तुर्की के राष्ट्रपति रेचेब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मिलकर खुली आंखों से इस्लामिक नाटो का सपना देखा। ऐसा सपना जिसमें एर्दोआन इस्लामिक वर्ल्ड के खलीफा बनते और मुनीर इस्लामिक नाटो का आर्मी चीफ है। मुनीर एर्दोआन के गाढ़े हरे रंग वाले इस्लामिक नाटो का हसीन सपना ज्यादा दिन टिका नहीं या यूं कहें कि इस सपने का रंग चढ़ा ही नहीं। ईरान, इजराइल और अमेरिका की जंग ने मुनीर और एर्दोआन के इस सपने का रंग उतार दिया। ज्यादा दिन पुरानी बात नहीं है। करीब 5-6 महीने पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता हुआ। तारीख थी 17 सितंबर 2025। इस समझौते का मुख्य क्लॉज़ यह है कि किसी एक देश पर आक्रमण को दोनों पर आक्रमण माना जाएगा। यानी युद्ध की स्थिति में दोनों देश मिलकर लड़ेंगे। यह इस्लामिक नाटो की बुनियाद थी। इस समझौते को इस्लामिक नाटो की धुरी बताया गया। मुनीर का प्लान इस इस्लामिक नाटो में तुर्की, जॉर्डन, मिस्र, कतर, लीबिया, बहरीन, यूएई और कुवैत जैसे देशों को शामिल करना था।
मुस्लिम देशों का नया खलीफा बनने के लिए बेताब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन इस्लामिक नाटो में कुछ ज्यादा ही रुचि दिखाने लगे थे। इस्लामिक नाटो वाले रंग को पक्का करने के लिए मुनीर पूरे इस्लामिक वर्ल्ड को बार-बार यह बताता रहा कि पाकिस्तान का न्यूक्लियर बम इस्लामिक वर्ल्ड की परमाणु शक्ति है। इसी महीने मुनीर एर्दोआन की बैठक होने वाली थी। बैठक में इस्लामिक नाटो के रंग में दूसरे मुस्लिम देशों को रंगने का प्लान बना था। लेकिन ईरान, इजराइल, अमेरिका की जंग ने बैठक से पहले ही इस्लामिक नाटो के सपने का रंग उतार दिया। सिर्फ इस्लामिक नाटो का रंग ही नहीं उतारा। पाकिस्तान और तुर्की भी अब संकट में आ गए हैं। इन दोनों देशों के वजूद पर खतरा नजर आने लगा है। इसकी पहली बड़ी वजह है मुनीर को ईरान की धमकी। अमेरिका और अरब में उसके सहयोगियों को अपनी मिसाइल पावर से दहला चुके ईरान ने पाकिस्तान को भी तबाह करने की धमकी दी है। इस्लामिक रिवोलशनरी गार्ड के कोर कमांडर्स ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि ईरानी मिसाइल से पाकिस्तान भी सुरक्षित नहीं है।
यानी जो मुनीर इस्लामिक नाटो का सपना देख रहा था उसे एक इस्लामिक देश ने बर्बाद करने की धमकी दी। ईरान का आरोप है कि हमले के लिए अमेरिका पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहा है। आईआरजीसी ने साफ कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करे या ईरान मिसाइल हमले की तबाही झेलने के लिए तैयार रहे। जो ईरान इज़राइल और अरब के अमीर देशों के अहम ठिकानों पर विध्वंसक हमला कर रहा है। उसने अगर पाकिस्तान पर हमला किया तो इस्लामिक नाटो का सपना देखने वाले पाकिस्तान का वजूद मिट जाएगा। ईरान ने अब तक जैसे हमले किए हैं उसी पैटर्न को देखें। तो ईरान पाकिस्तान के कराची पोर्ट को निशाना बना सकता है। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान में तेल का आयात थम जाएगा। ईरान पाकिस्तान की रिफाइनरीज को निशाना बना सकता है। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भारी आर्थिक नुकसान होगा। ऐसे हमले से पाकिस्तान की जीडीपी 15% तक गिर सकती है। यानी पहले से ही बदहाल पाकिस्तान और कंगाल हो जाएगा। अभी तो ईरान ने हमला भी शुरू नहीं किया और पाकिस्तान का शेयर बाजार करीब 10% नीचे गिर गया है। और सुनिए जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया तब ईरान कोटा में पाकिस्तान के मिलिट्री बेस को निशाना बना सकता है। इससे पाकिस्तान का मिलिट्री ढांचा तबाह हो जाएगा।
ईरान पाकिस्तान के दूसरे एयरबेस भी तबाह कर सकता है। इससे पाकिस्तान की वायु सेना जमीन पर आ जाएगी। तेहरान से कराची की दूरी करीब 10,900 कि.मी. है। ऐसे में सबसे ज्यादा तबाही कराची में होगी। ईरान के मिसाइल अटैक से कराची की रिफाइनरी, पोर्ट, पावर प्लांट और पाकिस्तानी एयरफोर्स का बेस सब कुछ तबाह हो जाएगा। भारत के लिए जितना महत्वपूर्ण शहर मुंबई है, पाकिस्तान के लिए उतना ही अहम कराची है। अगर कराची को तबाह कर दिया गया तो पाकिस्तान तबाह हो जाएगा। ग्वादर पाकिस्तान का सबसे अहम बंदरगाह है। इसे भी ईरान मिसाइल अटैक में पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।
