चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य अभियान की निंदा करते हुए कहा कि यह तनाव "कभी होना ही नहीं चाहिए था"। अल जज़ीरा के अनुसार, वरिष्ठ राजनयिक ने मौजूदा शत्रुता को तत्काल समाप्त करने और राजनयिक वार्ता की ओर शीघ्र लौटने का आह्वान किया।
बीजिंग में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में वांग यी ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य शक्ति का प्रयोग क्षेत्र में गहरे संकट का "कभी समाधान नहीं करेगा"। उन्होंने चेतावनी दी कि बल प्रयोग स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करता है, और कहा कि मजबूत मुट्ठी का मतलब मजबूत तर्क नहीं होता। दुनिया जंगल के कानून की ओर नहीं लौट सकती।
अल जज़ीरा ने आगे बताया कि विदेश मंत्री ने ईरानी सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी प्रयास का चीन द्वारा कड़ा विरोध व्यक्त किया। वांग ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए कोई जनसमर्थन नहीं है, और उनका सुझाव है कि ऐसे उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को और भड़काएंगे।
बीजिंग की ओर से संयम बरतने का यह आह्वान ऐसे समय आया है जब इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने घोषणा की है कि इज़राइली वायु सेना (आईएएफ) ने राजधानी में कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर लक्षित हमले किए हैं। एक पोस्ट में, सैन्य अधिकारी के खाते ने कहा कि तेहरान में आईआरजीसी से संबंधित कई ईंधन भंडारण परिसरों पर हमला किया गया।
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अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने देश के अगले सुप्रीम लीडर के नाम पर सहमति बना ली है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से ही यह पद खाली था। असेंबली के सदस्य अयातुल्ला मोहम्मद-महदी मीरबाघेरी ने संकेत दिया है कि नए लीडर के चुनाव के लिए काफी कोशिशें की गई हैं और अब एक सर्वसम्मत राय बन चुकी है, यानी सभी सदस्य एक नाम पर राजी हैं।
अयातुल्ला मोहम्मद-महदी मीरबाघेरी के बयान के अनुसार, लीडरशिप तय करने के लिए बहुत कोशिशें की गई हैं और एक निर्णायक और सर्वसम्मत राय पर सहमति बन गई है।
देरी पर सफाई
नए नेता को चुनने में हो रही देरी को लेकर असेंबली के प्रतिनिधि होज्जातोलसलाम जाफरी ने कहा कि यह समय सभी के लिए कड़वा और अनचाहा है। उन्होंने जनता से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि लिए गए फैसले से जल्द ही सभी ईरानी लोग संतुष्ट होंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मुश्किल घड़ी में प्रतिनिधियों के इरादों पर शक नहीं किया जाना चाहिए।
37 साल के शासन का अंत
ईरान के संविधान के मुताबिक, 88 सदस्यों वाली 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ही नया सुप्रीम लीडर चुनने की ताकत रखती है। अयातुल्ला अली खामेनेई, जो पिछले 37 सालों से ईरान की कमान संभाल रहे थे, 28 फरवरी को तेहरान में एक अमेरिकी हमले में मारे गए थे। उनके बाद अब जिसे भी चुना जाएगा, वह ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर होगा, जिस पर देश को इस युद्ध और संकट की स्थिति से बाहर निकालने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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