Clay Pot Buying: मटका खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान मिलेगा फ्रिज जैसा ठंडा पानी!
Clay Pot Buying: गर्मियों का मौसम आते ही ठंडे पानी की जरूरत बढ़ जाती है। आज भले ही फ्रिज हर घर में मौजूद हो, लेकिन मिट्टी के मटके का ठंडा और सोंधी खुशबू वाला पानी पीने का मजा अलग ही होता है। यही वजह है कि गर्मी शुरू होते ही बाजारों में मटकों की मांग बढ़ने लगती है। लेकिन कई लोग बिना जांचे-परखे मटका खरीद लेते हैं, जिससे पानी सही तरह से ठंडा नहीं होता।
दरअसल हर मटका ठंडा पानी देने में सक्षम नहीं होता। मटके की मिट्टी, उसकी मोटाई और बनाने का तरीका ही तय करता है कि उसमें रखा पानी कितना ठंडा होगा। इसलिए अगर आप इस गर्मी मटका खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
इन टिप्स को ध्यान रखकर खरीदें मटका
अच्छी मिट्टी से बना मटका चुनें
मटका खरीदते समय सबसे पहले उसकी मिट्टी पर ध्यान दें। अच्छी क्वालिटी का मटका चिकनी और मजबूत मिट्टी से बना होता है। अगर मिट्टी में ज्यादा रेत या कंकड़ होंगे, तो मटका जल्दी टूट सकता है और पानी भी ज्यादा ठंडा नहीं रहेगा। इसलिए हमेशा साफ और मजबूत मिट्टी से बना मटका ही खरीदें।
मटके की मोटाई जरूर जांचें
मटके की मोटाई भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। बहुत पतला मटका जल्दी टूट सकता है और पानी भी ज्यादा ठंडा नहीं रख पाएगा। वहीं बहुत ज्यादा मोटा मटका पानी को सही तरीके से ठंडा नहीं कर पाता। इसलिए मध्यम मोटाई वाला मटका खरीदना सबसे बेहतर माना जाता है।
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मटके में दरार या लीकेज न हो
मटका खरीदने से पहले उसे ध्यान से देखना जरूरी है। कई बार मटके में हल्की दरार या बाल जैसी क्रैक होती है, जो बाद में बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे मटकों में पानी धीरे-धीरे रिसने लगता है। इसलिए खरीदने से पहले मटके को चारों तरफ से अच्छी तरह जांच लें।
मटके की आवाज से पहचानें गुणवत्ता
मटके की गुणवत्ता जांचने का एक आसान तरीका उसकी आवाज भी है। अगर आप हल्के से मटके को थपथपाते हैं और उसमें से साफ और खनखनाती आवाज आती है, तो समझिए मटका अच्छी तरह पका हुआ है। अगर आवाज भारी या दबाव वाली लगे, तो मटका पूरी तरह पका नहीं है।
नया मटका इस्तेमाल से पहले करें यह काम
नया मटका खरीदने के बाद उसे सीधे पानी भरकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पहले उसे 8 से 10 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखें। इससे मिट्टी की गंध कम हो जाती है और मटका मजबूत भी हो जाता है। इसके बाद जब उसमें पानी रखा जाएगा, तो वह ज्यादा ठंडा और स्वादिष्ट लगेगा।
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लेखक: (कीर्ति)
Feet Swelling: पैरों की सूजन को हल्के में न लें! शरीर में छिपी इन 5 बड़ी बीमारियों का हो सकता है संकेत
Feet Swelling: कई लोग दिनभर की थकान या ज्यादा देर तक खड़े रहने को पैरों की सूजन की वजह मानकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक पैरों में सूजन कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकती है।
दरअसल शरीर में जब किसी अंग का काम प्रभावित होता है या शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तो उसका असर पैरों पर दिखने लगता है। यही वजह है कि लगातार पैरों में सूजन होना दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियों की ओर इशारा कर सकता है।
इन 5 बीमारियों के हो सकते हैं संकेत
दिल की बीमारी
अगर पैरों में सूजन के साथ सांस फूलना, थकान या सीने में भारीपन महसूस हो रहा है, तो यह दिल से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। जब दिल शरीर में खून को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसका असर सबसे पहले पैरों और टखनों में सूजन के रूप में दिखाई देता है।
किडनी की समस्या
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। लेकिन जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। इससे पैरों, टखनों और कभी-कभी चेहरे पर भी सूजन दिखाई देने लगती है। लगातार सूजन रहना किडनी से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है।
लिवर की बीमारी
लिवर की खराबी भी पैरों की सूजन का कारण बन सकती है। जब लिवर सही तरीके से प्रोटीन नहीं बना पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण पैरों और पेट में सूजन आ सकती है। लंबे समय तक सूजन रहना लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकता है।
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थायरॉइड की समस्या
थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है। अगर थायरॉइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इससे पैरों में सूजन, वजन बढ़ना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर हाइपोथायरॉइडिज्म में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
नसों से जुड़ी समस्या
कई बार पैरों की नसों में खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। इस स्थिति को वेनस इंसफिशिएंसी कहा जाता है। इसमें खून पैरों में ही जमा होने लगता है, जिससे टखनों और पैरों में सूजन आ जाती है। अगर सूजन के साथ दर्द या त्वचा का रंग बदलना भी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
अगर पैरों की सूजन अचानक बढ़ जाए, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ दर्द, सांस लेने में दिक्कत या थकान जैसी समस्याएं हों, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती दौर में ही नियंत्रित किया जा सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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