Weight Loss Tips By Swami Ramdev: 2 दिन में छह किलो वजन कैसे कम करें? स्वामी रामदेव ने बताया योग को वरदान
Weight Loss Tips By Swami Ramdev: वजन कम करना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही आदतें अपनाकर इसे तेजी से घटाया जा सकता है. आजकल बहुत से लोग अपने मोटापे से परेशान हैं और पतला होने के लिए कई उपाय करते हैं. फिर भी वेट कम नहीं कर पाते हैं. आपको बता दें वजन घटाने के लिए संयम और प्लानिंग की जरूरत होती है. सुबह का समय वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी होता है, क्योंकि यह पूरे दिन के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है. अगर आप 15 दिन में 4 किलो वजन कम करना चाहते हैं, तो हाल ही में स्वामी रामदेव ने फेसबुक लाइव में बताया कि कैसे योग से मोटापा कम कर सकते हैं. चलिए विस्तार से जानते हैं.
स्वामी रामदेव से जानें योग से क्या होता है?
फेसबुक लाइव में बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने जब नरसिंह से पूछा कि पहले आपका वजन कितना था. तो उन्होंने जबाव देते हुए कहा 94 kg था. फिर स्वामी रामदेव ने पूछा की अब कितना वजन है तो उन्होंने बताया 86.5 है. खास बात यह है कि उन्हें न तो बीपी है, न शुगर और न ही दिल से जुड़ी कोई बीमारी परेशान करती है. स्वामी रामदेव कहते हैं कि योग करने से हर तरह की बीमारी दूर हो जाती है. साथ ही मोटापा भी 2 दिन में कम हो जाता है.
यहां देखें लाइव वीडियो
वजन कम करने में योग क्यों है फायदेमंद
स्वामी रामदेव बताते हैं कि योग शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. इससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. योग करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है. नियमित योगाभ्यास करने से शरीर हल्का महसूस होता है और मोटापा नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.
सुबह की दिनचर्या पर दें खास ध्यान
वजन कम करने के लिए सुबह की शुरुआत सही तरीके से करना जरूरी है. स्वामी रामदेव के अनुसार सुबह जल्दी उठना चाहिए. उठने के बाद गुनगुना पानी पीना शरीर के लिए फायदेमंद होता है. इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकलने में मदद मिलती है. इसके बाद कम से कम 30 से 45 मिनट योग और प्राणायाम करना चाहिए.
स्वामी रामदेव ने बताया योग को वरदान
स्वामी रामदेव कई ऐसे योगासन बताते हैं जो वजन घटाने में मददगार माने जाते हैं. इनमें सूर्य नमस्कार सबसे प्रभावी माना जाता है. यह पूरे शरीर की एक्सरसाइज की तरह काम करता है. इसके अलावा कपालभाति प्राणायाम पेट की चर्बी कम करने में सहायक माना जाता है.
भस्त्रिका प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है. इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और फैट बर्न होने में मदद मिलती है. नियमित रूप से इन योगासनों का अभ्यास करने से शरीर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
खानपान में भी करें बदलाव
योग के साथ-साथ खानपान पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है. स्वामी रामदेव का कहना है कि तला-भुना और ज्यादा मीठा खाने से बचना चाहिए. दिनभर में हल्का और पौष्टिक भोजन लेना बेहतर रहता है. हरी सब्जियां, फल और सलाद को भोजन में शामिल करना चाहिए. ज्यादा पानी पीना भी शरीर के लिए जरूरी है। इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.
कहीं आप भी तो नहीं खा रहे सीधा क्रीम से बना घी, जानें क्या कहता है आयुर्वेद
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। आज के समय में शुद्ध घी मिल पाना अपने आप में एक अनोखी बात है। बाजार में मिलने वाले घी में शुद्धता की पहचान कर पाना मुश्किल है, और ज्यादातर घी में मिलावटी पदार्थ को मिलाकर बेचा जाता है।
साथ ही, बाजार में क्रीम से देसी घी निकालने का चलन बहुत बढ़ गया है। लोगों के बीच धारणा है कि डिब्बांबद मिलावटी घी खाने से कई बेहतर है क्रीम से निकला घी खाना, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रीम से निकला घी शरीर को सिर्फ बीमारी और वसा ही देता है। \
चरक संहिता में कहा गया है, “सर्वस्नेहेषु श्रेष्ठं घृतम्, जिसका अर्थ है कि सभी वसायुक्त पदार्थों में घी सर्वोत्तम है। आयुर्वेद में घी को वसा रहित माना गया है, जिसमें किसी तरह का ट्रांस फैट नहीं होता है। आयुर्वेद में घी बनाने की सही विधि भी बताई गई है, जिसका पालन सदियों से हमारे देश में होता आ रहा है, लेकिन समय की कमी और आधुनिकता ने सब कुछ बदलकर रख दिया है। पहले दूध से दही जमाया जाता है, फिर दही को मथकर माखन निकाला जाता है, और अंत में उसी माखन को पकाकर घृत तैयार किया जाता है, लेकिन आज सीधा दूध से मलाई को इकट्ठा कर घी निकाल दिया जाता है, जिसमें वसा ज्यादा और पोषक तत्व कम होते हैं।
प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को मटके में धीमी आंच पर पकाने की परंपरा रही है, जिससे घी में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पाचन में आसानी और शरीर के लिए बलवर्धक रहा है। प्राकृतिक तरीके से बनाए गए घी को बनाने से पहले दूध को दही के रूप में जमाया जाता है, जो उसके गुणों में वृद्धि करता है। दही में मौजूद प्राकृतिक जीवाणु दही को पौष्टिक और पाचन में आसान बनाते हैं, और उससे निकले मक्खन में वही सारे गुण होते हैं।
प्राकृतिक तरीके से बना घी पाचन में आसान होता है, पाचन अग्नि को भी संतुलित करता है, धातुओं को पोषण देता है, और शरीर का ओज भी बरकरार रखता है। वहीं, सीधा मलाई या क्रीम से बनाए गए घी में दही जमाने वाला चरण नहीं होता है, जिससे घी की गुणवत्ता कम होती है। सीधे क्रीम से घी निकालने पर हाथ में घी नहीं, प्योर वसा आती है। इसका सेवन करने से सिर्फ मोटापा और बीमारी ही मिलती है।
--आईएएनएस
पीएस/पीयूष
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