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Nepal Election में Gen Z की हुंकार, ओली-प्रचंड का अंत, बालेंद्र शाह का टाइम आ गया

पिछले साल केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के पतन का कारण बने जनरेशन जेड के विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल में पहली बार संसदीय चुनाव हुए हैं और मतगणना जारी है। 5 मार्च को मतदान हुआ और चुनाव अधिकारियों के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ। कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां और पार्टियां सत्ता के लिए होड़ में हैं। प्रमुख दावेदारों में केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी), शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस और पुष्प कमल दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) शामिल हैं। नेपाली कांग्रेस के 49 वर्षीय नेता और पार्टी के प्रमुख चेहरे गगन थापा भी शीर्ष पद के दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। थापा ने नेपाल को उस "बुढ़ापे" के चक्र से बाहर निकालने के वादे के साथ चुनाव प्रचार किया है, जिसमें अनुभवी नेता बार-बार सत्ता बदलते रहते हैं।

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आरएसपी 47 सीटों पर आगे 

इस बीच, अपेक्षाकृत नई राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी काफी ध्यान आकर्षित कर रही है। इस पार्टी का नेतृत्व पूर्व रैपर बलेंद्र शाह कर रहे हैं, जो पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं। उनकी पार्टी को नेपाल की स्थापित राजनीतिक ताकतों के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। नेपाल के आम चुनाव में नवीनतम रुझानों के अनुसार, आरएसपी 47 सीटों पर आगे चल रही है।

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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा-5 में पिछड़ रहे हैं

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली, नेपाल की प्रतिनिधि सभा के झापा-5 में हुए शुरुआती मतगणना में पिछड़ रहे हैं। प्रारंभिक मतगणना के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवार बलेंद्र शाह 1,478 वोटों के साथ आगे चल रहे हैं, जबकि ओली को अब तक 385 वोट मिले हैं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के रणजीत तमांग को 90 वोट प्राप्त हुए हैं। मतगणना जारी है और जैसे-जैसे और मतपत्रों की गिनती होगी, आंकड़े बदल सकते हैं।

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खामेनेई के बेटे को गुप्त रोग? US के रिपोर्ट ने दुनिया हिला दी

हाल ही में ईरान की राजनीति से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यह रिपोर्ट ईरान के सर्वोच्च नेता के बेटे मुस्तबा खामेनेई की सेहत और निजी जीवन से जुड़ी बताई जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि मोजतबा खामनेई को एक समय गुप्त रोग की समस्या का सामना करना पड़ा था। बताया जाता है कि इसी वजह से उनकी शादी भी काफी देर से हुई और उन्हें इलाज के लिए कई बार ब्रिटेन जाना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा खामनेई लंदन के प्रसिद्ध अस्पतालों में अपना इलाज भी करवाया था। कहा जाता है कि इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन की कई यात्राएं की और एक बार तो लगभग 2 महीने तक वहीं रहे। बताया यह भी जा रहा है कि परिवार की ओर से उन पर वारिस पैदा करने का दबाव था। कुछ लीक हुए दस्तावेज जिन्हें बाद में विकिलिक्स से जोड़ा गया। यह तक संकेत देते हैं कि उस समय परिवार चाहता था कि वह जल्द से जल्द पिता बने। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाज के बाद ही उनकी पत्नी गर्भवती हुई और उनके घर में बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम अली रखा गया। 

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अपने दादा और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नाम पर। अब सवाल उठता है कि यह गुप्त रोग समस्या थी क्या? मेडिकल भाषा में इसे एरेक्टाइल डिस्फंक्शनल कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या अक्सर 40 साल से अधिक उम्र के पुरुष में देखी जाती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे हाई ब्लड प्रेशर, अत्याधिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन या ब्लड शुगर की समस्या। आज दुनिया भर के लाखों पुरुष इस समस्या से भी प्रभावित है। हालांकि सही इलाज और बेहतर जीवन शैली और मेडिकल सलाह से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीच यह भी खबर आई कि मुस्तबा अब सुप्रीम लीडर भी बन चुके हैं। खासकर अपने पिता के जाने के बाद अभी तक इसे कई बार अमेरिका का वॉर प्रोपोगेंडा भी बताया जा रहा है। 

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मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

अली खामेनेई के निधन के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता बनने और सेना, न्यायपालिका और प्रमुख नीतिगत निर्णयों पर पूर्ण नियंत्रण संभालने के लिए तैयार हैं। मोजतबा खामेनेई अपने पिता के सभी दायित्वों को संभालेंगे। खबरों के अनुसार, अमेरिकी-इजराइल अभियानों के दौरान उन्हें सुर्खियों में लाने से संभावित जोखिमों को लेकर धर्मगुरुओं के बीच चिंताएं बनी हुई हैं, फिर भी आईआरजीसी (आंतरिक महाशक्ति आयोग) उनके उत्तराधिकार का समर्थन कर रहा है।

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पहले 97 और अब सेमीफाइनल में 89... जहां मैटर बड़े होते हैं, वहीं संजू सैमसन खड़े होते हैं

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