सरकार को 7 महीने पहले लगी बैंक फ्रॉड की भनक:ACS ने अलर्ट किया; हरियाणा के अफसरों ने प्राइवेट बैंकों में जमा कराए ₹590 करोड़
हरियाणा के सरकारी डिपार्टमेंट के खातों में 590 करोड़ रुपए के जिस फ्रॉड को लेकर सदन तक में हंगामा हुआ, उसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सरकार को पिछले साल जुलाई में ही इस गड़बड़ी की भनक लग गई थी। इसे लेकर वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने सभी विभागों को लेटर लिखकर अलर्ट भी किया। चौंकाने वाली बात है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद 18 सरकारी विभागों के खाते चंडीगढ़ के बैंकों में खोले गए। अब सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस को इंपैनल्ड करने की हाई लेवल जांच बैठा दी है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के सूत्रों के मुताबिक कुछ अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। सवाल ये है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद कुछ IAS अफसरों ने चंडीगढ़ के बैंकों में खाते खुलवाने की दिलचस्पी क्यों दिखा रहे थे? क्या इन अफसरों को सीधे तौर पर कोई लाभ मिला? इस फ्रॉड पर चल रहे हंगामे के बीच मंगलवार को CM नायब सैनी ने विधानसभा में जानकारी दी कि IDFC फर्स्ट बैंक से बयाज समेत पूरी रकम की रिकवरी हो गई है। ACS का वो लेटर, जिसमें इंटरनल ऑडिट को कहा गया… ACS के लेटर में गड़बड़ी को लेकर क्या लिखा… अब 3 पाइंट में समझिए गड़बड़ की तीन कड़ी… स्टॉक एक्सचेंज को लिखे लेटर से खुला घोटाला IDFC बैंक ने खुद स्टॉक एक्सचेंज को फरवरी माह में पत्र लिखकर 590 करोड़ रुपए का फ्रॉड होने का खुलासा किया। इसके बाद हरियाणा सरकार के IAS अफसरों में हड़कंप मच गया। क्योंकि इस चोरी का पता हरियाणा सरकार के वित्त विभाग को साल 2025 में ही चल गया था। लेकिन चोरी पकड़ में आने के बावजूद इसकी जांच नहीं खोली गई। जिसका नतीजा है कि इतने बड़े फ्रॉड को अंजाम दिया गया है। एफआईआर दर्ज होते ही हिरासत में बैंक कर्मचारी हरियाणा का हाईप्रोफाइल मामला होने के चलते एंटी करप्शन बैंक (ACB) भी कोई चूक करने के मूड में नहीं है। पंचकूला में दर्ज एफआईआर में बैंक के अज्ञात कर्मियों का जिक्र है। पहले ही दिन ACB ने 5-6 बैंक कर्मचारियों व प्राइवेट व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। पूछताछ में वो कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें बैंक अपनी जांच में जिम्मेदार मान चुका है। बैंक कर्मियों व प्राइवेट प्लेयर से बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो वीरवार 25 फरवरी को ACB कुछ बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी भी कर सकती है। एसीबी की अब तक की जांच में सामने आया है कि प्रदेश में अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों व प्राइवेट प्लेयर की मिलीभगत से सरकारी पैसे के दुरूपयोग को बड़ा गिरोह चल रहा था। जिसमें कई IAS अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में कमेटी बनी घोटाले के मामले में गर्वनर के आदेश पर हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी की अध्यक्षता वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता करेंगे। इनके अलावा, पंचायत विभाग के डायरेक्टर अनीश यादव, पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर विनय कुमार और HPSC के डिप्टी सचिव सतीश कुमार भी शामिल हैं। कमेटी IDFC बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया और मंजूरी की जांच करेगी। कमेटी यह भी पता लगाएगी कि किन लोगों ने इन बैंकों में पैसे भेजने की अनुमति दी थी। कमेटी यह भी देखेगी कि राज्य सरकार की बैंकिंग नीति इन दोनों बैंकों के लिए सही थी या नहीं। आगे के लिए नई नीति कैसे बनानी है, इस पर भी काम होगा। साथ ही, इस मामले में कौन लोग जिम्मेदार हैं, यह भी पता लगाया जाएगा। इस पूरी जांच के लिए कमेटी को एक महीने का समय दिया गया है। ------------------ यह खबर भी पढ़ें… हरियाणा में ₹590 करोड़ घोटाले में हाई-लेवल जांच कमेटी बनी: IAS अफसर अरुण गुप्ता लीड करेंगे; सरकारी विभागों के अकाउंट से पैसों की हेराफेरी हुई हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के बैंक अकाउंट से 590 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में गर्वनर के आदेश पर हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई गई है। कमेटी की अध्यक्षता वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता करेंगे। (पूरी खबर पढ़ें)
