परिवारवाद पर नीतीश कुमार का यू-टर्न, निशांत की एंट्री से क्या बदलेगी JDU की इमेज?
Nitish U-turn family politics: बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है. जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो सालों से परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. अब खुद अपने बेटे निशांत कुमार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय भूमिका सौंपने की तैयारी में हैं. 8 मार्च 2026 को निशांत की आधिकारिक एंट्री होने वाली है जो नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ जुड़ी हुई लगती है.
यह कदम JDU के लिए एक मजबूत उत्तराधिकारी सामने तो लाता है, लेकिन क्या इससे पार्टी की छवि पर असर पड़ेगा? राजनीतिक आलोचक इसे नीतीश का 'यू-टर्न' बता रहे हैं जबकि समर्थक इसे पार्टी की स्थिरता के लिए जरूरी कदम मानते हैं. आइए, इस मुद्दे के सभी पहलुओं पर नजर डालते हैं.
#WATCH | Patna | On JDU meeting with Bihar CM Nitish Kumar's son Nishant Kumar, RLM chief and NDA Rajya Sabha candidate Upendra Kushwaha says, "I don't know if a decision was taken, but I was the first one who suggested the entry of Nishant into the party. If such a decision is… pic.twitter.com/AFN9lUQzdf
— ANI (@ANI) March 7, 2026
नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव पर परिवारवाद के आरोप लगाए
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर हमेशा से ही सिद्धांतों पर आधारित रहा है. उन्होंने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कई बार हमला बोला है. 2010 और 2015 के चुनावों में नीतीश ने खुद को 'परिवारवाद-मुक्त' नेता के रूप में पेश किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कई बार ये बयान दिए थे कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि पारिवारिक संपत्ति है.
विजय कुमार चौधरी और राजीव रंजन सिंह ने की पुष्टि
राजनीति से दूर रहे निशांत कुमार अब JDU में 'लीडिंग रोल' निभाने की ओर अग्रसर हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे विजय कुमार चौधरी और राजीव रंजन सिंह ने इसकी पुष्टि की है. बिहार के नेताओं ने अपने बयानों में कहा कि निशांत को संगठनात्मक कामकाज में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी. कुछ सूत्रों के मुताबिक उन्हें डिप्टी सीएम दी जा सकती है हालांकि इसकी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
JDU की कमजोर स्थिति और NDA गठबंधन में BJP की हुई मजबूत पकड़
निशांत कुमार को जेडीयू व राज्य में प्रमुख जिम्मेदारी देने का फैसला ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है. ऐसे में उनका सीएम पद से हटना तय माना जा रहा है जो बिहार के इतिहास में एक युग का अंत होगा. नीतीश 20 साल से ज्यादा समय से मुख्यमंत्री हैं लेकिन हाल के चुनावों में JDU की कमजोर स्थिति और NDA गठबंधन में BJP की मजबूत पकड़ ने उन्हें दिल्ली की ओर रुख करने पर मजबूर किया लगता है.
Those who don't have any knowledge or experience, are speaking against me at behest of their advisors. We're not interested in campaign, we're concerned about nepotism. We consider whole Bihar as one family but for few, only blood relatives are their family: Bihar CM Nitish Kumar https://t.co/dY4dQnimee pic.twitter.com/gUKtwQzcZx
— ANI (@ANI) October 26, 2020
ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर बेहतर काम कर सकते हैं निशांत
पार्टी कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं. पटना के सीएम आवास पर हुई बैठक में कई नेता भावुक हो गए लेकिन निशांत की एंट्री से उत्साह भी है.JDU कैडर का मानना है कि निशांत नीतीश की विरासत को आगे ले जाएंगे खासकर ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर बेहतर काम कर सकते हैं.
2030 के विधानसभा चुनावों में बनेगा बड़ा मुद्दा
वहीं, विपक्ष इस मौके को भुनाने में जुटा है. RJD नेता तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि नीतीश अब खुद वही कर रहे हैं जिसकी उन्होंने सालों आलोचना की. कांग्रेस और अन्य पार्टियां इसे JDU में 'परिवारवाद की शुरुआत' बता रही हैं जो 2030 के विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है.
यूजर्स ने एक्स पर नीतीश के पुराने बयानों को किया शेयर
बिहार के हालिया घटनाक्रम से सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ी है. कुछ यूजर्स ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर नीतीश के पुराने बयानों को शेयर कर रहे हैं जहां उन्होंने कहा था कि 'परिवारवाद लोकतंत्र की जड़ें खोखली करता है'. लेकिन JDU के समर्थक इसका बचाव करते हुए कहते हैं कि निशांत की एंट्री कार्यकर्ताओं की मांग पर है न कि नीतीश की इच्छा पर उन्हें आगे किया गया है.
'सुशासन बाबू' वाली इमेज धूमिल होगी?
बिहार की मौजूदा राजनीति में यह बदलाव NDA गठबंधन को भी प्रभावित कर सकता है. BJP पहले से ही सीएम पद पर दावा ठोक रही है जहां सम्राट चौधरी या विजय सिन्हा जैसे नाम चर्चा में हैं. निशांत की एंट्री से JDU अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन क्या इससे पार्टी की 'सुशासन बाबू' वाली इमेज धूमिल होगी?
'नीतीश का यू-टर्न, लेकिन बिहार को स्थिरता की जरूरत है'
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि परिवारवाद का आरोप JDU को कमजोर कर सकता है, खासकर युवा वोटर्स में जो बदलाव चाहते हैं. दूसरी ओर निशांत का तकनीकी बैकग्राउंड और नीतीश की छवि से जुड़ाव पार्टी को नए वोटर्स आकर्षित कर सकता है. एक्स पर एक यूजर ने लिखा 'नीतीश का यू-टर्न, लेकिन बिहार को स्थिरता की जरूरत है'.
