सुनी जा सकती हैं मिल्की वे गैलेक्सी की 'आवाजें', क्या है 'डेटा सोनिफिकेशन' प्रोजेक्ट
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। स्पेस की दुनिया कई रहस्यों से भरी पड़ी है। ऐसा ही एक रहस्य मिल्की वे या आकाशगंगा। हमारी मिल्की वे गैलेक्सी का केंद्र इतना दूर है कि हम वहां खुद नहीं जा सकते लेकिन विज्ञान की मदद से हम इसे देख और सुन भी सकते हैं।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने एक खास तरीका अपनाया है, जिसे डेटा सोनिफिकेशन कहते हैं। यह प्रक्रिया डिजिटल डेटा (जैसे वन और जीरो) को ध्वनि में बदल देती है, ताकि हम ब्रह्मांड की खूबसूरती को कान से सुन सकें। यह प्रोजेक्ट मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र को पहली बार सुनने लायक बनाता है। यहां लगभग 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर सुपरमैसिव ब्लैक होल सैजिटेरियस ए स्टार या सैग मौजूद है, जिसका द्रव्यमान 40 लाख सूर्यों के बराबर है। यह इलाका करीब 400 प्रकाश वर्ष फैला हुआ है, जहां तारे बनते हैं, विस्फोट होते हैं और गैस-धूल के बादल चमकते हैं।
सोनिफिकेशन में एक बार इमेज के बाईं तरफ से शुरू होकर दाईं तरफ जाती है। आवाजें सोर्स की जगह और चमक के आधार पर बनती हैं। चमक जितनी ज्यादा होती है, वॉल्यूम उतना तेज होता है। अलग-अलग तारे और कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट अलग-अलग नोट्स में बदल जाते हैं। गैस और धूल के फैले बादल एक लगातार बदलती ड्रोन जैसी ध्वनि बनाते हैं। प्रक्रिया में जब बार इमेज के नीचे दाईं तरफ पहुंचती है, जहां सबसे चमकीला हिस्सा है, तो आवाज क्रेसेंडो या धीरे-धीरे तेज हो जाती है। यही वह जगह है जहां सैजिटेरियस है और गैस-धूल सबसे ज्यादा चमकते हैं।
यह सोनिफिकेशन नासा के तीन बड़े टेलीस्कोपों के डेटा से बनाया गया है, इनमें पहला चंद्रमा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी है, जो लाखों डिग्री गर्म गैस, स्टेलर विस्फोट और ब्लैक होल से निकलने वाली ऊर्जा दिखाती है और हबल स्पेस टेलीस्कोप तारे बनने वाले एनर्जेटिक इलाकों को कैप्चर करता है। वहीं, स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप इंफ्रारेड में धूल के चमकते बादलों और संरचनाओं को उजागर करता है।
स्पेस एजेंसी के अनुसार, यूजर्स इन डेटा को अलग-अलग सुन सकते हैं, हर टेलीस्कोप का सोलो वर्जन या तीनों को साथ में रखकर बजाता है। इस प्रोजेक्ट में मिल्की वे सेंटर के अलावा कैसिओपिया ए (एक सुपरनोवा के बचे हुए हिस्से) और मेसियर 16 में पिलर्स ऑफ क्रिएशन के सोनिफाइड वर्जन भी बनाए गए हैं।
यह आवाज ब्रह्मांड को समझने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो विजुअल इमेज नहीं देख सकते। नासा का यूनिवर्स ऑफ साउंड प्रोजेक्ट इसी दिशा में काम करता है। सोनिफिकेशन चंद्रा एक्स-रे सेंटर ने नासा के यूनिवर्स ऑफ लर्निंग प्रोग्राम के तहत किया है। इसमें विजुअलाइजेशन साइंटिस्ट किम्बर्ली आर्कैंड, एस्ट्रोफिजिसिस्ट मैट रूसो और म्यूजिशियन एंड्रयू सांतागुइडा की टीम ने अहम योगदान दिया।
नासा का मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर इस प्रोग्राम को मैनेज करता है, जबकि स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी का चंद्रा एक्स-रे सेंटर साइंस और ऑपरेशंस संभालता है। यह काम नासा के साइंस एक्टिवेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जो सभी उम्र के लोगों के लिए विज्ञान को रोचक और सुलभ बनाता है।
