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IND vs NZ 1st ODI : भारत के खिलाफ मैच से पहले टूटी न्यूजीलैंड की कमर, अब तीसरा खिलाड़ी भी चोट के चलते हुआ बाहर

IND vs NZ 1st ODI: न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ होने वाले पहले वनडे मैच से पहले बड़ा झटका लगा है. टीम की आधी कमर तो पहले ही दो खिलाड़ियों के चोटिल होकर बाहर होने से टूट गई थी. अब टीम की पूरी कमर टूट गई है. न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे चोटिल होकर भारत के खिलाफ ऑकलैंड में होने वाले पहले ODI मैच से बाहर हो गए हैं. ये न्यूजीलैंड के लिए भारत के खिलाफ होने वाले पहले वनडे से ठीक पहले बड़ा झटका है. टीम से रचिंन रविंद्र और मार्क चैपमैन पहले ही चोट के चलते बाहर हो गए हैं. अब एक और सालामी बल्लेबाज का बाहर होना टीम के लिए खतरे की घंटी है.

आपको बता दें कि, भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला वनडे मैच में 4 नवंबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मुकाबले की शुरुआत सुबह 7:30 बजे होने वाली है. उससे पहले 7 बजे मैच का टॉस होगा. इस मैच के शुरू होने में 24 घंटे से भी कम का समय बाकी है. उससे पहले ही न्यूजीलैंड के सालमी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे चोटिल होकर पहले वनडे से बाहर हो गए हैं. 

कैसे लगी डेवोन कॉनवे को चोट

आपको बता दें कि, क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, डेवोन कॉनवे ट्रेनिंग सेशन के दौरान मैट हेनरी से टकराने के बाद कनकशन के कारण भारत के खिलाफ पहले वनडे से बाहर हो गए हैं. यह घटना मंगलवार को ईडन पार्क में हुई, जब कैच लेने की कोशिश में दोनों खिलाड़ी टकरा गए. दोनों को तुरंत मेडिकल मदद दी गई और उनके सिर की चोट का असेसमेंट किया गया. हेनरी की हालत पर नजर रखी जा रही है, जबकि कॉनवे को आगे की जांच के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया, जिससे कनकशन की पुष्टि हुई.

रचिंन रवींद्र और मार्क चैपमैन भी हुए बाहर

आपको बता दें कि, बीते सोमवार को रिपोर्ट सामने आई थीं कि, टीम के स्टार ऑलराउंडर रचिन रवींद्र और विकेटकीपर बल्लेबाज मार्क चैपमैन इंजरी के चलते वनडे सीरीज बाहर हो गए हैं. वो चोटिल थे और समय पर रिकवरी नहीं कर पाए, जिसके बाद उन्हें वनडे सीरीज से हाथ धोना पड़ गया. अब एक और चोट के बाद न्यूजीलैंड की मुश्किल बढ़ गई हैं. क्योंकि डेवोन कॉनवे जैसे खिलाड़ी का बाहर होना भारत के लिए राहत की खबर हो सकती है. 

कैसा रहा है डेवोन कॉनवे का वनडे रिकॉर्ड

डेवोन कोनवे ने न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के लिए अब तक कुल 43 वनडे मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 42 पारियों में 5 शतक और 6 अर्धशतकों के साथ कुल 1692 रन बनाए हैं. वनडे क्रिकेट में कॉनवे कौ औसत 43.3 और स्ट्राइक रेट 87.8 रहा है. उनका वनडे क्रिकेट में हाईएस्ट स्कोर 152 नाबाद है, जबकि एकदिवसीय क्रिकेट में उनके बल्ले से 210 चौके और कुल 22 छक्के आए हैं.

कब और कहां खेलें जाएंगे भारत-न्यूजीलैंड के बीच वनडे मैच

  • पहला वनडे: 4 नवंबर (ऑकलैंड)
  • दूसरा वनडे: 7 नवंबर (विलिंगटन)
  • तीसरा वनडे: 10 नवंबर (हेमिल्टन)
  • चौथा वनडे: 13 नवंबर (बे ओवल)
  • पांचवां वनडे: 15 नवंबर (बे ओवल)

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अर्ध मत्स्येन्द्रासन से एड्रिनल ग्रंथि होगी मजबूत, पाचन भी होगा बेहतर

नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान नहीं रख पाते, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में योगासन एक सरल और प्रभावी समाधान बनकर सामने आते हैं और इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में अर्ध मत्स्येन्द्रासन शरीर के लिए काफी लाभदायक है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पाचन को बेहतर करने के लिए जाना जाता है।

संस्कृत में अर्ध का अर्थ आधा, मत्स्य का अर्थ मछली और इंद्र का अर्थ राजा होता है। यह आसन महान योगी मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह एक बैठकर किया जाने वाला रीढ़ को मोड़ने वाला योग आसन है, जिसका नाम महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह न सिर्फ मांसपेशियों को लचीला बनाता है बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे लेकर सटीक जानकारी दी है, जिसके अनुसार अर्ध मत्स्येन्द्रासन रीढ़ की हड्डी की मजबूती, लचीलेपन और बेहतर पाचन तंत्र के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली योगासन है। एड्रिनल ग्रंथि की स्थिति में सुधार होता है। साथ ही, यह कब्ज, दमा और पाचन संबंधी समस्याओं से निजात भी दिलाता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन का नियमित अभ्यास करने से शरीर की कई ग्रंथियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसमें एड्रिनल ग्रंथि भी शामिल है। यह आसन शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को नियंत्रित करने में मदद करता है। एड्रिनल ग्रंथि ही कोर्टिसोल हार्मोन बनाती है, इस आसन से उस पर दबाव कम होता है। एड्रिनल ग्रंथि के बेहतर काम करने से शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है, थकान कम लगती है और शरीर का हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन मधुमेह रोगियों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। साथ ही यह आसन पेनक्रियाज को एक्टिव करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं लेकिन गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इस आसन को करने से बचना चाहिए। वहीं, पेप्टिक अल्सर, हर्निया या स्लिप-डिस्क की गंभीर समस्या होने पर इस आसन का अभ्यास वर्जित है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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