यूरोप में चीन की दबाव बनाने की रणनीति से अमेरिका चिंतित
वॉशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों, विदेशी नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीन यूरोप में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन निवेश, दबाव और गुप्त रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, आपूर्ति शृंखलाओं और सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका व यूरोप के बीच घनिष्ठ समन्वय का आग्रह किया।
“यूरोप में चीन की बढ़ती घुसपैठ” पर कांग्रेस के सदस्य जेक एल्ज़ी ने कहा कि यूरोप को सिर्फ रूस पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। क्षेत्र को रूस के युद्ध के खतरे के साथ-साथ चीन की वर्चस्व हासिल करने की कोशिश से पैदा होने वाले लगातार खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है।
एल्ज़ी ने कहा कि चीन यूरोप में खुले और गुप्त दोनों तरह के कई औजारों का इस्तेमाल कर रहा है। चीन महाद्वीप को प्रभावित करने के लिए “अपनी पकड़ मजबूत करने के ठिकाने” बना रहा है।
लिथुआनिया के उप विदेश मंत्री विदमांतस वर्बिकास ने अपने देश पर चीन के दबाव बनाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2021 में लिथुआनिया ने चीन के 17 प्लस वन फॉर्मेट से खुद को अलग कर लिया था। साथ ही, विलनियस में ताइवान के प्रतिनिधि कार्यालय की स्थापना की अनुमति भी दी गई थी।
उन्होंने कहा कि इसके जवाब में चीन ने दबाव बनाना शुरू किया। वर्बिकास ने कहा, “लिथुआनिया जैसे चीन की कस्टम प्रणाली से गायब हो गया।” उन्होंने बताया कि निर्यात परमिट में देरी की गई या उन्हें खारिज कर दिया गया और बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाया गया। इसका असर पड़ा। शुरुआती महीनों में चीन को जाने वाला लिथुआनिया का निर्यात 99.7 प्रतिशत घटकर लगभग शून्य हो गया।
वर्बिकास ने कहा कि यह कोई व्यापारिक विवाद नहीं था। यह एक राजनीतिक रूप से प्रेरित दबाव था, जिसका मकसद किसी संप्रभु देश के नीति निर्णय को बदलने के लिए मजबूर करना था।
सीनेटर रूबेन गैलेगो ने तकनीक से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि 5 जी तकनीक के मामले में पश्चिम धीमी प्रतिक्रिया दे रहा था। उन्होंने कहा कि यूरोप के कई बुनियादी ढांचे अब भी चीनी कंपनियों पर निर्भर हैं ।अगला जोखिम 6 जी तकनीक में दिख सकता है।
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की नॉनरेजिडेंट फेलो ऑड्री वोंग ने कहा कि चीन का उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थकों को मजबूत करना और आलोचकों को चुप कराना है। उन्होंने कहा कि बीजिंग “फूट डालो और राज करो” की रणनीति के जरिए ट्रांसअटलांटिक सहयोग और यूरोपीय एकता को कमजोर करने की कोशिश करता है।
वोंग ने कहा कि चीन “दबाव और प्रलोभन” का इस्तेमाल करता है। उन्होंने सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का जिक्र किया। उनके अनुसार चीन “भ्रष्ट निवेश, रिश्वतखोरी और अन्य गुप्त प्रभावी तरीकों से समर्थन खरीदने” की भी कोशिश करता है। चीन कूटनीति, सरकार, व्यापार व सार्वजनिक क्षेत्रों सहित कई मंचों पर सक्रिय है और आर्थिक प्रभाव, सूचना अभियानों व प्रचार का मिश्रण इस्तेमाल करता है।
वोंग के मुताबिक यह प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर सकता है। चीन कई तरह के प्रभावी प्रयास करता है और फिर सही समय का इंतजार करता है। यह “सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि खुली और स्वतंत्र समाज व्यवस्था के कामकाज को भी प्रभावित करता है।”
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की नॉनरेजिडेंट सीनियर फेलो वाल्बोना ज़ेनेली ने कहा कि यूरोप ने चीन को लेकर अपना रुख बदला है लेकिन यूरोपीय संघ अब भी पूरी तरह एकजुट नहीं है। यूरोप की चीन नीति ईयू संस्थाओं और 27 सदस्य देशों के बीच जटिल बातचीत का परिणाम है।
