एक तरफ जहाँ मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने अपनी सबसे घातक 'डूम्सडे मिसाइल' (Doomsday Missile) का सफल परीक्षण कर दुनिया को अपनी परमाणु ताकत का अहसास कराया है। मंगलवार (3 मार्च) देर रात कैलिफ़ोर्निया के तट से दागी गई यह मिसाइल हिरोशिमा पर गिरे परमाणु बम से 20 गुना अधिक विनाशकारी हथियार ले जाने में सक्षम है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच, यूनाइटेड स्टेट्स ने अपनी न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम LGM-30G मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का टेस्ट लॉन्च किया, जिसे यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फ़ोर्स के अनुसार अक्सर "डूम्सडे मिसाइल" कहा जाता है। यह मिसाइल 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज़्यादा शक्तिशाली न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है।
इस बिना हथियार वाली मिसाइल को एयर फ़ोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने मंगलवार (3 मार्च) देर रात कैलिफ़ोर्निया के सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फ़ोर्स बेस से लोकल टाइम के हिसाब से रात करीब 11 बजे लॉन्च किया। टेस्ट मिसाइल, जिसका नाम GT-254 था, में दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल थे और यह प्रशांत महासागर के पार गई।
एयर फ़ोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने कहा कि मंगलवार का टेस्ट-लॉन्च रूटीन था और सालों पहले से तय था।
टेस्ट लॉन्च से मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल, सिस्टम कितना भरोसेमंद है, यह वेरिफाई होता है
मिसाइल को US के ज़मीन पर मौजूद न्यूक्लियर डिटरेंट के असर, तैयारी और भरोसे को वेरिफाई करने के लिए फायर किया गया था। 576वें फ़्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर, लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने कहा, "GT 255 ने हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों की परफॉर्मेंस का अंदाज़ा लगाने में मदद की।" "लगातार अलग-अलग मिशन प्रोफ़ाइल का अंदाज़ा लगाकर, हम पूरे ICBM फ़्लीट की परफॉर्मेंस को बेहतर बना पाए हैं, जिससे देश के न्यूक्लियर ट्रायड के ज़मीन पर मौजूद हिस्से के लिए तैयारी का सबसे ज़्यादा लेवल पक्का हो गया है।"
इस टेस्ट में न सिर्फ़ ICBM की परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया गया, बल्कि इसकी मल्टीपल रीएंट्री व्हीकल की परफॉर्मेंस पर भी ध्यान दिया गया, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से मिसाइल की असर बढ़ाने और दुश्मन के डिफेंस को पार करने के लिए किया जाता है।
AFGSC के कमांडर जनरल एसएल डेविस ने कहा, "हमारी ICBM फ़ोर्स के सभी पहलुओं का टेस्ट करना बहुत ज़रूरी है, जिसमें कई, अलग-अलग टारगेटेड पेलोड को एकदम सटीक तरीके से डिलीवर करने की हमारी क्षमता भी शामिल है।" "यह टेस्ट वेपन सिस्टम के मुश्किल सिंक्रोनाइज़ेशन को वैलिडेट करता है, शुरुआती लॉन्च सीक्वेंस से लेकर हर रीएंट्री व्हीकल के बिना किसी गलती के डिप्लॉयमेंट तक।"
मिनटमैन III मिसाइल
LGM-30G मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यूनाइटेड स्टेट्स के न्यूक्लियर ट्रायड का एक अहम हिस्सा है, जो ज़मीन, समुद्र और हवा से न्यूक्लियर वेपन लॉन्च करने की क्षमता पक्का करता है। ये मिसाइलें पूरे अमेरिकन वेस्ट में अंडरग्राउंड साइलो में रखी गई हैं और इन्हें मुख्य रूप से एक डिटरेंट के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह गारंटी मिलती है कि अगर US पर कभी न्यूक्लियर हमला होता है तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के न्यूक्लियर वेपन टेस्ट फिर से शुरू करने की मांग के बाद नवंबर में एक मिनटमैन III मिसाइल का भी टेस्ट-लॉन्च किया गया था। यह मिसाइल 15,000 मील प्रति घंटे से ज़्यादा की स्पीड से 6,000 मील तक जा सकती है, जिससे यह कम समय में दुनिया भर के टारगेट पर हमला कर सकती है।
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ईरान, अमेरिका, इजराइल युद्ध का आज पांचवा दिन है। दोनों तरफ 5,000 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। युद्ध के बीच अमेरिका ने हथियार प्रोडक्शन कंपनीज़ की बैठक बुलाई। दावा यह कि अमेरिका के पास हथियारों की कमी है। अगर युद्ध लंबा खींचा तो क्या होगा? ट्रंप हथियारों का प्रोडक्शन करने वाली अमेरिकी कंपनियों से मीटिंग का प्लान बना रहे हैं। ईरान से युद्ध ट्रंप को भारी पड़ने लगा है। खुद को महाशक्ति कहने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के दिल की धड़कनें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटे में ₹6,900 करोड़ स्वाहा हो गया है। ईरान पर हमले से पहले तैयारियों पर पहले ही ₹5,500 करोड़ खर्च हो चुका है। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो ₹18 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च हो सकता है। लेकिन ट्रंप पर अमेरिका के लिए पैसे की कमी या खर्च बड़ी समस्या नहीं है। परेशानी युद्ध लड़ने वाले हथियार और मिसाइलों की है। अमेरिका के हाईटेक पर घातक हथियार ही ट्रंप की ताकत है।
ईरान युद्ध में अमेरिका की यही ताकत कमजोरी बन गई है। दुनिया का दादा बनने वाले अमेरिका की हवा पानी टाइट हो गई है। अगर युद्ध लंबा खींचा तो अमेरिका को हथियारों की कमी का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के पास सिर्फ 10 दिनों तक लड़ने लायक हथियार, गोला बारूद और मिसाइल है। और जब से पेंटागन की इस सीक्रेट रिपोर्ट में हथियारों की कमी का खुलासा हुआ है, ट्रंप परेशान हो गए हैं। हथियार, गोला, बारूद और मिसाइलों के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ट्रंप ने रक्षा कंपनियों के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। यह बैठक 6 मार्च को वाइट हाउस में होगी। इस बैठक में ट्रंप हथियारों के प्रोडक्शन में कैसे तेजी लाई जाए इसको लेकर बात करेंगे। जिस तरह से ईरान अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब दे रहा है। खाली देशों में अमेरिकी बेस को टारगेट कर रहा है।
इससे ट्रंप परेशान हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का सबसे हाईटेक इंटरसेप्टर थार की 25% कमी हो गई। जहाजों पर तैनात रडारों की भी कमी हो गई है। सबसे ज्यादा असर जीपीएस गाइडेड किट पर पड़ा है। जिस तरह से ईरान अमेरिका के एंबेसी को निशाना बना रहा है। चुन चुन कर मार रहा है। कहीं हथियारों की कमी ट्रंप को भारी ना पड़ जाए।
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