Responsive Scrollable Menu

सर्विस एक्सपोर्ट और रेमिटेंस से भारत पर तेल संकट का असर कम हो सकता है: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाली कमाई (रेमिटेंस) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पड़ने वाले आर्थिक असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि भारत अब भी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

डीएसपी नेत्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चा तेल भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे अहम कारकों में से एक बना हुआ है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है, जिससे चिंता बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत रोजाना करीब 5.3 से 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खपत करता है, जबकि देश में घरेलू उत्पादन केवल करीब 0.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इस कारण भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल आयात करता है।

भारत के कुल आयात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 25 से 30 प्रतिशत है। इसलिए तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देश के विदेशी व्यापार संतुलन (एक्सटर्नल बैलेंस) को काफी प्रभावित करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात बिल में करीब 12 से 15 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है और वित्त वर्ष 2027 तक ऊंची बनी रहती है, तो भारत का तेल व्यापार घाटा बढ़कर करीब 220 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) भी बढ़कर जीडीपी के 3.1 प्रतिशत से ऊपर जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले ऐसे हालात में रुपए में 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट, महंगाई में बढ़ोतरी और बाजार में नकदी की कमी जैसी स्थितियां देखने को मिलती रही हैं।

हालांकि हाल के वर्षों में भारत के विदेशी सेक्टर की संरचना में बड़ा बदलाव आया है। मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस अब कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के झटके को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद कर रहे हैं।

इस वजह से रिपोर्ट का मानना है कि भले ही तेल की कीमतों में तेजी अभी भी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम है, लेकिन करंट अकाउंट बैलेंस पर इसका असर पहले की तुलना में कम हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अभी भी काफी अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि क्या तेल की कीमतें एक बार फिर रुपए की चाल, महंगाई और पूंजी प्रवाह को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक बनती हैं या नहीं।

--आईएएनएस

डीबीपी/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

कौन सा स्वाद बढ़ाता है कौन सा दोष? जानिए आयुर्वेदिक आहार का सिद्धांत

नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) शरीर को नियंत्रित करने वाली तीन मूलभूत ऊर्जाएं हैं, जिसका सीधा संबंध हमारे भोजन से होता है। जब ये तीनों दोष संतुलन में रहते हैं, तब शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करता है। लेकिन अगर इनका संतुलन बिगड़ जाए, तो कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन सा स्वाद किस दोष को बढ़ाता है और कौन सा उसे शांत करता है।

आयुर्वेद में भोजन के छह प्रमुख रस बताए गए हैं मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला)। इन रसों का हमारे शरीर के दोषों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।

वात दोष को बढ़ाने वाले स्वादों में तीखा, कड़वा और कसैला रस शामिल हैं। अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा तीखा या कड़वा भोजन करता है, तो वात बढ़ सकता है, जिससे गैस, सूखापन, बेचैनी या जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वात को संतुलित रखने के लिए मीठा, नमकीन और खट्टा स्वाद फायदेमंद माना जाता है। साथ ही गर्म और थोड़े तैलीय भोजन का सेवन भी वात को शांत करने में मदद करता है।

अब बात करें पित्त दोष की। पित्त का संबंध शरीर की गर्मी और पाचन शक्ति से माना जाता है। तीखा, खट्टा और नमकीन स्वाद पित्त को बढ़ा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा मसालेदार या खट्टा खाना खाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे एसिडिटी, जलन, चिड़चिड़ापन या त्वचा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। पित्त को शांत करने के लिए मीठा, कड़वा और कसैला स्वाद बेहतर माना जाता है। ठंडे और हल्के भोजन, जैसे हरी सब्जियां और फल, पित्त को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

कफ दोष का संबंध शरीर की स्थिरता, नमी और ताकत से होता है। मीठा, नमकीन और खट्टा स्वाद कफ को बढ़ा सकते हैं। अगर इन स्वादों का ज्यादा सेवन किया जाए, तो शरीर में भारीपन, सुस्ती, वजन बढ़ना या बलगम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कफ को कम करने के लिए तीखा, कड़वा और कसैला स्वाद उपयोगी माना जाता है। हल्का, गर्म और मसालेदार भोजन कफ को संतुलित रखने में मदद करता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

जसप्रीत बुमराह को इस खिलाड़ी ने सिखाई है स्लोअर गेंद? जानिए कौन हैं जहूर खान

जसप्रीत बुमराह ने टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में 4 विकेट लेकर भारत को चैंपियन बनाया. उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद अब यूएई के तेज गेंदबाज जहूर खान ने दावा किया है कि बुमराह को स्लोअर गेंद उन्होंने ही सिखाई है. Wed, 11 Mar 2026 15:20:19 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala। Sushant Sinha: Iran की तरफ से जारी वीडियो देख कर दंग रह जाएंगे!। #america #iran #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-11T10:15:02+00:00

Israel Vs Iran Conflict | Middle East Crisis के बीच विपक्ष के बयानों पर बरसे PM Modi ! #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-11T10:12:06+00:00

News Ki Pathshala Live : ईरान की मदद कर रहा रूस ! | Russia | Iran Israel Conflict | Sushant Sinha #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-11T10:08:23+00:00

Iran America War Update: दुबई एयरपोर्ट पर ईरान ने फिर किया बहुत बड़ा हमला । Top News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-11T10:10:44+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers