ईरान में युद्ध के बाद पहला जुम्मा, उमड़े हजारों लोग [Hundreds gather in Tehran for Friday prayers]
शुक्रवार को तेहरान में जुमे की नमाज के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए और उन्होंने अमेरिकी-इस्राएली हमलों का विरोध भी किया. ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहला जुमा था.
ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण करो’, वरना युद्ध | समझौते की गुंजाइश खत्म
नई दिल्ली : मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया है कि अब बातचीत की मेज पर केवल एक ही विकल्प मौजूद है—ईरान का 'बिना शर्त आत्मसमर्पण'।
इस बयान ने न केवल युद्ध की गंभीरता को बढ़ा दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी खलबली मचा दी है। अमेरिका की इस 'नो-डील' नीति ने साफ कर दिया है कि वह अब किसी भी तरह के समझौते या मध्यस्थता के मूड में नहीं है।
ट्रंप का कड़ा संदेश और 'नो-डील' की घोषणा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपनी रणनीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि अमेरिका अब किसी भी छोटी-मोटी शर्तों पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने 'अनकंडीशनल सरेंडर' यानी बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग रखकर यह संकेत दिया है कि ईरान को अपनी तमाम सैन्य और परमाणु गतिविधियों को पूरी तरह रोकना होगा। ट्रंप का यह संदेश सीधे तौर पर ईरान के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
मध्य पूर्व में गहराता युद्ध का संकट
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और उसके प्रतिद्वंद्वियों के बीच सैन्य टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों में युद्ध की तीव्रता जिस तरह बढ़ी है, उसने वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ट्रंप ने इस युद्ध की गहराती स्थिति को देखते हुए अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है, जिससे क्षेत्र में पूर्ण सैन्य संघर्ष की आशंका प्रबल हो गई है।
अधिकतम दबाव की अमेरिकी रणनीति
अमेरिका की इस मांग के पीछे उसकी 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान पर इतना दबाव बनाया जाए कि उसके पास घुटने टेकने के अलावा कोई और रास्ता न बचे। इस कड़े रुख के जरिए अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान भविष्य में क्षेत्र के लिए किसी भी तरह का खतरा न बन सके। यह रणनीति ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति दोनों को पंगु बनाने के उद्देश्य से प्रेरित है।
वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
ट्रंप के इस कड़े रुख और युद्ध की आहट ने दुनिया भर के बाजारों में चिंता पैदा कर दी है। यदि स्थिति आत्मसमर्पण या बड़े युद्ध की ओर बढ़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम केवल एक सैन्य चेतावनी नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट की शुरुआत भी हो सकती है, जिससे भारत सहित कई देश प्रभावित होंगे।
क्या होगा ईरान का अगला कदम?
पूरी दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि ट्रंप की इस सीधी चुनौती पर ईरान की क्या प्रतिक्रिया होगी। आत्मसमर्पण की मांग किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए स्वीकार करना कठिन होता है, ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि ईरान जवाबी कार्रवाई के तौर पर संघर्ष को और अधिक बढ़ा सकता है। फिलहाल यह एक विकसित होती स्थिति है, जिसमें आने वाले कुछ घंटे बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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