Pain Relief Tips: नसों से जुड़े पुराने से पुराने दर्द में मिलेगी राहत! कंपनी ने बताए 'पीड़ानिल गोल्ड' के आयुर्वेदिक फायदे
Pain Relief Tips: आजकल की लाइफस्टाइल में जोड़ों का दर्द, नसों का दर्द और सूजन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. गठिया, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, स्लिप डिस्क और साइटिका जैसी बीमारियां कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है. इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए पतंजलि ग्रुप ने अपनी आयुर्वेदिक दवा 'पीडानिल गोल्ड' को दर्द से राहत देने वाला एक लॉन्गटर्म ऑपशन बताया है. कंपनी का दावा है कि यह दवा केवल दर्द को अस्थायी रूप से दबाने का काम नहीं करती है बल्कि शरीर के अंदर जाकर दर्द के मूल कारणों पर काम करती है.
कंपनी ने किया बड़ा दावा
स्वामी रामदेव द्वारा स्थापित कंपनी पतंजलि के अनुसार, दर्द हमारे शरीर की एक चेतावनी प्रणाली है. जब शरीर के किसी हिस्से में चोट या सूजन हो जाती है, तो वहां मौजूद विशेष न्यूरॉन्स ब्रेन को संकेत भेजते हैं, जिससे हमें दर्द महसूस होता है. सामान्य तौर पर कम समय के लिए दर्द नई चोट या हल्की समस्या के कारण होता है और कुछ समय बाद ठीक भी हो जाता है. लेकिन दीर्घकालिक दर्द एक गंभीर समस्या हो सकता है, जो गठिया, नसों के दबाव, स्लिप डिस्क या अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स से जुड़ा हो सकता है.
कंपनी ने आयुर्वेदिक फॉर्मूला से तैयार की दवा
कंपनी ने बताया है कि पीडानिल गोल्ड का आयुर्वेदिक फॉर्मूला ऐसे ही लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां शरीर के अंदर सूजन को कम करने और नसों पर पड़ने वाले दबाव को कंट्रोल करने में मदद कर सकती हैं. इसी वजह से इसे साइटिका, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और स्लिप डिस्क जैसे रोगों में भी फायदेमंद बताया जाता है.
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बीमारी का जड़ से करता है इलाज
कंपनी द्वारा यह दावा किया है कि इस दवा से शरीर में बनने वाले उन रासायनिक तत्वों को नियंत्रित किया जा सकता है, जो सूजन और दर्द को बढ़ाते हैं. सूजन को पुराने दर्द का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. ऐसे में अगर सूजन को कम किया जाए तो दर्द से भी राहत मिल सकती है. कंपनी के मुताबिक, पीडानिल गोल्ड इसी प्रक्रिया के जरिए राहत देने का काम करती है.
नसों की बीमारियों के लिए दवा फायदेमंद
इसके अलावा कंपनी यह भी दावा कर रही है कि यह दवा नसों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकती है. कई बार नसों पर दबाव पड़ने या उनमें कमजोरी आने से दर्द के असामान्य संकेत मस्तिष्क तक पहुंचते हैं. ऐसे मामलों में यह फॉर्मूला नसों की मजबूती और स्थिरता बनाए रखने में सहायक साबित हो सकता है.
जेनेटिक दर्द को भी कम करेगी दवा
पतंजलि ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि पीडानिल गोल्ड दर्द से जुड़े जीन की गतिविधि को भी प्रभावित कर सकता है. आसान शब्दों में समझें तो यह सिर्फ थोड़े समय के लिए दर्द को कम करने के बजाय शरीर की जैविक प्रक्रिया पर काम करके लंबे समय तक राहत देने में सहायक होता है. कंपनी के मुताबिक, यही बात इस दवा को अन्य सामान्य दर्द निवारक दवाओं से अलग बनाती है, जो केवल कुछ समय के लिए दर्द को कम करने का काम करती हैं.
जोड़ों की समस्याओं का इलाज करें
जोड़ों से जुड़ी समस्याओं के मामले में भी इस दवा को लाभकारी बताया गया है. ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसे रोगों में जोड़ों का कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है, जिससे दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत होती है. कंपनी का दावा है कि पीडानिल गोल्ड का फॉर्मूला कार्टिलेज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और ऊतकों की रिकवरी में मदद कर सकता है. इससे न सिर्फ दर्द कम हो सकता है बल्कि जोड़ों की गतिशीलता भी बेहतर हो सकती है.
लंबे समय तक हुई दवा की टेस्टिंग
दवा को लेकर सुरक्षा के मामले में पतंजलि का कहना है कि दीर्घकालिक परीक्षणों में यह पाया गया है कि अनुशंसित मात्रा में और सही आहार के साथ इसका सेवन करने पर लिवर, किडनी और ब्रेन जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर किसी भी तरह का गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है. यही वजह है कि कंपनी इसे लंबे समय तक उपयोग किए जाने वाले आयुर्वेदिक दवा के रूप में लोगों के लिए उपलब्ध कर रही है.
हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और रोग की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है.
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मुंबईकरों को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, GMLR के लिए TBM मशीन उतारने की प्रक्रिया शुरू
मुंबई के महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट के तहत जुड़वां टनल के निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के हिस्सों को ‘शाफ्ट’ में उतारने की प्रक्रिया बुधवार, 11 मार्च 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है. दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी यानी मुंबई के फ़िल्म सिटी परिसर में शुरू हुई इस प्रक्रिया का निरीक्षण करने बीएमसी यानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त भूषण गगराणी पहुंचे थे. खास बात यह है कि यह चरण तय समय से करीब तीन महीने पहले शुरू हो गया है, जिससे प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को और गति मिलने की उम्मीद है.
आधुनिक तकनीक से बनेगी 4.7 किलोमीटर लंबा टनल
ये प्रोजेक्ट इसलिए महत्पूर्ण है क्युकी ये प्रोजेक्ट पूर्वी मुंबई को पश्चिमी मुंबई से सीधे जोड़ने का काम करेगा. GMLR प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 12.20 किलोमीटर है जिसमें गोरेगांव स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से मुलुंड के खिंडीपाड़ा तक लगभग 4.7 किलोमीटर लंबाई के दो समानांतर भूमिगत टनल बनाए जाएंगे. इन टनलों का व्यास करीब 14.20 मीटर होगा और इनके निर्माण में 2175 मेट्रिक टन वजनी अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. यह टनल पूरी तरह से अंडरग्राउंड रहने वाला है जो संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से गुजरेगी और इनमें आधुनिक वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा और जल निकासी जैसी सुविधाएं भी होंगी.
मुंबईकरों के सफर में आएगी तेजी, ट्रैफिक दबाव होगा कम
ये ट्विन टनल मुंबई के सबसे बड़े रोड प्रोजेक्ट्स में से एक है. इस टनल की खुदाई 2026 में शुरू होने की उम्मीद है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरा GMLR प्रोजेक्ट 2029 तक चालू हो सकता है. पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब ₹14,000 करोड़ है, जिसमें से लगभग ₹6,600 करोड़ सिर्फ टनल निर्माण पर खर्च होंगे. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद Goregaon से Mulund का सफर 70–90 मिनट से घटकर करीब 20–25 मिनट रह जाएगा, जिससे मुंबईकरों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी. इस नई सड़क और भूमिगत टनल के तैयार होने से यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी. यह परियोजना मुंबई के ट्रैफिक प्रबंधन और भविष्य की कनेक्टिविटी के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है.
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