Diplomatic Reset: भारत-कनाडा विवाद खत्म? पीएम कार्नी की यात्रा से पहले बड़ा बयान, कहा- 'अपराधों में भारत का हाथ नहीं'
India-Canada Relations: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है। कनाडा की सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब कनाडा में होने वाली हिंसक घटनाओं और अपराधों के तार भारत से नहीं जुड़े हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले आया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कनाडा के रुख में आया बड़ा बदलाव
कनाडा के संघीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि वे अब आश्वस्त हैं कि भारत की संलिप्तता वाली हिंसक गतिविधियां अब कनाडा में नहीं हो रही हैं। टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के बीच सक्रिय और मजबूत संवाद चल रहा है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहतीं, तो प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा का कोई औचित्य नहीं होता। यह बयान उस समय आया है जब कार्नी मुंबई और नई दिल्ली के नौ दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
Toronto Star reports, "The federal government now believes India is no longer linked to violent crimes in Canada, a senior official said Wednesday, during a briefing ahead of Prime Minister Mark Carney’s highly anticipated trip to that country."
— ANI (@ANI) February 26, 2026
"The statement came during a… pic.twitter.com/HX3IpcsunL
निज्जर हत्याकांड के बाद बिगड़े थे रिश्ते
जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंटों पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे नई दिल्ली ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस विवाद के कारण दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और संबंधों में एक लंबा गतिरोध पैदा हो गया था। हालांकि, अब कनाडा की नई सरकार आर्थिक संबंधों को गहरा करने और 'व्यावहारिक' विदेश नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
NSA स्तर की बातचीत ने बदली तस्वीर
रिश्तों में आए इस सकारात्मक सुधार के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की भूमिका अहम मानी जा रही है। हाल ही में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने ओटावा का दौरा किया था, जहां उनकी कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रौइन और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री के साथ विस्तृत चर्चा हुई। ओटावा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बताया कि दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें नशीले पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हिंसक उग्रवाद, साइबर अपराध और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की सहमति बनी है।
कनाडाई सिख समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया
एक ओर जहां सरकारें रिश्ते सुधारने में जुटी हैं, वहीं कनाडा के सिख कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने इस नए आकलन की आलोचना की है। कुछ धार्मिक नेताओं का दावा है कि उन्हें अभी भी जान का खतरा है। वहीं, 'सिख फॉर जस्टिस' जैसे समूहों ने पार्लियामेंट हिल पर प्रदर्शन कर भारत के साथ फिर से जुड़ने के सरकारी फैसले का विरोध किया है। इसके बावजूद, ओटावा का मानना है कि व्यापारिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना समय की मांग है, खासकर तब जब कनाडा अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।
दुनिया की सबसे बड़ी Economy पर IMF का अलर्ट! ग्रोथ के बावजूद कर्ज और संरक्षणवाद से जोखिम बरकरार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अपना ताजा आकलन पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में न केवल विकास की गति तेज होगी, बल्कि बेरोजगारी दर में भी गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि, आईएमएफ ने बढ़ते सरकारी कर्ज और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों को लेकर कड़ी चेतावनी भी जारी की है।
आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी अर्थव्यवस्था का समग्र आकलन पेश किया है। 191 देशों के संगठन का विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बारे में आकलन मोटे तौर पर सकारात्मक है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) यानी वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल उत्पादन 2026 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत बढ़ सकता है। यह वृद्धि 2025 में दर्ज 2.2 प्रतिशत की दर से अधिक होगी।
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आईएमएफ का अनुमान है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर 2025 के अंत में 4.5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 4.1 प्रतिशत रह जाएगी। वहीं, महंगाई दर 2027 तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य तक आ सकती है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि फेडरल रिजर्व रेपो दर को मौजूदा 3.6 प्रतिशत से दर को घटाकर लगभग 3.4 प्रतिशत तक ला सकता है। इसने 2025 में नीतिगत ब्याज दर में तीन बार कटौती की थी।
उन्होंने हालांकि आगाह किया कि अमेरिकी रोजगार बाजार में ‘‘ अत्यधिक गिरावट’’ आने की स्थिति को छोड़कर, सरकार को और अधिक कटौती करने से बचना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को मजबूत उत्पादकता वृद्धि का लाभ मिला है। जॉर्जीवा ने कहा कि यदि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क नहीं होते, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था।
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आईएमएफ ने चेताया कि संरक्षणवादी व्यापार नीतियां अपेक्षा से अधिक आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। आईएमएफ ने संघीय सरकार के बढ़ते कर्ज पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का सार्वजनिक कर्ज जीडीपी के अनुपात में पिछले वर्ष के लगभग 100 प्रतिशत से बढ़कर 2031 तक करीब 110 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
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