि यदि सरकारें पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराती हैं तो इस संभावित आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा जोखिम में पड़ सकता है। यह जानकारी गुरुवार को उद्योग संगठन जीएसएमए की एक रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), औद्योगिक स्वचालन, इमर्सिव डिजिटल सेवाओं और उन्नत कनेक्टिविटी के माध्यम से 2040 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 0.7 प्रतिशत के बराबर योगदान दे सकते हैं।
हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बड़े पैमाने पर 6जी नेटवर्क तैनाती के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया गया, तो अनुमानित आर्थिक मूल्य का करीब 42 प्रतिशत, यानी लगभग 520 अरब डॉलर, हासिल नहीं हो सकेगा।
जीएसएमए के मुख्य नियामक अधिकारी जॉन जिउस्ती ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति से जुड़े फैसले यह तय करेंगे कि 6जी तकनीक से मिलने वाली आर्थिक संभावनाओं का कितना लाभ वास्तव में प्राप्त किया जा सकेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 6जी से सबसे अधिक लाभ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और वित्तीय सेवाओं क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। अनुमान है कि कुल आर्थिक योगदान में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं की 19 प्रतिशत होगी। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र 13 प्रतिशत और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) क्षेत्र 12 प्रतिशत योगदान दे सकता है।
यह रिपोर्ट 2027 में आयोजित होने वाले विश्व रेडियो संचार सम्मेलन से पहले जारी की गई है। इस सम्मेलन में उभरती तकनीकों के लिए भविष्य के स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
जीएसएमए का कहना है कि 6जी तकनीक पिछले मोबाइल नेटवर्क संस्करणों से काफी अलग होगी। इसका विकास एआई केंद्रित क्षमताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे नेटवर्क बुद्धिमान निर्णय लेने, एकीकृत सेंसिंग कार्यों और स्थलीय तथा उपग्रह-आधारित नेटवर्कों के बीच सहज कनेक्टिविटी प्रदान करने में सक्षम होंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई-आधारित कनेक्टिविटी, औद्योगिक रोबोटिक्स, उन्नत ब्रॉडबैंड सेवाएं, एकीकृत सेंसिंग तकनीकें और गैर-स्थलीय नेटवर्क भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक होंगे।
स्पेक्ट्रम के संदर्भ में रिपोर्ट ने मिड-बैंड स्पेक्ट्रम को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। अनुमान है कि 6जी से होने वाले कुल आर्थिक लाभ में इसकी हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत होगी। वहीं लो-बैंड स्पेक्ट्रम ग्रामीण क्षेत्रों, इनडोर लोकेशन और कम सेवा प्राप्त इलाकों तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा और कुल आर्थिक योगदान में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा देगा।
जीएसएमए ने सरकारों से आग्रह किया है कि 2030 तक कम से कम 2 गीगाहर्ट्ज़ मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाए, जिसमें ऊपरी 6 गीगाहर्ट्ज बैंड का कुछ हिस्सा भी शामिल हो। साथ ही 600 मेगाहर्ट्ज बैंड को भी उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है, ताकि कवरेज बढ़ाई जा सके और अधिक कनेक्टेड डिवाइसों को समर्थन दिया जा सके।
उद्योग संगठन ने नियामकों से स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करने की भी मांग की है, जिससे दूरसंचार कंपनियों को भविष्य के नेटवर्क विस्तार और निवेश योजनाओं के लिए आवश्यक नीति स्थिरता मिल सके।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation









