स्टेज पर पहुंचा प्रेमी और दुल्हन को मार दी गोली, बक्सर में दिल दहला देने वाली वारदात
बिहार के बक्सर जिले में एक शादी समारोह उस समय भयावह घटना में बदल गया, जब जयमाल के मंच पर दुल्हन को गोली मार दी गई. मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चौसा नगर पंचायत स्थित मल्लाह टोली का है, जहां खुशियों के बीच अचानक गोलियों की आवाज से अफरा-तफरी मच गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जयमाल की रस्म चल रही थी और दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर मौजूद थे. इसी दौरान एक युवक अचानक मंच पर चढ़ गया और दुल्हन पर फायरिंग कर दी. गोली लगते ही दुल्हन मंच पर ही गिर पड़ी, जिससे मौके पर भगदड़ मच गई.
उत्तर प्रदेश से आई थी बारात
जानकारी के मुताबिक, बारात उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुलेमनपुर गांव से चौसा पहुंची थी. समारोह में बड़ी संख्या में रिश्तेदार और ग्रामीण मौजूद थे. जयमाल कार्यक्रम के दौरान अचानक हुई इस वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.
घायल दुल्हन की पहचान 18 वर्षीय आरती कुमारी के रूप में हुई है. घटना के तुरंत बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया. बताया जा रहा है कि आरोपी दुल्हन का पड़ोसी है और मामला कथित प्रेम-प्रसंग से जुड़ा हो सकता है. हालांकि, पुलिस ने अभी आधिकारिक रूप से इस संबंध में पुष्टि नहीं की है.
गंभीर हालत में वाराणसी रेफर
परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से घायल दुल्हन को तुरंत बक्सर के सदर अस्पताल ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया.
डॉक्टरों के अनुसार, गोली शरीर के संवेदनशील हिस्से में लगी है, जिससे स्थिति नाजुक बनी हुई है. परिवार के लोग अस्पताल में मौजूद हैं और दुल्हन के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता में हैं.
पुलिस की छापेमारी जारी
घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा. अधिकारियों ने यह भी कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है, ताकि घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके.
इस घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया, बल्कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की कार्रवाई और दुल्हन की सेहत पर अब सबकी नजरें टिकी हैं.
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ब्लैक होल्स : ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य, जिससे प्रकाश भी नहीं बच पाता
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों में ब्लैक होल सबसे ऊपर आते हैं। अपने नाम के विपरीत, ये कोई छेद नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह हैं जहां बहुत कम स्पेस में इतना अधिक द्रव्यमान समाया होता है कि उसका गुरुत्वाकर्षण अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली हो जाता है। यह इतना प्रबल होता है कि प्रकाश भी यहां से बाहर नहीं निकल पाता।
इस वजह से ब्लैक होल खुद काले दिखते हैं, क्योंकि वे रोशनी को परावर्तित नहीं करते। ब्लैक होल के चारों ओर गैस और धूल का घूमता हुआ छल्ला होता है, जिसे एक्रीशन डिस्क कहते हैं। यह डिस्क इतनी गर्म हो जाती है कि एक्स-रे और अन्य रोशनी निकालती है, जिससे वैज्ञानिक ब्लैक होल के बारे में जानकारी जुटा पाते हैं।
ब्लैक होल अपनी प्रचंड गुरुत्वाकर्षण शक्ति से दूर से आने वाले प्रकाश तक को मोड़ देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कोई कांच का लेंस रोशनी को मोड़ता है। इस प्रभाव के कारण ब्लैक होल के पीछे स्थित वस्तुओं की छवि बड़ी, विकृत या एक से अधिक बार दिखाई देने लगती है। वैज्ञानिक इसी प्रभाव का उपयोग उन छिपे हुए ब्लैक होल का पता लगाने के लिए करते हैं जो स्वयं अदृश्य होते हैं। साइंस की भाषा में इसे ग्रेविटेशनल लेंसिंग कहा जाता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ब्लैक होल्स के बारे में जानकारी देती है। नासा के अनुसार, ब्लैक होल्स के ठीक बीच में एक बिंदु होता है जहां सब कुछ घनत्व में बदल जाता है, जिसे इवेंट होराइजन कहते हैं। यह एक अदृश्य लाइन है इसके पार जाने वाला कुछ भी वापस नहीं आ सकता, यहां तक कि रोशनी भी नहीं। हमारे मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में भी एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जिसका नाम सैजिटेरियस ए स्टार है। यह सूर्य से 40 लाख गुना भारी है।
रोचक बात है अगर कोई चीज ब्लैक होल के बहुत करीब पहुंच जाए, तो गुरुत्वाकर्षण की वजह से वह लंबाई में खिंचकर और सिकुड़कर नूडल जैसी हो जाती है। इसे स्पेगेटीफिकेशन कहते हैं। सबसे बड़ा ज्ञात ब्लैक होल टीओएन 618 है, जो सूर्य से 660 अरब गुना भारी है। सबसे छोटा पता चला ब्लैक होल सूर्य से सिर्फ 3.8 गुना भारी है। सभी ब्लैक होल घूमते हैं, कुछ इतनी तेजी से कि सेकंड में 1 हजार से ज्यादा चक्कर लगा लेते हैं।
ब्लैक होल न तो वर्महोल हैं यानी न तो दूसरे ब्रह्मांड का द्वार और न ही सब कुछ खींचने वाला वैक्यूम क्लीनर। ब्लैक होल तब बनता है, जब बड़े तारों का जीवन खत्म हो जाता है वे सुपरनोवा में फट जाते हैं। दूर से इनका प्रभाव सामान्य तारों जैसा ही होता है। ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य हैं, जिन्हें समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार कोशिश कर रहे हैं।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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