ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरज़ादेह की कथित तौर पर अमेरिकी-इजराइल हमलों में हत्या होने के दो दिन बाद, द स्पेक्टेटर इंडेक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के नव नियुक्त रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा की भी इजराइली हमलों में हत्या होने की खबर है। इससे पहले शनिवार को नासिरज़ादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर के भी हमलों में मारे जाने की खबरें आई थीं।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान के बाद शीर्ष ईरानी नेताओं की मौत हुई है। दशकों में सबसे व्यापक हवाई अभियानों में से एक बताए जा रहे इन हमलों में देश भर के सैन्य और रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया गया। खबरों के अनुसार, इन हमलों से सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के पास के इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है, जिनकी मौत की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने की है और विदेशों में भी इसकी व्यापक रूप से खबर फैली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नामक इस अभियान का उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से उत्पन्न होने वाले उन खतरों को रोकना था जिन्हें वाशिंगटन और उसके सहयोगी देश आसन्न खतरा मानते हैं। ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपने भाग्य का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और अपनी सरकार को चुनौती देने का आग्रह किया, जबकि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान का उद्देश्य ईरानियों को अपना भविष्य खुद तय करने में मदद करना था।
विशेष दूत स्टीव विटकॉफ समेत अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत इसलिए विफल हो गई क्योंकि तेहरान ने परमाणु ईंधन संवर्धन के अपने अविभाज्य अधिकार पर जोर दिया और दावा किया कि उसके पास पर्याप्त यूरेनियम है जिससे परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं - लगभग 460 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम, जो अमेरिकी सूत्रों के अनुसार संभावित रूप से 11 बमों के लिए पर्याप्त है। ईरान ने इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया और अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बावजूद अपनी परमाणु गतिविधियों को शांतिपूर्ण बताया। ईरान ने हमलों के जवाब में इजरायल, खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और पूरे क्षेत्र में नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस हिंसा ने एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा कर दी है।
ईरान के नक्शे को देखिए। चारों तरफ सीमाएं। कुल सात पड़ोसी देश इसके साथ अपनी सीमा को साझा करते हैं। इराक, तुर्की, अज़बजान, अर्मेनिया, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान। अब बात करते हैं समुद्री सीमाओं की। यह भी अलग है क्योंकि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से ईरान जुड़ा हुआ है। अब इसका आकार समझिए। करीब 16.5 लाख वर्ग किमी इसका क्षेत्रफल है और यह इतना बड़ा है कि इसमें दो फ्रांस समाज है। आबादी लगभग 8.5 से 9 करोड़ लोग और इतिहास आज का ईरान उस प्राचीन फारसी साम्राज्य का उत्तराधिकारी है जिसकी जड़े लगभग 2500 साल पहले तक जाती है। अब सोचिए इतना विशाल भूभाग, इतनी बड़ी आबादी, इतना पुराना सभ्यता ढांचा क्या ऐसे देश को सिर्फ हवा से की गई स्ट्राइक से हराया जा सकता है? इतिहास कहता है नहीं। चाहे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हो या फिर सेकंड वर्ल्ड वॉर। कोई भी जंग सिर्फ आसमान से नहीं जीती गई है।
यह निर्णायक युद्ध तब जीता गया है जब सेना जमीन पर उतरी, कब्जा किया गया और नियंत्रण बनाया गया और यहीं से ईरान, इजराइल और अमेरिका का यह टकराव पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आता है और इसकी कहानी पूरी पलट जाती है। क्योंकि जमीन पर ईरान की रणनीति बिल्कुल अलग है। और यही वजह है कि अमेरिका और इजराइल को ईरान को टक्कर देना जमीन पर मुश्किल ही नहीं नामुमकिन पड़ जाता है। अब आप इसे कुछ पॉइंटर्स के जरिए समझिए। पहला ईरान की सबसे बड़ी ताकत है उसका भूगोल। ईरान का पश्चिमी हिस्सा इराक सीमा से जुड़ा है। जहां फैले हैं विशाल जाग्रोस माउंटेन। यह पहाड़ प्राकृतिक दीवार की तरह काम करते हैं। उत्तर में कैसिपियन सागर के पास है अल्बोर्स माउंटेन। यह भी एक मजबूत रक्षात्मक घेरा बनाते हैं। दक्षिण में फारस की खाड़ी दुनिया के लगभग 20 से 30% तेल व्यापार का रास्ता यहीं से गुजरता है।
