जापान की रणनीति: 2031 तक ताइवान के निकट द्वीप को बनाएगा मिसाइल बेस, चीन से तनाव बढ़ना तय
टोक्यो, 25 फरवरी (आईएएनएस)। जापानी रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका देश पांच साल के अंदर ताइवान के पास एक छोटे से द्वीप पर मिसाइलें तैनात कर देगा। इस कदम से चीन के साथ तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
जापानी न्यूज एजेंसी क्योदो ने बताया कि शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि जमीन-से-हवा में वार करने वाली मिसाइलें, जो एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम हैं, मार्च 2031 तक योनागुनी (जापान के सबसे पश्चिमी आइलैंड) पर तैनात कर दी जाएंगी।
कोइज़ुमी ने रिपोर्टर्स से कहा, यह कार्य की प्रगति पर निर्भर करता है, लेकिन हम साल 2030 के लिए योजना बना रहे हैं, और उन्होंने पहली बार तैनाती के शेड्यूल पर विस्तृत जानकारी दी।
कोइज़ुमी ने यह ऐलान जापान की प्रधानमंत्री, साने ताकाइची, के ताइवान की सिक्योरिटी को लेकर टोक्यो और बीजिंग के बीच लगभग ठप पड़े राजनियक रिश्तों के बीच किया है।
ताकाइची ने पिछले साल सांसदों से कहा था कि अगर ताइवान को लेकर संघर्ष जापान के लिए खतरा बनता है, तो ताइवान पर चीन के हमले में उनका देश अपनी रक्षा के वास्ते ठोस कदम उठाएगा।
इसके बाद चीन ने काफी सख्त रवैया अपनाया था। उन्होंने ताकाइची से अपने स्टैंड से पलटने की सिफारिश की थी। लेकिन जापानी पीएम अपनी बात पर अड़ी रहीं। इस वजह से चीन ने अपने नागरिकों से जापान न जाने की अपील की। साथ ही, जापान की कंपनियों के डुअल यूज एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी।
बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उस पर किसी भी तरह के बयान को चीन विरोधी बताता रहा है।
जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री ने 2022 में दूर के पश्चिमी द्वीपों पर सुरक्षा को मजबूत करने के प्लान की घोषणा की थी। साथ ही, उसने अपना फोकस उत्तर में रूस से खतरों से हटाकर ईस्ट चाइना सी में चीनी सैन्य गतिविधियों का मुकाबला करने पर कर दिया है।
योनागुनी, जहां पहले से ही एक एसडीएफ (जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्सेस) फैसिलिटी है, ताइवान से 100 किमी दूर है, और वहां के लोगों को डर है कि वे जल्द ही सैन्य टकराव में फंस सकते हैं।
कोइज़ुमी नवंबर में द्वीप पर गए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि मंत्रालय अगले हफ्ते योनागुनी के 1,500 लोगों को तैनाती के बारे में बताएगा। 2015 में यहां के लोगों ने 445 के मुकाबले 632 वोटों से एसडीएफ बेस बनाने के पक्ष में वोट किया था। करीब 160 लोग एक पहाड़ की चोटी पर लगी रडार साइट्स के जरिए चौबीसों घंटे चीनी नेवी की हरकतों पर नजर रखते हैं।
योनागुनी को अपने छोटे घोड़ों और हैमरहेड शार्क के लिए जाना जाता है। क्योदो न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एसडीएफ बेस 2016 में खुला था।
टोक्यो और बीजिंग सेनकाकू आइलैंड के आसपास जापानी पानी में चीनी जहाजों के बार-बार घुसने को लेकर भी उलझते रहे हैं।
योनागुनी से करीब 150 किमी दूर इस खाली द्वीप पर जापान का दखल है, लेकिन चीन भी इस पर अपना दावा करता; बीजिंग इन्हें दियाओयू के नाम से जानता है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इस्पात उद्योग के दिग्गज जतिंदर मेहरा का निधन, उद्योग जगत शोक में डूबा
नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। इस्पात उद्योग के दिग्गज जतिंदर मेहरा का बुधवार को निधन होने के साथ भारत के धातु और खनन क्षेत्र के एक युग का अंत हो गया।
छह दशकों से अधिक के अपने करियर में, मेहरा अपने तकनीकी ज्ञान, रणनीतिक सोच और महत्वाकांक्षी विचारों को सफल बड़े पैमाने की परियोजनाओं में बदलने की क्षमता के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे।
मेहरा ने एस्सार समूह में धातु एवं खनन प्रभाग के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने समूह के इस्पात और धातु व्यवसायों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शोक संदेश में, एस्सार परिवार ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें एक दूरदर्शी लीडर के रूप में याद किया, जिनकी स्पष्टता, प्रतिबद्धता और नेतृत्व ने समूह की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी ने कहा, भारत के इस्पात उद्योग के एक सम्मानित दिग्गज और ऐसे लीडर, जिनकी दूरदृष्टि ने एस्सार समूह की कुछ सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों की नींव रखी, उनके निधन से एस्सार परिवार को गहरा दुख हुआ है।
उन्होंने कहा कि एस्सार की यात्रा में उनका योगदान गहराई से समाहित है और उनकी विरासत आने वाले वर्षों में संगठन का मार्गदर्शन करती रहेगी।
एस्सार में, उन्होंने दीर्घकालिक रणनीति को आकार देने और इस्पात उत्पादन क्षमता का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें हजीरा में प्रमुख विकास परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने ओडिशा में पारादीप इस्पात संयंत्र जैसी बड़ी एकीकृत परियोजनाओं के विकास का भी नेतृत्व किया, जिससे वैश्विक इस्पात बाजार में एस्सार की उपस्थिति मजबूत हुई।
एस्सार में शामिल होने से पहले, मेहरा ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया।
उन्होंने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक और बाद में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया।
आरआईएनएल में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के चालू होने का नेतृत्व किया, जो देश के इस्पात क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर परियोजना थी।
उद्योग में उनके आजीवन योगदान को मान्यता देते हुए, भारतीय इस्पात संघ ने उन्हें 2022 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
सहकर्मी और साथी अकसर उन्हें एक मार्गदर्शक और विचारक के रूप में मानते थे, जिन्होंने मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणा के माध्यम से पेशेवरों की कई पीढ़ियों को आकार देने में मदद की।
उनके निधन से इस्पात उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि भारत अपने सबसे सम्मानित और प्रभावशाली लीडर्स में से एक को अंतिम विदाई दे रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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