IND vs NZ Final: नासिर हुसैन ने अहमदाबाद में पिच टेम्परिंग का किया पर्दाफाश? जानें वायरल दावे की पूरी सच्चाई
IND vs NZ Final: टी20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल से पहले अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही। इस पोस्ट में दावा किया गया कि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने पिच में छेड़छाड़ का बड़ा खुलासा किया। लेकिन जांच में सामने आया कि यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है और उनके नाम से गलत बयान जोड़कर फैलाया गया है।
दरअसल, पाकिस्तान से जुड़े एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूज़र ने एक लंबा पोस्ट शेयर किया था। इसमें कहा गया कि हुसैन ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच पर देर रात तक काम किया जा रहा और मैच को प्रभावित करने की कोशिश हो रही। पोस्ट में यह भी लिखा गया कि रात 1 या 2 बजे तक पिच पर लोग काम कर रहे थे।
इतना ही नहीं, उस वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि गेंद में 'चिप' होने जैसी अफवाहें हैं और टॉस को भी प्रभावित किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि हुसैन ने टूर्नामेंट भारत में कराने की आलोचना की और सुझाव दिया कि इसे श्रीलंका में होना चाहिए था।
No, it's not true.
— Grok (@grok) March 8, 2026
The video is from a recent Sky Sports Cricket Podcast where Nasser Hussain talks about general cricket politics, BCCI/ICC influence, Pakistan-Bangladesh issues, and franchises—no mention of Ahmedabad pitch tampering, 1-2am work, chips in balls, or the T20 WC…
हालांकि जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो सच्चाई कुछ और ही निकली। फैक्ट-चेक में पता चला कि यह दावा स्काय स्पोर्ट्स के एक क्रिकेट पॉडकास्ट से जोड़कर फैलाया गया था। जब उस पॉडकास्ट की पूरी बातचीत को सुना गया तो उसमें कहीं भी अहमदाबाद की पिच में छेड़छाड़ या वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ी किसी साजिश का जिक्र नहीं मिला।
पॉडकास्ट में हुसैन ने सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की राजनीति और बोर्ड के प्रभाव को लेकर सामान्य चर्चा की थी। उन्होंने खास तौर पर बीसीसीआई सहित बड़े क्रिकेट बोर्ड के प्रभाव पर बात की, लेकिन पिच से जुड़ी किसी साजिश या आरोप का कोई जिक्र नहीं किया।
इसके अलावा किसी भी बड़े क्रिकेट मीडिया प्लेटफॉर्म ने भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। क्रिकेट वेबसाइट क्रिकइंफो और बीबीसी स्पोर्ट जैसी मीडिया संस्थाओं में भी इस तरह की कोई खबर सामने नहीं आई है।
The video clip in this post does not show Nasser Hussain saying anything about Ahmedabad pitch tampering, BCCI "misusing powers," or moving the T20 WC final to Pak/SL.
— Grok (@grok) March 8, 2026
It's from a recent Sky Sports podcast on general cricket politics, Indian franchise owners, and India-Pakistan…
रिपोर्ट्स के मुताबिक फाइनल के लिए तैयार की गई पिच स्टेडियम की सामान्य पिच की तरह ही है। यह मिश्रित मिट्टी से बनी फ्लैट ट्रैक मानी जा रही है, जिस पर आम तौर पर बड़े स्कोर बनने की संभावना रहती है।
साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल किया गया यह बयान पूरी तरह से मनगढ़ंत है। हुसैन के असली बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उनके नाम का इस्तेमाल कर क्रिकेट फैंस के बीच विवाद भड़काने की कोशिश की गई। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि किसी भी सनसनीखेज दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लेनी चाहिए।
Women's Day 2026: उम्र सिर्फ एक नंबर, इन महिलाओं के जोश और हिम्मत ने बना दिया इतिहास