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एक तरफ जहाँ मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपनी सबसे घातक 'डूम्सडे मिसाइल' (Doomsday Missile) का सफल परीक्षण कर दुनिया को अपनी परमाणु ताकत का अहसास कराया है। मंगलवार (3 मार्च) देर रात कैलिफ़ोर्निया के तट से दागी गई यह मिसाइल हिरोशिमा पर गिरे परमाणु बम से 20 गुना अधिक विनाशकारी हथियार ले जाने में सक्षम है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच, यूनाइटेड स्टेट्स ने अपनी न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम LGM-30G मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का टेस्ट लॉन्च किया, जिसे यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फ़ोर्स के अनुसार अक्सर "डूम्सडे मिसाइल" कहा जाता है। यह मिसाइल 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज़्यादा शक्तिशाली न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है।
इस बिना हथियार वाली मिसाइल को एयर फ़ोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने मंगलवार (3 मार्च) देर रात कैलिफ़ोर्निया के सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फ़ोर्स बेस से लोकल टाइम के हिसाब से रात करीब 11 बजे लॉन्च किया। टेस्ट मिसाइल, जिसका नाम GT-254 था, में दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल थे और यह प्रशांत महासागर के पार गई।
एयर फ़ोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने कहा कि मंगलवार का टेस्ट-लॉन्च रूटीन था और सालों पहले से तय था।
टेस्ट लॉन्च से मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल, सिस्टम कितना भरोसेमंद है, यह वेरिफाई होता है
मिसाइल को US के ज़मीन पर मौजूद न्यूक्लियर डिटरेंट के असर, तैयारी और भरोसे को वेरिफाई करने के लिए फायर किया गया था। 576वें फ़्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर, लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने कहा, "GT 255 ने हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों की परफॉर्मेंस का अंदाज़ा लगाने में मदद की।" "लगातार अलग-अलग मिशन प्रोफ़ाइल का अंदाज़ा लगाकर, हम पूरे ICBM फ़्लीट की परफॉर्मेंस को बेहतर बना पाए हैं, जिससे देश के न्यूक्लियर ट्रायड के ज़मीन पर मौजूद हिस्से के लिए तैयारी का सबसे ज़्यादा लेवल पक्का हो गया है।"
इस टेस्ट में न सिर्फ़ ICBM की परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया गया, बल्कि इसकी मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल की परफॉर्मेंस पर भी ध्यान दिया गया, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से मिसाइल की असर बढ़ाने और दुश्मन के डिफेंस को पार करने के लिए किया जाता है।
AFGSC के कमांडर जनरल एसएल डेविस ने कहा, "हमारी ICBM फ़ोर्स के सभी पहलुओं का टेस्ट करना बहुत ज़रूरी है, जिसमें कई, अलग-अलग टारगेटेड पेलोड को एकदम सटीक तरीके से डिलीवर करने की हमारी क्षमता भी शामिल है।" "यह टेस्ट वेपन सिस्टम के मुश्किल सिंक्रोनाइज़ेशन को वैलिडेट करता है, शुरुआती लॉन्च सीक्वेंस से लेकर हर रीएंट्री व्हीकल के बिना किसी गलती के डिप्लॉयमेंट तक।"
मिनटमैन III मिसाइल
LGM-30G मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यूनाइटेड स्टेट्स के न्यूक्लियर ट्रायड का एक अहम हिस्सा है, जो ज़मीन, समुद्र और हवा से न्यूक्लियर वेपन लॉन्च करने की क्षमता पक्का करता है। ये मिसाइलें पूरे अमेरिकन वेस्ट में अंडरग्राउंड साइलो में रखी गई हैं और इन्हें मुख्य रूप से एक डिटरेंट के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह गारंटी मिलती है कि अगर US पर कभी न्यूक्लियर हमला होता है तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के न्यूक्लियर वेपन टेस्ट फिर से शुरू करने की मांग के बाद नवंबर में एक मिनटमैन III मिसाइल का भी टेस्ट-लॉन्च किया गया था। यह मिसाइल 15,000 मील प्रति घंटे से ज़्यादा की स्पीड से 6,000 मील तक जा सकती है, जिससे यह कम समय में दुनिया भर के टारगेट पर हमला कर सकती है।
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