इजरायली सेना ने ईरान में किए गए अपने हवाई हमलों का नया वीडियो जारी किया है। सेना के अनुसार इन हमलों में ईरान के एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और एक वायु रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया। बताया गया कि कुम शहर में मौजूद यह मिसाइल लॉन्चर इजरायल पर हमला करने की तैयारी में था, जिसे समय रहते नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा इस्फहान इलाके में स्थित एक वायु रक्षा प्रणाली को भी हवाई हमले में तबाह कर दिया गया। इजरायली सेना का दावा है कि इन हमलों से ईरान की संभावित मिसाइल कार्रवाई को पहले ही रोक दिया गया।
हम आपको यह भी बता दें कि आज युद्ध के छठे दिन ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में जोरदार धमाकों की खबर सामने आई। बताया गया कि ये विस्फोट बंदर ए बहोनार इलाके के पास हुए, जहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के पहले नौसैनिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण ठिकाना मौजूद है। यह इलाका होरमुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब माना जाता है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है। इसके साथ ही ईरान के कई हिस्सों में हमलों की नई लहर शुरू हो गयी है। राजधानी तेहरान के पूर्वी हिस्सों में भी जोरदार धमाके सुने गए और उनकी कंपन शहर के कई इलाकों तक महसूस की गई, हालांकि तुरंत यह साफ नहीं हो सका कि हमलों का निशाना कौन से ठिकाने बने। इसी दौरान ईरान के कुर्द बहुल शहर सनंदज, सक्केज और बुकार में भी रात भर हमलों की खबरें आईं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि पिछले शनिवार से अब तक देश के डेढ़ सौ से अधिक शहर किसी न किसी हमले का शिकार हो चुके हैं।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया कि उसने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ जवाबी हमलों की 19वीं लहर शुरू कर दी है। ईरान ने आज एक बार फिर इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद तेल अवीव समेत कई इलाकों में हवाई हमले के सायरन बज उठे। हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “नियंत्रण से बाहर” बताते हुए कहा कि ईरान को पहले हमला करने से रोकने के लिए ही यह कार्रवाई की गई। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि जारी सैन्य अभियान में ईरान के बीस से अधिक युद्धपोत नष्ट कर दिए गए हैं, जिनमें उसका एक प्रमुख पनडुब्बी पोत भी शामिल है। वहीं ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार पिछले सप्ताह शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान ने युद्ध से बचने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी और इजरायली सैन्य आक्रमण के बाद देश को अपनी रक्षा के लिए मजबूर होकर जवाब देना पड़ा।
दूसरी ओर, अब पूरा पश्चिम एशिया इस समय भयानक युद्ध की आग में धधक रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े इस टकराव ने पूरे क्षेत्र को युद्धभूमि में बदल दिया है। आसमान से मिसाइलें बरस रही हैं, ड्रोन हमले हो रहे हैं और लड़ाकू विमान लगातार बम गिरा रहे हैं। हालात इतने विस्फोटक हो चुके हैं कि दुनिया भर में आशंका जताई जा रही है कि यदि यह युद्ध और फैलता है तो इसके दूरगामी असर पूरी दुनिया को झकझोर सकते हैं।
हम आपको यह भी बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने दावा किया है कि इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कई मिसाइल भंडार नष्ट कर दिए गए हैं और वायु रक्षा प्रणाली को भी कमजोर किया गया है। इस पूरे अभियान में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, युद्धपोत और हजारों सैनिक शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि ईरान भी जोरदार तरीके से पलटवार कर रहा है।
वैसे इस संघर्ष की सबसे भयावह कीमत आम नागरिक चुका रहे हैं। हमलों के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। कई शहरों में इमारतें मलबे में बदल गई हैं। कुछ हमलों में स्कूलों और आवासीय इलाकों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिससे दुनिया भर में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है। संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा है। लेबनान में भी हमले तेज हो गए हैं जहां इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे युद्ध का दायरा और फैलने की आशंका बढ़ गई है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है।
राजनीतिक स्तर पर भी हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। अमेरिका में इस युद्ध को लेकर तीखी बहस चल रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को विनाश की ओर ले जा सकता है, जबकि अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह अभियान जरूरी है और तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर नहीं कर दिया जाता। अमेरिकी नेतृत्व ने खुले तौर पर कहा है कि सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं होगी और अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं ईरान ने भी साफ चेतावनी दी है कि वह इस युद्ध में पीछे हटने वाला नहीं है और अपने दुश्मनों को हर मोर्चे पर जवाब देगा।
इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ गया है और तेल बाजार में हलचल शुरू हो गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से निकालने की तैयारी शुरू कर दी है और हवाई मार्गों में भी व्यवधान पैदा हुआ है।
उधर, दुनिया भर के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार युद्धविराम की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कूटनीतिक समाधान की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही। अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य अभियान को जारी रखने के मूड में हैं, जबकि ईरान भी पूरी ताकत से जवाब देने की तैयारी में है। ऐसे में पश्चिम एशिया का यह युद्ध धीरे-धीरे वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। मिसाइलों और बमों की इस भीषण जंग ने पूरी दुनिया को बेचैन कर दिया है। यदि जल्द कोई रास्ता नहीं निकला तो यह संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय टकराव नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और स्थिरता को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने संयम बरतने और राजनयिक बातचीत करने का आग्रह किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के अनुसार, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने खाड़ी क्षेत्र के राजनीतिक नेताओं से फोन पर बातचीत की। एक्स पर एक पोस्ट में लिन जियान ने कहा कि वांग ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से बात की। उन्होंने कहा कि चीन यूएई की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए उसकी वैध मांगों का समर्थन करता है और क्षेत्रीय देशों द्वारा राजनयिक माध्यमों से विवादों को सुलझाने के प्रयासों का समर्थन करता है।
लिन ने एक्स पर कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। युद्ध का प्रकोप किसी भी पक्ष के हित में नहीं है, और इससे केवल क्षेत्र के लोगों को ही नुकसान होगा। चीन यूएई की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए उसकी वैध मांगों का समर्थन करता है और क्षेत्रीय देशों द्वारा राजनयिक माध्यमों से विवादों को सुलझाने के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने आगे कहा कि चीन शांति की उम्मीद नहीं छोड़ेगा और रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।
एक अलग पोस्ट में लिन ने बताया कि वांग ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन सऊदी अरब के संयम और शांतिपूर्ण तरीकों से मतभेदों को सुलझाने की प्रतिबद्धता की सराहना करता है। लिन ने एक्स चैनल पर कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से फोन पर बातचीत की। मध्य पूर्व में फैल रहा और बढ़ता संघर्ष, जो सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को प्रभावित कर रहा है, चीन नहीं देखना चाहता। चीन सऊदी अरब के संयम और शांतिपूर्ण तरीकों से मतभेदों को सुलझाने की उसकी प्रतिबद्धता की सराहना करता है।
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