--आईएएनएस
एमटी/पीयूष
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Ayurvedic Tips For Stomach Pain: पेट दर्द का कारण और आयुर्वेदिक निवारण जानिए, आचार्य बालकृष्ण ने दिया नुस्खा
Ayurvedic Tips For Stomach Pain: पेट में दर्द होना आजकल एक आम समस्या बन गया है. लोगों की खाने-पीने की खराब आदतों के चलते पेट दर्द ज्यादा होता है. पहले लोग ताजा भोजन करते थे लेकिन अब लोग खासतौर पर युवा और बच्चे पैक्ड और इंस्टेंट फूड्स खाते हैं. इससे पेट दर्द होना लाजमी है. हालांकि, पेट दर्द कई बार अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी हो सकता है. मगर कभी-कभी पेट दर्द होता है तो पाचन संबंधी माना जा सकता है. पतंजलि के आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में बताया इसका सही इलाज और कारण.
क्या कहते हैं आचार्य बालकृष्ण?
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने हाल ही में इंस्टाग्राम पेज पर एक पोस्ट शेयर किया है. इस पोस्ट में उन्होंने पेट दर्द के कारण और निवारण के लिए आयुर्वेदिक उपाय बताया है. उन्होंने कहा पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं. इनमें से एक मुख्य कारण भोजन का सही से पाचन न होना है.
पेट दर्द क्यों होता है?
हालांकि, पाचन और खाने के अलावा भी पेट दर्द के कुछ अन्य कारण हो सकते हैं. पाचन सही से न होने पर कब्ज, गैस, एसिडिटी और गलत खान-पान पेट दर्द की समस्या को बढ़ाता है. इसके अलावा, पेट में दर्द वायरल इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है. जो लोग बहुत ज्यादा तनाव लेते हैं उन्हें भी पेट दर्द की शिकायत रहती है. महिलाओं को मासिक धर्म में और उससे पहले दर्द होता है. किडनी स्टोन, गॉलब्लैडर स्टोन, लिवर में सूजन, अपेंडिसाइटिस और बच्चों को पेट में कीड़े होने की वजह से भी पेट दर्द होता है.
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क्या है पेट दर्द का आयुर्वेदिक उपाय?
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, पेट में दर्द होने पर आपको जब तक दर्द रहता है तब तक खाना नहीं खाना है. दर्द कम करने के लिए एक चौथाई चम्मच अजवायन भूनकर उसमें चुटकीभर काला नमक मिलाना है. इसके बाद गुनगुने पानी के साथ लेना है. पहले अजवायन-नमक को फांक लें और ऊपर से पानी पिएं. इस उपाय से पेट दर्द कम होता है.
पेट दर्द होने पर क्या खाएं?
जब पेट दर्द थोड़ा कम हो जाए तो आपको भोजन करना चाहिए. इस समस्या के होने पर आपको हल्का खाना खाना चाहिए. आप मूंग दाल की पतली खिचड़ी खा सकते हैं. केला खा सकते हैं. दही भी पाचन में सहायक होती है. नारियल पानी, ORS और अदरक की चाय से भी पेट दर्द कम होता है.
पेट दर्द में क्या काम न करें?
पेट दर्द में चाय, कॉफी, दूध और मसालेदार तली-भुनी चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए. पेट दर्द होने पर बहुत ज्यादा एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए. खट्टे फलों का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए. चीनी और शराब भी पेट दर्द में नहीं लेते हैं.
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