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सऊदी अरब ने बढ़ते हमलों के बीच ईरान को भ्रामक गणनाओं से बचने की चेतावनी दी

रियाद, 7 मार्च (आईएएनएस)। सऊदी अरब ने शनिवार को ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह “भ्रामक गणनाओं” से बचे क्योंकि पश्चिम एशिया में फैलते संघर्ष के बीच क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के अरब देशों की ओर भी सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें व हजारों ड्रोन दागे गए हैं।

इन हमलों में ऊर्जा ढांचे, नागरिक स्थानों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान अल सउद ने ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने यह बयान पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक के बाद दिया।

बैठक के बाद सऊदी मंत्री ने उम्मीद जताई कि ईरान “बुद्धिमानी और विवेक” से काम करेगा और ऐसे कदमों से बचेगा जो पहले से ही अस्थिर स्थिति को और भड़का सकते हैं। उन्होंने ईरान से “भ्रामक गणनाओं” से बचने की अपील की।

इस बीच सऊदी अरब ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने एक और हमले को सफलतापूर्वक रोक दिया। रियाद के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “प्रिंस सुल्तान एयरबेस की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया।”

अधिकारियों ने बताया कि हाल के दिनों में कई हवाई खतरों को भी निष्क्रिय किया गया है। शुक्रवार को चार ड्रोन मार गिराए गए, जिनमें से तीन रियाद के पूर्वी इलाकों में और एक रियाद के उत्तर-पूर्व में गिराया गया। इसके अलावा अल खर्ज शहर के ऊपर एक क्रूज़ मिसाइल को भी रोक लिया गया।

सप्ताह की शुरुआत में ईरानी ड्रोन ने रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बनाया था। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार दो ड्रोन परिसर से टकराए, जिससे सीमित आग लगी और मामूली संरचनात्मक नुकसान हुआ। इसके बाद अमेरिकी दूतावास ने एहतियात के तौर पर अमेरिकी नागरिकों से परिसर में आने से बचने की अपील की।

चल रहे हमलों के दौरान सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया। रस तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया, लेकिन सऊदी एयर डिफेंस ने ड्रोन को गिराकर किसी बड़े नुकसान को टाल दिया।

सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, रस तनुरा रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 5 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल की है, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण केंद्रों में से एक है।

--आईएएनएस

एसडी/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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परिवारवाद पर नीतीश कुमार का यू-टर्न, निशांत की एंट्री से क्या बदलेगी JDU की इमेज?

Nitish U-turn family politics: बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है. जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो सालों से परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. अब खुद अपने बेटे निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय भूमिका सौंपने की तैयारी में हैं. 8 मार्च 2026 को निशांत की आधिकारिक एंट्री होने वाली है जो नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ जुड़ी हुई लगती है.

यह कदम JDU के लिए एक मजबूत उत्तराधिकारी सामने तो लाता है, लेकिन क्या इससे पार्टी की छवि पर असर पड़ेगा? राजनीतिक आलोचक इसे नीतीश का 'यू-टर्न' बता रहे हैं जबकि समर्थक इसे पार्टी की स्थिरता के लिए जरूरी कदम मानते हैं. आइए, इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर नजर डालते हैं.

नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव पर परिवारवाद के आरोप लगाए 

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर हमेशा से ही सिद्धांतों पर आधारित रहा है. उन्होंने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कई बार हमला बोला है. 2010 और 2015 के चुनावों में नीतीश ने खुद को 'परिवारवाद-मुक्त' नेता के रूप में पेश किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कई बार ये बयान दिए थे कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि पारिवारिक संपत्ति है.

विजय कुमार चौधरी और राजीव रंजन सिंह ने की पुष्टि 

राजनीति से दूर रहे निशांत कुमार अब JDU में 'लीडिंग रोल' निभाने की ओर अग्रसर हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे विजय कुमार चौधरी और राजीव रंजन सिंह ने इसकी पुष्टि की है. बिहार के नेताओं ने अपने बयानों में कहा कि निशांत को संगठनात्मक कामकाज में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी. कुछ सूत्रों के मुताबिक उन्हें डिप्टी सीएम दी जा सकती है हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

JDU की कमजोर स्थिति और NDA गठबंधन में BJP की हुई मजबूत पकड़

निशांत कुमार को जेडीयू व राज्य में प्रमुख जिम्मेदारी देने का फैसला ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है. ऐसे में उनका सीएम पद से हटना तय माना जा रहा है जो बिहार के इतिहास में एक युग का अंत होगा. नीतीश 20 साल से ज्यादा समय से मुख्यमंत्री हैं लेकिन हाल के चुनावों में JDU की कमजोर स्थिति और NDA गठबंधन में BJP की मजबूत पकड़ ने उन्हें दिल्ली की ओर रुख करने पर मजबूर किया लगता है.

ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर बेहतर काम कर सकते हैं निशांत

पार्टी कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं. पटना के सीएम आवास पर हुई बैठक में कई नेता भावुक हो गए लेकिन निशांत की एंट्री से उत्साह भी है.JDU कैडर का मानना है कि निशांत नीतीश की विरासत को आगे ले जाएंगे खासकर ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर बेहतर काम कर सकते हैं.

2030 के विधानसभा चुनावों में बनेगा बड़ा मुद्दा

वहीं, विपक्ष इस मौके को भुनाने में जुटा है. RJD नेता तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि नीतीश अब खुद वही कर रहे हैं जिसकी उन्होंने सालों आलोचना की. कांग्रेस और अन्य पार्टियां इसे JDU में 'परिवारवाद की शुरुआत' बता रही हैं जो 2030 के विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है.

यूजर्स ने एक्स पर नीतीश के पुराने बयानों को किया शेयर

बिहार के हालिया घटनाक्रम से सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ी है. कुछ यूजर्स ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर नीतीश के पुराने बयानों को शेयर कर रहे हैं जहां उन्होंने कहा था कि 'परिवारवाद लोकतंत्र की जड़ें खोखली करता है'. लेकिन JDU के समर्थक इसका बचाव करते हुए कहते हैं कि निशांत की एंट्री कार्यकर्ताओं की मांग पर है न कि नीतीश की इच्छा पर उन्हें आगे किया गया है.

'सुशासन बाबू' वाली इमेज धूमिल होगी?

बिहार की मौजूदा राजनीति में यह बदलाव NDA गठबंधन को भी प्रभावित कर सकता है. BJP पहले से ही सीएम पद पर दावा ठोक रही है जहां सम्राट चौधरी या विजय सिन्हा जैसे नाम चर्चा में हैं. निशांत की एंट्री से JDU अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्या इससे पार्टी की 'सुशासन बाबू' वाली इमेज धूमिल होगी? 

'नीतीश का यू-टर्न, लेकिन बिहार को स्थिरता की जरूरत है'

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि परिवारवाद का आरोप JDU को कमजोर कर सकता है, खासकर युवा वोटर्स में जो बदलाव चाहते हैं. दूसरी ओर निशांत का तकनीकी बैकग्राउंड और नीतीश की छवि से जुड़ाव पार्टी को नए वोटर्स आकर्षित कर सकता है. एक्स पर एक यूजर ने लिखा 'नीतीश का यू-टर्न, लेकिन बिहार को स्थिरता की जरूरत है'.

बिहार की राजनीति में अब 'नीतीश युग' से 'निशांत युग' 

कुल मिलाकर यह कदम JDU के लिए एक जोखिम भरा दांव है. अगर निशांत सफल होते हैं तो पार्टी की इमेज मजबूत हो सकती है, वरना परिवारवाद का ठप्पा लग सकता है. बिहार की राजनीति में अब 'नीतीश युग' से 'निशांत युग' की ओर संक्रमण हो रहा है जो आने वाले दिनों में बड़े ड्रामे का संकेत देता है.

 FAQs

Q1. नीतीश कुमार ने परिवारवाद पर पहले क्या स्टैंड लिया था?
    
उत्तर- नीतीश कुमार ने हमेशा परिवारवाद की आलोचना की है, उन्होंने कहा था कि राजनीति में योग्यता होनी चाहिए, न कि खानदानी विरासत.

Q2. निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री कब और कैसे हो रही है? 
   उत्तर-निशांत 8 मार्च 2026 को JDU में शामिल होंगे. उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जैसे डिप्टी सीएम की सीट.

Q3. इस यू-टर्न से JDU की इमेज पर क्या असर पड़ेगा?  
उत्तर- कुछ का मानना है कि इससे पार्टी कमजोर होगी, क्योंकि विपक्ष इसे हाइपोक्रिसी बताएगा. लेकिन समर्थक इसे उत्तराधिकार योजना के रूप में देखते हैं जो स्थिरता लाएगी.

Q4. नीतीश कुमार राज्यसभा क्यों जा रहे हैं? 
उत्तर- नीतीश ने अपना सीएम पद छोड़ने का फैसला लिया है, शायद उम्र और पार्टी की कमजोर स्थिति के कारण उन्होंने ये निर्णय लिया है. वे अब केंद्रीय राजनीति में भूमिका निभा सकते हैं.

Q5. बिहार की राजनीति में आगे क्या बदलाव संभव हैं? 
 उत्तर- NDA में BJP सीएम पद ले सकती है, जबकि JDU निशांत के नेतृत्व में खुद को मजबूत करने की कोशिश करेगी.

हो गया तय, नीतीश कुमार के रहते ये काम करने जा रहे हैं बेटे निशांत कुमार, जेडीयू की बैठक में हुआ बड़ा फैसला

 

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