Holi 2026: होली पर दिखेंगे सबसे स्टाइलिश, अपनाएं बॉलीवुड डीवाज के ये पॉपुलर लुक्स
Holi 2026: होली का त्योहार रंगों, मस्ती और खुशियों का प्रतीक है. इस दिन हर कोई चाहता है कि वह स्टाइलिश दिखे और पूरे दिन आराम से होली खेल सके. अगर आप भी इस बार होली पर कुछ अलग और ट्रेंडी ट्राई करना चाहती हैं, तो बॉलीवुड सेलेब्रिटीज के होली लुक्स से इंस्पिरेशन ले सकते हैं. आइए जानते हैं कुछ ऐसे सेलेब-इंस्पायरड आउटफिट आइडियाज, जो आपको देंगे परफेक्ट फेस्टिव वाइब्स.
कब है होली 2026?
साल 2026 में होली का पर्व 4 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाने वाला है. इस दिन लोग रंगों वाली होली खेलेंगे वहीं होलिका दहन 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा.
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क्लासिक व्हाइट लुक
सबसे पहले बात करते हैं क्लासिक व्हाइट लुक की. होली पर सफेद रंग के कपड़े पहनना एक रिवाज जैसा हो गया है. आप करिशमा कपूर की तरह सिंपल व्हाइट कुर्ता और पलाजो सेट पहन सकती हैं. हल्के कॉटन या चिकनकारी फैब्रिक वाला सूट खरीदे ताकि रंग लगने के बाद भी कपड़े से रंग आसानी से साफ हो सके. इसके साथ ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी पहन सकते हैं.
मॉडर्न विद ट्रेडिशनल मिक्स
अगर आप थोड़ा बोल्ड और मॉडर्न लुक चाहती हैं, तो अंकिता लोखंडे से इंस्पिरेशन लें. उन्होंने येलो साड़ी कैरी की है, जिसके साथ स्लीवलेस ब्लाउज भी पहना है. ये लुक मॉडर्न और ट्रेडिशनल दोनों ही है.
फिल्म ये जवानी है दिवानी लुक
फिल्म ये जवानी है दिवानी का होली सीन यंगस्टर्स के बीच काफी पॉपुलर है. बलम पिचकारी गाने में रनबीर कपूर और दीपिका पादुकोण का कैजुअल और ट्रेंडी लुक होली के लिए परफेक्ट है. दीपिका का ऑरेंज टॉप और व्हाइट शॉर्ट्स के साथ खुले बालों वाला लुक आज भी लड़कियों के लिए इंस्पिरेशन है.
राम लीला फिल्म का देसी लुक
फिल्म राम-लीला में होली जैसे रंगों से सजा 'लहू मुंह लग गया' गाना भी काफी चर्चित है. इसमें रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के रॉयल और ट्रेडिशनल लुक्स काफी पसंद किए गए थे. ये आउटफिट गहरे रंगों और एथनिक लुक के साथ बेस्ट है. जो लड़कियां घाघरा पहनना चाहती है, वे दीपिका पादुकोण जैसे लुक ट्राई कर सकती हैं.
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंटेंट क्रिएटर्स के साथ निष्पक्ष रूप से रेवेन्यू साझा करें: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कंटेंट बनाने वालों के साथ राजस्व (कमाई) का निष्पक्ष बंटवारा करना चाहिए। इसमें पत्रकार, पारंपरिक मीडिया संस्थान, इन्फ्लुएंसर, प्रोफेसर और शोधकर्ता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग कंटेंट बना रहे हैं, चाहे वे समाचार पेशेवर हों, दूर-दराज के इलाकों में बैठे क्रिएटर्स हों या अपने शोध साझा करने वाले अकादमिक विशेषज्ञ, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली कमाई में उचित हिस्सेदारी के हकदार हैं।
उनके अनुसार, अब पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में निष्पक्ष राजस्व साझेदारी का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कंटेंट बनाने वाले लोगों के साथ निष्पक्ष तरीके से राजस्व साझा करना चाहिए, चाहे वे न्यूज पर्सन हों, पारंपरिक मीडिया, दूर-दराज के क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर, प्रोफेसर या शोधकर्ता हों जो प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपने काम का प्रसार कर रहे हैं।
उन्होंने जोर दिया कि प्लेटफॉर्म को व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा अपलोड किए गए कंटेंट से बड़ा लाभ मिलता है, इसलिए क्रिएटर्स को भी उनका उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने से भारत की डिजिटल कंटेंट अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्त कर रही है।
एक अलग कदम के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने पिछले साल आईटी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से तैयार भ्रामक सामग्री (मिसलीडिंग कंटेंट) के बढ़ते खतरे से निपटना है।
मसौदा नियमों के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कृत्रिम रूप से तैयार कंटेंट (सिंथेटिक कंटेंट) को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा और उसमें स्थायी मेटाडेटा या पहचान चिह्न जोड़ना होगा।
भारत में 50 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थ (एसएसएमआई), जैसे फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट, को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई से तैयार कंटेंट को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, वीडियो या तस्वीर के मामले में पहचान चिह्न कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य भाग में दिखना चाहिए, जबकि ऑडियो कंटेंट के मामले में अवधि के पहले 10 प्रतिशत हिस्से में इसे दर्शाना होगा।
मेटाडेटा को बदला, हटाया या दबाया नहीं जा सकेगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म जानबूझकर बिना लेबल या गलत तरीके से घोषित एआई-जनित कंटेंट की अनुमति देता है, तो इसे आईटी एक्ट के तहत उचित सावधानी न बरतने के रूप में माना जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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