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Glenn Maxwell ने इंटरनेशनल क्रिकेट से लिया संन्यास, 14 साल के सफर पर लगाया विराम

सिडनी, तीन नवंबर ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है, जिससे उनके 14 साल के करियर का अंत हो गया है। सीमित ओवरों की क्रिकेट के इस 38 वर्षीय धुरंधर खिलाड़ी ने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से अपना आखिरी मैच इस साल की शुरुआत में आईसीसी टी20 विश्व कप के दौरान ओमान के खिलाफ खेला था। मैक्सवेल ने मंगलवार को ‘द फाइनल वर्ड’ पॉडकास्ट पर कहा, ‘‘मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ विक्टोरिया के लिए घरेलू क्रिकेट (50 ओवर के मैच और लाल गेंद से खेले जाने वाले चार दिवसीय क्रिकेट) से भी संन्यास ले रहा हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ओलंपिक खेलों (2028 में) को देखते हुए मुझे लगता है कि अगले 12 से 24 महीनों में काफी बदलाव होने वाले हैं, ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि युवा खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जाए और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव का सामना करने का मौका मिले।’’ अपनी पावर-हिटिंग के लिए ‘बिग शो’ के नाम से मशहूर मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 149 वनडे, 130 टी20 अंतरराष्ट्रीय और सात टेस्ट मैच खेले।

वह ऑस्ट्रेलिया की दो वनडे विश्व कप (2015 और 2023) और एक टी20 विश्व कप (2021) जीतने वाली टीमों के सदस्य भी रहे। उन्होंने कहा, ‘‘शायद अब समय आ गया है जब मुझे अपने शरीर पर थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है ताकि मैं अपने करियर में बाकी बचे हुए कुछ टूर्नामेंटों में भाग ले सकूं।’’ मैक्सवेल ने कहा, ‘‘मुझे इस बात की थोड़ी उम्मीद थी कि शायद मुझे एमसीजी (मेलबर्न) में विदाई मैच खेलने का मौका मिल सकता है, लेकिन मैं टीम प्रबंधन की आगे की रणनीति को अच्छी तरह से समझ सकता हूं।’’ मैक्सवेल ऑस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की क्रिकेट के महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं और उनके शानदार प्रदर्शन से टीम ने कई मैच जीते। उन्होंने 2023 में वनडे विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ थकान के बावजूद दोहरा शतक लगाया था जिसे इस टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक गिना जाता है।

मैक्सवेल ने वनडे में 126.7 के स्ट्राइक रेट से 3,990 रन और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 154.4 के स्ट्राइक रेट से 2,897 रन बनाए। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सभी प्रारूपों में 10 शतक और 136 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई।

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सहारा रेगिस्तान में मिला गुलाबी पत्थर मंगल ग्रह का निकला:800 ग्राम के पत्थर में मिले पानी के निशान, 4.1 अरब साल पुरानी है

सहारा रेगिस्तान में 2022 में मिला करीब 800 ग्राम का गुलाबी रंग का पत्थर मंगल ग्रह का निकला है। नासा की मदद से हुई रिसर्च में इसकी पुष्टि हुई है। जांच में पता चला कि यह चट्टान 4.1 अरब साल से भी ज्यादा पुरानी है। इसमें ऐसे खनिज मिले हैं, जो बताते हैं कि मंगल के शुरुआती दौर में उसकी चट्टानों के संपर्क में पानी आया था। यह खोज मंगल के पुराने वातावरण को समझने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, उस समय मंगल आज की तरह ठंडा और सूखा नहीं था। मंगल की चट्टान होने की पुष्टि कैसे हुई? इस चट्टान को ‘तेघाजा 001’ नाम दिया गया है। यह माली के तेघाजा नमक मैदान में मिली थी। शुरुआत में वैज्ञानिकों को यह पता नहीं था कि यह पत्थर कहां से आया है। इसकी पहचान करने के लिए वैज्ञानिकों ने इसमें मौजूद ऑक्सीजन के आइसोटोप की जांच की। आइसोटोप एक ही तत्व के अलग-अलग रूप होते हैं। अलग-अलग ग्रहों की चट्टानों में इनका अनुपात अलग हो सकता है। जांच में इस पत्थर के आइसोटोप मंगल की चट्टानों से मेल खाते मिले। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसकी बनावट और खनिजों की जांच की। इसमें जिरकॉन नाम के छोटे क्रिस्टल मिले। इन क्रिस्टल की मदद से वैज्ञानिकों ने चट्टान की उम्र का पता लगाया। चट्टान में पानी के संकेत क्यों अहम हैं? चट्टान में मिले खनिज और उनकी बनावट बताते हैं कि मंगल पर कभी पानी मौजूद था। पानी के संपर्क में आने से चट्टान के कुछ खनिजों में बदलाव हुआ था। यह जानकारी इसलिए अहम है, क्योंकि इससे वैज्ञानिक समझ सकते हैं कि शुरुआती मंगल का वातावरण कैसा था और वहां पानी की मौजूदगी कितनी थी। इससे यह जानने में भी मदद मिल सकती है कि समय के साथ मंगल पर पानी कैसे कम हुआ। हालांकि, पानी के संकेत मिलने का मतलब यह नहीं है कि मंगल पर कभी जीवन भी था। इसके लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है। मंगल पर कहां से आई थी यह चट्टान? वैज्ञानिकों ने मंगल की परिक्रमा कर रहे ऑर्बिटर से मिले आंकड़ों की तुलना इस चट्टान के खनिजों और रासायनिक संरचना से की। इसके आधार पर मंगल पर 13 ऐसी जगहों की पहचान हुई, जहां से यह चट्टान आ सकती है। इनमें से कई जगहें मंगल के दक्षिणी हिस्से में मौजूद ऊंचे और गड्ढों वाले इलाके में हैं। हालांकि, इसकी सही जगह की पहचान अभी नहीं हो पाई है। मंगल से धरती तक कैसे पहुंचा यह उल्कापिंड? वैज्ञानिकों के मुताबिक, मंगल की सतह पर किसी बड़े अंतरिक्षीय पिंड के टकराने से वहां की चट्टान का एक टुकड़ा अंतरिक्ष में उछला होगा। लंबे सफर के बाद यह टुकड़ा धरती तक पहुंचा और सहारा रेगिस्तान में मिला। अंतरिक्ष से धरती पर गिरने वाले ऐसे ठोस पिंडों को उल्कापिंड कहते हैं। ये अक्सर रेगिस्तान और बर्फीले इलाकों में मिलते हैं। यहां आसपास की जमीन के मुकाबले इन्हें पहचानना आसान होता है। तेघाजा 001 मंगल से धरती पर आए सबसे पुराने उल्कापिंडों में से एक है। इसमें मंगल की शुरुआती चट्टानों और उन पर पानी के असर के संकेत सुरक्षित हैं।

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  Sports

IND vs NZ: मैदान पर भयंकर हादसा, हैनरी से टकराए डेवोन कॉनवे, कनकशन के चलते पहले वनडे से बाहर

Devon Conway Injury: इंजरी से जूझ रही न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को उस वक्त एक और झटका लगा जब, प्रैक्टिस के दौरान डेवोन कॉनवे और तेज गेंदबाज मैट हेनरी की जबरदस्त टक्कर हो गई. स्कैन के बाद अब कॉनवे को 4 अक्टूबर से भारत के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के पहले मुकाबले से बाहर कर दिया गया है. Tue, 3 Nov 2026 10:06:01 +0530

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