ज़ेनेली ने कहा कि यूरोप में चीन की सक्रियता रणनीतिक है। इसका उद्देश्य “उन्नत तकनीक हासिल करना, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को प्रभावित करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दबदबा बनाना” है। यह सिर्फ व्यापारिक लाभ का मामला नहीं है बल्कि रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश है।
व्यापार संतुलन भी बदल गया है। चीन अब यूरोपीय संघ के आयात का पांचवें हिस्से से अधिक हिस्सा सप्लाई करता है। यूरोप को “400 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार घाटे” का सामना करना पड़ रहा है और चीनी आपूर्ति पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है।
--आईएएनएस
एलकेजे/पीयूष
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Nitish Kumar Nomination: JDU की ओर से नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन कर सकते हैं, अमित शाह रहेंगे मौजूद
बिहार के राजनीतिक गलियारे से एक खास चौंकाने वाली बात सामने आई है. सूत्रों की मानें तो आज नीतीश कुमार जेडीयू की ओर से राज्यसभा के लिए अपना नामांकन कर सकते हैं. हालांकि अभी पार्टी की ओर से अधिकारिक ऐलान का इंतजार है. आज भाजपा कोटे से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी नामांकन करेंगे. बताया जा रहा है कि इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहने वाले हैं.
बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाने की संभावना
आपको बता दें कि बुधवार शाम को सीएम आवास एक खास अहम बैठक बुलाई गई. इसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी भी उपस्थित हुए. बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम निर्णय नीतीश कुमार को लेना है. उनका दिल्ली जाना तय है. नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति से आने वाले शख्स हैं. बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकले अब तेज हो चुकी हैं. राजनीतिक गलियारों में बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाने की संभावना जारी है.
नीतीश के राज्यसभा जाने की खबर से जेडीयू में उबाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के अंदर काफी हलचल तेज हो चुकी है. इसके कारण पार्टी के तमाम विधायक और नेताओं को आपात स्थिति में पटना बुलाया गया है. नीतीश के बिहार छोड़ने की खबर से पार्टी के कार्यकर्ता भावुक हैं. बड़ी संख्या में सीएम आवास ‘एक अणे मार्ग’ पर जुटने लगे हैं. कार्यकर्ताओं में इस निर्णय को लेकर गहरे आक्रोश के साथ मायूसी देखने को मिली हैं. कार्यकर्ता नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर होते बिल्कुल नहीं देखना चाहते हैं. अब सबकी नजरें जदयू की औपचारिक बैठक पर टिकी हैं. सभी यह जानना चाहते हैं कि नीतीश कुमार का अगला कदम क्या होगा.
#WATCH | Bihar: BJP National President Nitin Nabin offers prayers at Hanuman Temple in Patna ahead of filing his nomination for Rajya Sabha elections. pic.twitter.com/AOFPTpJLFx
— ANI (@ANI) March 5, 2026
जेडीयू एमएलसी संजय सिंह ने का खास बयान
जेडीयू एमएलसी संजय सिंह का बयान भी सामने आया है. उन्होंने पार्टी के अंदर चल रही हलचल को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता यह चाहते थे कि नीतीश कुमार बिहार में रहकर ही अगुवाई करते रहें. उन्होंने कहा कि नीतीश का इतनी जल्द राज्यसभा जाने का निर्णय उनके लिए पूरी तरह से अप्रत्याशित है. इस तरह की खबरों से कार्यकर्ता भी परेशान हैं. इसके साथ उन्होंने यह तय किया कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द राजनीति में आ सकते हैं.
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