भारत में वेयरहाउसिंग की मांग 2025 में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़ी
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में वेयरहाउसिंग की मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 72.5 मिलियन स्क्वायर फीट हो गई है, यह कोरोना के बाद मांग में सबसे तेज बढ़ोतरी है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट नाइट फ्रेंक इंडिया ने कहा कि 2025 की अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक की अवधि साल की सबसे मजबूत तिमाही बनकर उभरी है और इस दौरान 23.4 मिलियन स्क्वायर फीट के लेनदेन हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि वेयरहाउस लीज पर लेने वाली कंपनियों में ग्रेड ए के स्थान की मांग सबसे अधिक है और 2025 की कुल लीज में ग्रेड ए के स्थान की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत थी, जो कि पिछले साल समान अवधि में 62 प्रतिशत थी।
मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों (एफएमसीजी और एफएमसीडी) की ओर से वेयरहाउसिंग की मांग मजबूत रही है और 2025 में हुए कुल 34 मिलियन स्क्वायर फीट के वेयरहाउसिंग लीज में इनकी हिस्सेदारी 47 प्रतिशत की रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि पुणे देश का सबसे उत्पादक वेयरहाउसिंग मार्केट बनकर उभरा है, जिसकी कुल वॉल्यूम में हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रही है। यहां वॉल्यूम में सालाना आधार पर 86 प्रतिशत की बढ़त हुई है।
पुणे और चेन्नई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े वेयरहाउस की अधिक मांग है और इन शहरों के कुल वॉल्यूम में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े वेयरहाउसिंग की मांग 51 प्रतिशत रही है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतर्राष्ट्रीय पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा,“वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों और बुनियादी ढांचे में निवेश में हो रही तेजी को देखते हुए, हमें पूरा भरोसा है कि भारत एक पसंदीदा विनिर्माण और वितरण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाले, संस्थागत स्तर के वेयरहाउसिंग की निरंतर मांग बनी रहेगी।”
फर्म ने कहा कि बाजार के प्रदर्शन ने वैश्विक और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क के भीतर एक मजबूत, विस्तार योग्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को और पुष्ट किया है। वर्ष के दौरान रिक्त स्थान का स्तर 11.6 प्रतिशत पर स्थिर रहा।
ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा स्थान अधिग्रहण में 2025 में वार्षिक आधार पर 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे 7.8 मिलियन वर्ग फुट स्थान का उपयोग हुआ, जो 2021 के बाद से दर्ज की गई उच्चतम वार्षिक मात्रा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत में एआई इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए आईबीएम ने लॉन्च किया पहला इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन सेंटर
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। दिग्गज आईटी कंपनी आईबीएम ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने भारत में अपना पहला इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन सेंटर लॉन्च किया है। यह सेंटर कंपनी के नए इंडिया सिस्टम्स डेवलपमेंट लैब (आईएसडीएल) कैंपस में स्थापित किया गया है।
संगम इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन सेंटर के नाम से शुरू किया गया यह केंद्र भारत को एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इनोवेशन के प्रमुख हब के रूप में मजबूत बनाने की दिशा में आईबीएम का बड़ा निवेश माना जा रहा है। यह केंद्र घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों के लिए भी तकनीकी समाधान विकसित करने में मदद करेगा।
कंपनी ने बताया कि इस सेंटर को एक सहयोगी इंजीनियरिंग हब के रूप में तैयार किया गया है, जहां आईबीएम के सिस्टम आर्किटेक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ मिलकर ग्राहकों, स्वतंत्र सॉफ्टवेयर विक्रेताओं, ग्लोबल सिस्टम इंटीग्रेटर्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और अन्य इकोसिस्टम पार्टनर्स के साथ एआई समाधान तैयार करेंगे।
हाइब्रिड क्लाउड क्षमताओं, उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों और एआई समाधानों को एक ही जगह पर एकीकृत करके यह केंद्र सुरक्षित और स्केलेबल एंटरप्राइज एआई सिस्टम के विकास और उनके तेजी से उपयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
आईबीएम इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल ने कहा कि भारत इस समय अपने एआई सफर के एक अहम मोड़ पर खड़ा है और आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर यह तय करेगा कि संस्थाएं कितनी तेजी और बड़े स्तर पर नवाचार कर पाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न उद्योगों में कंपनियां अपने महत्वपूर्ण सिस्टम को आधुनिक बनाकर उन्हें एआई-रेडी बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यह नया केंद्र भारत के प्रति आईबीएम की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और कंपनी को स्थानीय स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान डिजाइन, विकसित और बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता को मजबूत करेगा, साथ ही वैश्विक नवाचार में भी योगदान देगा।
वहीं, आईबीएम इंडिया सिस्टम्स डेवलपमेंट लैब के वाइस प्रेसिडेंट सुभथरा श्रीनिवासराघवन ने कहा कि एआई उतना ही प्रभावी होता है जितना मजबूत उसे सपोर्ट करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। उन्होंने बताया कि यह केंद्र गहरी सिस्टम इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और इकोसिस्टम सहयोग को एक साथ लाकर ग्राहकों को बड़े स्तर पर एआई लागू करने में मदद करेगा, साथ ही प्रदर्शन, सुरक्षा, गवर्नेंस और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित करेगा।
पिछले वर्ष आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया था कि भारत की 58 प्रतिशत कंपनियों ने बढ़ती एआई मांग को देखते हुए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाया है। इस अध्ययन के अनुसार, 2025 में इंफ्रास्ट्रक्चर बजट में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है और लगभग 43 प्रतिशत कंपनियां एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कर चुकी हैं या इसकी योजना बना रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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