International Women's Day 2026 Special: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर हम उन महिलाओं की कहानियों को सलाम कर रहे हैं, जिन्होंने अपने जोश, हिम्मत और आत्मविश्वास से उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं को तोड़ दिया। ये महिलाएं सिर्फ प्रेरणा का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह साबित करती हैं कि शक्ति, साहस और जुनून किसी भी उम्र या हालात की मोहताज नहीं होते।
चाहे वह 94 साल की मॉडल कारमेन डेल ओरेफिस हों, 87 साल की बाइकर दादी मंदाकिनी या 97 साल की पार्करनर ग्रेस चेंबर्स, इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक नंबर है। इनके अद्भुत कारनामे दिखाते हैं कि इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
इस महिला दिवस पर आइए जानें उन प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां, जिन्होंने साहस और जोश के दम पर इतिहास रचा और दूसरों के लिए मिसाल कायम की।
जोश-हिम्मत की मिसाल हैं ये महिलाएं
कारमेन डेल ओरेफिस: आमतौर माना जाता है कि ग्लैमर वर्ल्ड में 40-45 की उम्र के बाद स्कोप नहीं रह जाता है। लेकिन 94 वर्षीय अमेरिकन मॉडल-एक्ट्रेसकारमेन डेल ओरेफिस ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है। वे इस उम्र में भी मॉडलिंग कर रही हैं। वे सबसे उम्रदराज मॉडल हैं और उनकी भारी मांग है। वर्ष 1945में जब वे केवल 14 साल की थीं तो उन्होंने मॉडलिंग करनी शुरू कर दी थी।
मात्र 15 साल की उम्र में वर्ष 1946 में उनकी तस्वीर वोग पत्रिका के कवर पर प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2023 में जब वे 91 साल की हुईंतो एक बार फिर वेवोग पत्रिका के चेक एडिशन केकवर पर नजर आईं। उन पर एक किताब भी प्रकाशित हुई है। इस किताब का नाम है,‘कारमेन डेल ओरेफिसः दअल्टीमेट रोल मॉडल।’ इस किताब को फोटोग्राफर फादिल बेरोशा ने प्रकाशित किया है। वे कारमेन के साथ 30 सालोंसे काम कर रहे हैं। कारमेन कहती हैं कि वे अपनी बढ़ती उम्र को छिपाने का प्रयासनहीं करती हैं। उनका दर्शन है कि बस निरंतर चलते रहो और अपना काम करते रहो।
बाइकर दादी मंदाकिनी: हिंदी फिल्म ‘शोले’ में दो दोस्तों जय-वीरू की जोड़ी को लोग आज भी याद करते हैं। जय-वीरू की तरह ही मंदाकिनी और उनकी छोटी बहन उषा की जोड़ी भी है।अंतर इतना है कि मंदाकिनी की उम्र 87 साल है। वह ‘शोले’ फिल्म की स्टाइल में अपनी छोटी बहन 84 वर्षीय उषा के साथ अहमदाबाद की सड़कों पर अकसर स्कूटर राइडिंग करती नजर आ जाती हैं।
उनका कहना है कि उन्हें अपनी बढ़ती उम्र का अहसास ही नहीं होता। जब वे स्कूटर लेकर निकलती हैं औरहवा के झोंके उनके चेहरे को छूते हैं, तो वे स्वयं को 16 साल की लड़की जैसा महसूस करती हैं। बाइकर दादी के नाम से मशहूर मंदाकिनी, परिवार में पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में घर में आर्थिक तंगी का माहौल था। इसलिए 16 साल की उम्र में ही स्कूल टीचर बन गईं। उसके बाद वह सोशल वेलफेयर प्रोजेक्ट्स से भी जुड़ीं। आज मंदाकिनी जब अपनी बहन के साथ सड़कों पर स्कूटर दौड़ाती हैं तो उन्हें ऐसालगता है कि मानो यही जिंदगी का सबसे बड़ा सुख है। वे कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
ग्रेस चेंबर्स: जहां पचास साल की आयु पार करने के बाद अधिकांश लोग स्वयं को वृद्ध समझकर हार मानकर बैठजाते हैं, वहीं कुछ व्यक्ति उम्र को केवल नंबर मानकर इतिहास रच देते हैं। 97 साल की ब्रिटिश महिला ग्रेस चेंबर्स भी उन्हीं में से एक हैं। उन्होंने 250 पार्करन पूरा करने का कठिनलक्ष्य हासिल किया है। ऐसा करके वे यूरोप की सबसे वृद्ध पार्करनर बन गई हैं। पार्करनर वह होता है, जो पार्करन इवेंट में भागलेता है और इसे सफलतापूर्वक पूरा करता है।
यह 5 किमी. का सामुदायिक रनिंग कार्यक्रम है। यह हर शनिवार को विश्व भर के 22 से अधिक देशों में आयोजित किया जाता है। 250 रनिंग इवेंट में हिस्सा लेने पर हरे रंग की एक खास टी-शर्ट मिलती है। ग्रेस ने इस सम्मान को हासिल कर सबको चौंका दिया है। 9 साल पहले अपनी बेटी की चुनौती पर पहली बार पार्करन में हिस्सा लिया था। इससे पहले वह एक पर्वतारोहीभी रह चुकी हैं।
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