जंग के छठे दिन ईरान का बड़ा यू-टर्न? परमाणु प्रोग्राम बंद करने के संकेत
पश्चिम एशिया में मचे घमासान के बीच एक खबर ने सबको चौंका दिया. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान के उप-विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा है कि अगर अमेरिका कोई 'बेहतर विकल्प' दे, तो ईरान अपना परमाणु प्रोग्राम छोड़ने को तैयार है. लेकिन जैसे ही यह खबर फैली, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने इस पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि यह बयान मौजूदा जंग को लेकर नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ हुई 'पुरानी बातचीत' के संदर्भ में था.
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और खामेनेई की मौत
यह सारा घटनाक्रम तब हो रहा है जब इजरायल और अमेरिका की संयुक्त जंग को छह दिन हो गए हैं. 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने ईरान की कमर तोड़ दी है. इसी हमले में ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी. तेहरान का कहना है कि वे अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठे तो थे, लेकिन तय समय से पहले ही उन पर हमला कर दिया गया.
ये भी पढ़ें- ट्रंप का साथ और 'अनलिमिटेड' हथियार, फिर भी इजरायली सेना के सामने क्यों खड़ी है बड़ी चुनौती?
जेनेवा की वो आखिरी कोशिश
28 फरवरी के हमले से ठीक 10 दिन पहले, यानी 17 फरवरी को जेनेवा में बातचीत का एक आखिरी दौर चला था. ओमान की मध्यस्थता में हुई इस मीटिंग का मकसद जंग को टालना था. उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन से ही चेतावनी दी थी कि "अगर ईरान डील नहीं करता, तो अंजाम बुरा होगा." ईरान को उम्मीद थी कि अमेरिका पाबंदियों को हटाने पर विचार करेगा, लेकिन बातचीत का वह रास्ता पूरी तरह बंद हो गया.
अमेरिका का असली मकसद क्या है?
वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि उनका मकसद अब सिर्फ समझौता करना नहीं है, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर बदलना है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे ईरान को परमाणु हथियारों तक कभी पहुंचने नहीं देंगे क्योंकि यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा सैन्य कार्रवाई कोई पहली पसंद नहीं थी, बल्कि यह ईरान के साथ डिप्लोमेसी फेल होने का नतीजा है.
ये भी पढ़ें- आखिर श्रीलंका के पास क्या कर रहा था ईरानी युद्धपोत ‘आइरिस देना’, जो हमले में हुआ तबाह
पाबंदियों की मार और समझौते की उम्मीद
ईरान के उप-विदेश मंत्री ने पहले ही कहा था कि अगर अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर लगी पाबंदियों को हटा दे, तो वे अपने यूरेनियम भंडार पर समझौता कर सकते हैं. ईरान के लोगों के लिए इस समय पैसों की किल्लत और महंगाई सबसे बड़ी समस्या है. लेकिन अब जब जंग शुरू हो चुकी है, तो 'पाबंदियों में ढील' की बात कोसों दूर नजर आती है.
क्या अब शांति की गुंजाइश है?
फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन, दोनों ही पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे. एक तरफ अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन और सुरक्षा की गारंटी चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने हक की बात कर रहा है. लेकिन खामेनेई की मौत के बाद ईरान के अंदरूनी हालात और भी नाजुक हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े और चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं.
ये भी पढ़ें- "हम नहीं चाहते खामेनेई जैसा ही कोई दूसरा कट्टरपंथी सत्ता में आए..." ईरान में नई लीडरशिप को लेकर ट्रंप की चिंता
भारत में वेयरहाउसिंग की मांग 2025 में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़ी
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में वेयरहाउसिंग की मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 72.5 मिलियन स्क्वायर फीट हो गई है, यह कोरोना के बाद मांग में सबसे तेज बढ़ोतरी है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट नाइट फ्रेंक इंडिया ने कहा कि 2025 की अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक की अवधि साल की सबसे मजबूत तिमाही बनकर उभरी है और इस दौरान 23.4 मिलियन स्क्वायर फीट के लेनदेन हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि वेयरहाउस लीज पर लेने वाली कंपनियों में ग्रेड ए के स्थान की मांग सबसे अधिक है और 2025 की कुल लीज में ग्रेड ए के स्थान की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत थी, जो कि पिछले साल समान अवधि में 62 प्रतिशत थी।
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों (एफएमसीजी और एफएमसीडी) की ओर से वेयरहाउसिंग की मांग मजबूत रही है और 2025 में हुए कुल 34 मिलियन स्क्वायर फीट के वेयरहाउसिंग लीज में इनकी हिस्सेदारी 47 प्रतिशत की रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि पुणे देश का सबसे उत्पादक वेयरहाउसिंग मार्केट बनकर उभरा है, जिसकी कुल वॉल्यूम में हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रही है। यहां वॉल्यूम में सालाना आधार पर 86 प्रतिशत की बढ़त हुई है।
पुणे और चेन्नई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े वेयरहाउस की अधिक मांग है और इन शहरों के कुल वॉल्यूम में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े वेयरहाउसिंग की मांग 51 प्रतिशत रही है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतर्राष्ट्रीय पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा,“वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों और बुनियादी ढांचे में निवेश में हो रही तेजी को देखते हुए, हमें पूरा भरोसा है कि भारत एक पसंदीदा विनिर्माण और वितरण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाले, संस्थागत स्तर के वेयरहाउसिंग की निरंतर मांग बनी रहेगी।”
फर्म ने कहा कि बाजार के प्रदर्शन ने वैश्विक और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क के भीतर एक मजबूत, विस्तार योग्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को और पुष्ट किया है। वर्ष के दौरान रिक्त स्थान का स्तर 11.6 प्रतिशत पर स्थिर रहा।
ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा स्थान अधिग्रहण में 2025 में वार्षिक आधार पर 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे 7.8 मिलियन वर्ग फुट स्थान का उपयोग हुआ, जो 2021 के बाद से दर्ज की गई उच्चतम वार्षिक मात्रा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