मतलब ईरान सिर्फ एक देश नहीं बल्कि ऊर्जा और भू रणनीति का केंद्र है। इसलिए उसे अक्सर मिडिल ईस्ट का किला कहा जाता है। दूसरा ईरान अकेला कभी नहीं लड़ता। अगर जंग जमीन पर उतरी तो यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं होगी। ईरान के प्रभाव वाले नेटवर्क में शामिल है। हिजबुल्लाह और हमाज़ इराक और सीरिया की शियाई मिलीिया यानी जंग बहुस्तरीय और क्षेत्रीय बन सकती है। तेल मार्ग बंद हो सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। तीसरा सैन्य संरचना संख्या बनाम तकनीक।
ईरान के पास लगभग 6 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक हैं और सबसे प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं आईआरजीसी यानी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स। यह कोई पारंपरिक सेना नहीं है बल्कि यह असमित और लंबी जंग की मशीन है। दूसरी ओर इजराइल के पास लगभग 1.7 लाख सक्रिय सैनिक हैं और 4 लाख रिजर्व है। संख्या में ईरान आगे है। तकनीक में इजराइल को बढ़त है। वायु शक्ति की बात करें तो अंतर यहां पर साफ है। इजराइल के पास में F35 स्टेल्स जेट्स हैं। आयरन डोम है, डेविड स्लिंग है, एरो जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। ईरान की वायु सेना पुरानी मानी जाती है। लेकिन उसने अपनी रणनीति बदली है।
Iran-Israel War: टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होने के बाद वेस्टइंडीज टीम को घर लौट जाना था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ अभी भी भारत में ही रुके हुए हैं। इस बीच टीम के हेड कोच डैरेन सैमी का 4 शब्दों का का पोस्ट 'मैं बस घर जाना चाहता हूं'- सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
यह सिर्फ एक थके हुए कोच की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि उस बेचैनी का इजहार था जो टीम इस वक्त झेल रही। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस प्रतिबंधों की वजह से टीम की वापसी में देरी हुई। बोर्ड ने यह भी साफ किया कि सभी खिलाड़ी, कोच और अधिकारी सुरक्षित हैं और भारत में उनके ठहरने का इंतजाम किया गया है।
वेस्टइंडीज टीम भारत में फंसी दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण वेस्ट एशिया और गल्फ के हवाई गलियारों में कई रूट्स पर पाबंदियां लगी हैं। कुछ एयरस्पेस बंद हैं, तो कुछ पर सख्त नियंत्रण है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदलने पड़े हैं। कई फ्लाइट्स रद्द, डायवर्ट या लेट हो गई हैं। वेस्टइंडीज टीम भी इसी वजह से तय समय पर उड़ान नहीं भर सकी।
भारत से हारकर वेस्टइंडीज बाहर टी20 वर्ल्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद यह स्थिति टीम के लिए और भारी पड़ रही है। खिलाड़ी पहले ही टूर्नामेंट से बाहर होने का झटका झेल चुके हैं। अब घर लौटने में अनिश्चितता ने मानसिक थकान और बढ़ा दी है। लंबा टूर्नामेंट, हार का दर्द और फिर सफर में अटक जाना—यह सब किसी भी टीम के लिए मुश्किल होता है।
सैमी आमतौर पर शांत और संतुलित बयान देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनका सीधा और भावनात्मक पोस्ट और भी असरदार लग रहा है। इसमें कोई आरोप नहीं, कोई शिकायत नहीं, बस घर जाने की इच्छा। यही सादगी इसे लोगों से जोड़ रही है।
CWI ने कहा है कि सुरक्षित यात्रा उनकी प्राथमिकता है। बोर्ड आईसीसी और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और जल्द नई यात्रा योजना बनाने पर काम कर रहा है। जब तक नई व्यवस्था नहीं होती, टीम भारत में ही रुकी रहेगी।
जानकारी के मुताबिक, जिम्बाब्वे टीम भी इसी तरह की उड़ान बाधा से प्रभावित हुई है। इससे साफ है कि यह किसी एक टीम की लॉजिस्टिक समस्या नहीं, बल्कि व्यापक एविएशन संकट है।
क्रिकेट से बड़ी यह वैश्विक स्थिति फिलहाल खिलाड़ियों को मैदान से दूर रखे हुए है। सैमी का पोस्ट इस पूरे हालात का सबसे सटीक सार है कि टीम तैयार है लेकिन हालात ने उसे रोक रखा है।