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स्पेन के पीएम ने ईरान पर हमले को बताया 'अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन'

मैड्रिड, 2 मार्च (आईएएनएस)। स्पेन के पीएम पेड्रो सांचेज ने ईरान पर हुए एयर स्ट्राइक की निंदा की है। अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।

बर्सिलोना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि हम कठिन दौर में हैं; दुनिया अस्थिरता, असुरक्षा और युद्ध की ओर बढ़ रही है। ऐसे मुश्किल समय में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा, शनिवार को भी ऐसा ही हुआ, अमेरिका और ईरान ने इजरायल पर मिलकर हमला कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विश्वास में लिए बिना स्ट्राइक की गई। कोई भी नफरत फैलाने वाली सरकार का विरोध कर सकता है, लेकिन साथ ही, गलत और खतरनाक सैन्य दखल की भी निंदा की जानी चाहिए। मैं एक बार फिर तुरंत तनाव कम करने, इंटरनेशनल कानून का सम्मान करने, और फिर से वार्ता शुरू करने की आवश्यकता महसूस करता हूं और इन देशों से अपील भी करता हूं।

उन्होंने दृढ़ता से कहा कि स्पेन वहां (जहां ज्यादती होगी) होगा, और यूरोप को वहां होना चाहिए।

स्पेन के पीएम ने दावा किया कि हम इंसानियत के लिए एक ऐसे बदलाव की दहलीज पर खड़े हैं जो पहले कभी नहीं हुआ। यह हमें ही तय करना है कि बदलाव बेहतरी के लिए हो और विकास का मार्ग प्रशस्त हो। स्पेन पर भरोसा करें कि वह इसी रास्ते पर चलता रहेगा।

बता दें, 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के तीसरे दिन भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के शीर्ष नेशनल सिक्योरिटी अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने का प्रयास किया है।

ईरान ने सोमवार को भी इजरायल के अलावा कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में हमले फिर शुरू कर दिए। संघर्ष में अब लेबनान का चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया है। दूसरी ओर इजरायल-यूएस की ओर से भी कार्रवाई जारी है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत का एपीआई मार्केट वित्त वर्ष 28 में 5-7 प्रतिशत बढ़ सकता है : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। भारत का एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआई) मार्केट मौजूदा समय में 15-16 अरब डॉलर का है और वित्त वर्ष 27 एवं वित्त वर्ष 28 में इसके 5-7 प्रतिशत के सीएजीआर (कंपाउडेड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ने की उम्मीद है। यह जानकारी सोमवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि अनुकूल सरकारी नीतियों, उच्च क्षमता वाले और जटिल एपीआई की ओर संरचनात्मक बदलाव, बढ़ती घरेलू मांग और विनियमित तथा उभरते बाजारों में गहरी पैठ के कारण होगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय फार्मा कंपनियां कीमतों में गिरावट को रोकने, लाभ मार्जिन बढ़ाने और ग्राहकों को बनाए रखने के लिए बेसिक एपीआई से कॉम्प्लेक्स एपीआई की ओर रुख कर रही हैं।

रिपोर्ट में प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों के लिए चीन पर लगातार आयात निर्भरता पर चिंता जताई गई है, लेकिन साथ ही यह उम्मीद जताई है कि सरकारी पहलों और उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन योजना (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) समर्थित बल्क ड्रग पार्कों में प्रगति दिखनी शुरू हो गई है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा, हालांकि इन उपायों का पूरा प्रभाव दिखने में समय लगेगा, लेकिन प्रगति स्पष्ट है: 30 से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कई कंपनियों ने इस योजना के तहत नई क्षमताएं शुरू की हैं।

इस बीच, उच्च क्षमता वाले और जटिल एपीआई की एक पाइपलाइन को विकसित किया जा रहा है, जिसके आने वाले वर्षों में व्यावसायीकरण की उम्मीद है, जो भारत के मूल्य श्रृंखला में धीरे-धीरे ऊपर उठने का संकेत देता है।

इस बदलाव से सार्थक वृद्धि 2-4 वर्षों के बाद ही मिलने की उम्मीद है, क्योंकि संबंधित अधिकांश परियोजनाएं अभी तक व्यावसायीकरण और पर्याप्त उत्पादन वृद्धि के चरण तक नहीं पहुंची हैं।

केयरएज रेटिंग्स के सहायक निदेशक प्रितेश राठी ने कहा, दीर्घकाल में, वृद्धि का मुख्य कारण अधिक उम्र वाले लोगों की बढ़ती आबादी, स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच, बीमा कवरेज में वृद्धि, पुरानी बीमारियों में वृद्धि, एकाधिकार का खत्म होना और अन्य उभरते बाजारों में विस्तार होना है।

सरकार समर्थित बल्क ड्रग पार्क एपीआई निवेश के अगले चरण को आकार देने के लिए तैयार हैं, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत चल रही परियोजनाएं इसी पहल से जुड़ी हैं। प्रमुख विकास परियोजनाओं में आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में 20 से 40 अरब रुपए की लागत से स्थापित बड़े पैमाने की सुविधाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू एपीआई उत्पादन को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और पूरे क्षेत्र में लागत दक्षता को बढ़ावा देना है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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