बिहार की राजनीति में अब 'नीतीश युग' से 'निशांत युग'
कुल मिलाकर यह कदम JDU के लिए एक जोखिम भरा दांव है. अगर निशांत सफल होते हैं तो पार्टी की इमेज मजबूत हो सकती है, वरना परिवारवाद का ठप्पा लग सकता है. बिहार की राजनीति में अब 'नीतीश युग' से 'निशांत युग' की ओर संक्रमण हो रहा है जो आने वाले दिनों में बड़े ड्रामे का संकेत देता है.
FAQs
Q1. नीतीश कुमार ने परिवारवाद पर पहले क्या स्टैंड लिया था?
उत्तर- नीतीश कुमार ने हमेशा परिवारवाद की आलोचना की है, उन्होंने कहा था कि राजनीति में योग्यता होनी चाहिए, न कि खानदानी विरासत.
Q2. निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री कब और कैसे हो रही है?
उत्तर-निशांत 8 मार्च 2026 को JDU में शामिल होंगे. उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जैसे डिप्टी सीएम की सीट.
Q3. इस यू-टर्न से JDU की इमेज पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर- कुछ का मानना है कि इससे पार्टी कमजोर होगी, क्योंकि विपक्ष इसे हाइपोक्रिसी बताएगा. लेकिन समर्थक इसे उत्तराधिकार योजना के रूप में देखते हैं जो स्थिरता लाएगी.
Q4. नीतीश कुमार राज्यसभा क्यों जा रहे हैं?
उत्तर- नीतीश ने अपना सीएम पद छोड़ने का फैसला लिया है, शायद उम्र और पार्टी की कमजोर स्थिति के कारण उन्होंने ये निर्णय लिया है. वे अब केंद्रीय राजनीति में भूमिका निभा सकते हैं.
Q5. बिहार की राजनीति में आगे क्या बदलाव संभव हैं?
उत्तर- NDA में BJP सीएम पद ले सकती है, जबकि JDU निशांत के नेतृत्व में खुद को मजबूत करने की कोशिश करेगी.
ग्लोबल जीडीपी में भारत को बढ़त, चीन ने कहा- वैश्विक विकास में करीब आधे के हिस्सेदार होंगे दोनों देश
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को लेकर ग्लोबल रियल जीडीपी ग्रोथ 2026 रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन और भारत मिलकर जीडीपी में अमेरिका को पछाड़ता हुआ नजर आ रहे हैं। आईएमएफ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन अकेले मिलकर विश्व के 43.6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का हिस्सा हैं।
इसके अलावा, एशिया-पैसिफिक की हिस्सेदारी कुल ग्रोथ का 50 फीसदी पहुंचने की उम्मीद है। वहीं इस रिपोर्ट में अकेले चीन का जीडीपी ग्रोथ 26.6 फीसदी और भारत का 17 फीसदी आंका गया है। आईएमएफ ने अपनी इस ग्लोबल रिपोर्ट में अमेरिका का 9.9 फीसदी, इंडोनेशिया का 3.8 फीसदी, तुर्किए का 2.2 फीसदी, सऊदी अरब का 1.7 फीसदी, वियतनाम का 1.6 फीसदी, नाइजीरिया का 1.5 फीसदी, ब्राजील का 1.5 फीसदी और जर्मनी का 0.9 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
वहीं भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 2026 में, चीन से ग्लोबल रियल जीडीपी ग्रोथ में 26.6 फीसदी योगदान की उम्मीद है, जबकि भारत 17 फीसदी और जोड़ेगा। हम मिलकर वैश्विक विकास में लगभग 44 फीसदी का योगदान देंगे।
बता दें, चीन ने 2026 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ का टारगेट 4.5 से 5 फीसदी तक रखा है। 1991 के बाद से यह अब तक का सबसे कम आंकड़ा है। वहीं दूसरी ओर भारत इस वक्त दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। हालांकि, चीन और भारत के प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारी अंतर है। आंकड़ों के अनुसार, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत की तुलना में लगभग 4.76 गुना अधिक है। वर्ष 2025 के अनुमानों के मुताबिक, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 13,687 डॉलर थी, जबकि भारत के लिए यह आंकड़ा 2,878 डॉलर रहा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि में 17 प्रतिशत योगदान देने की उम्मीद है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
आईएमएफ की शीर्ष 10 देशों की सूची में अन्य देशों की बात करें तो अमेरिका से वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके बाद इंडोनेशिया 3.8 प्रतिशत, तुर्किए 2.2 प्रतिशत, सऊदी अरब 1.7 प्रतिशत और वियतनाम 1.6 प्रतिशत योगदान दे सकते हैं। वहीं नाइजीरिया और ब्राजील दोनों का योगदान लगभग 1.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
इस लिस्ट में जर्मनी 10वें स्थान पर है और उससे वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 0.9 प्रतिशत योगदान का अनुमान है। इसके अलावा यूरोप के अन्य देश आईएमएफ की शीर्ष 10 सूची में शामिल नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की 2025 की आर्थिक विकास दर का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में आईएमएफ ने कहा कि यह संशोधन चालू वित्त वर्ष (जो 31 मार्च 2026 को समाप्त होगा) की चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए किया गया है।
आईएमएफ के अनुसार, अगले वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि इसमें थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद भारत उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विकास का प्रमुख इंजन बना रहेगा।
--आईएएनएस
केके/एएस
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