रोहतक के प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड में खुलासा:भांजे ने मामा की मौत का बदला लिया, कार में GPS ट्रैकर लगाया, सुनसान जगह पर गोलियां मारीं
रोहतक के प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान के मर्डर में खुलासा हुआ है। उसके मर्डर की पूरी प्लानिंग उस धर्मेंद्र के भांजे प्रदीप ने रची, जिस धर्मेंद्र की 2018 में सत्यवान ने हत्या की थी। प्रदीप ने योजनाबद्ध तरीके से सत्यवान की हत्या करके शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए नहर में फेंका था। प्रदीप ने 20 फरवरी को खेड़ी साध गांव सत्यवान के घर के बाहर खड़ी ब्रेजा कार पर GPS ट्रैकर लगा दिया था, ताकि वह उसका पीछा कर सके। यह पूरी घटना गली में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। इसी दिन जब सत्यवान कार लेकर निकला तो खरावड़ गांव के पास सुनसान जगह पर प्रदीप ने अपने साथियों संग मिलकर सत्यवान की गोलियां मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को जेएलएन नहर में फेंक दिया। पुलिस ने जांच करते हुए प्रदीप के 2 साथियों को पकड़ा। उनकी निशानदेही पर 24 फरवरी को सत्यवान का शव नहर से बरामद हुआ। पुलिस फिलहाल प्रदीप की तलाश कर रही है। पहले धर्मेंद्र की हत्या का मामला जानिए…. सत्यवान की पत्नी ने छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था 31 दिसंबर 2017 की रात को खेड़ी साध गांव में सत्यवान ने धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की थी। सत्यवान की पत्नी ने धर्मेंद्र पर छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था। इसको लेकर दोनों में विवाद चल रहा था। धर्मेंद्र टैक्सी चलाता था। 31 दिसंबर को धर्मेंद्र नए साल की खुशी मनाने के लिए घूमने गया था। जब वह देर रात तक नहीं लौटा, तो उसका भाई रोहित उसे ढूंढने निकला। 31 दिसंबर 2017 को घर के बाहर गोली मारी रोहित ने धर्मेंद्र को उसके दो साथियों - हमायुंपुर निवासी दिनेश और दिल्ली के झाड़ौदा कलां निवासी प्रदीप के साथ बस अड्डे पर एक कार में बैठे हुए मिला। रोहित भी उनके साथ गाड़ी में बैठ गया और वे घर की तरफ चल पड़े। आरोप है कि जब धर्मेंद्र अपने भाई और दोस्तों के साथ सुबह करीब 3-4 बजे सत्यवान के घर के सामने पहुंचा, तो सत्यवान बाहर खड़ा था। जमानत पर बाहर आया था सत्यवान शिकायत के मुताबिक धर्मेंद्र ने सत्यवान से कहा कि उसने उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवा रखा है। इसके बाद सत्यवान घर के अंदर गया और एक पिस्तौल लेकर आया, जिससे उसने धर्मेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। धर्मेंद्र के परिवार का कहना था कि सत्यवान की पत्नी ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में सत्यवान जेल में बंद था। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत लेकर वह बाहर आया था। अब जानिए प्रदीप ने कैसे सत्यवान की हत्या की…. 7 साल से हत्या का बदला लेना चाहता था पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र का भांजा प्रदीप अपने मामा की हत्या का बदला लेना चाहता था। इसलिए वह पिछले सात सालों से सत्यवान को मारने का मौका ढूंढ रहा था। प्रदीप ने अपने साथी, भिवानी के बापोड़ा निवासी मंजीत और भाली गांव निवासी मनीष के साथ मिलकर सत्यवान की हत्या की योजना बनाई। घर के बाहर खड़ी कार पर GPS ट्रैकर लगाया प्रदीप को अपने मामा की हत्या का बदला लेने का मौका आखिरकार 20 फरवरी को मिला, जिसकी वह सात सालों से तलाश कर रहा था। योजना के मुताबिक, प्रदीप ने 20 फरवरी की रात 1 बजकर 56 मिनट पर खेड़ी साध गांव में सत्यवान के घर के बाहर खड़ी ब्रेजा कार पर GPS ट्रैकर लगा दिया और वहां से चला गया। 20 फरवरी को खरावड़ गांव के पास हत्या की 20 फरवरी की सुबह सत्यवान अपने भाई को छोड़ने खरखौदा गया। वहां से वह रोहतक की जिला कोर्ट आया और दोपहर को अपने घर लौट रहा था। GPS ट्रैकर से लोकेशन पता करते हुए प्रदीप ने मनीष और मंजीत के साथ मिलकर खरावड़ गांव के पास सत्यवान को घेर लिया। यहां उन्होंने सत्यवान को गोलियां मार दीं और उसके शव को साथ ले गए। पत्थर से शव बांधकर नहर में फेंका पुलिस के मुताबिक, शव बरामद न हो, इसलिए प्रदीप और उसके साथियों ने सत्यवान के शव को पत्थर से बांधकर जवाहर लाल नेहरू नहर में फेंक दिया। बंधा होने के कारण शव आगे जाने की बजाय वहीं नीचे चला गया और फूलकर ऊपर भी नहीं आया। 23 फरवरी की रात को 2 आरोपी गिरफ्तार IMT पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 23 फरवरी की रात को मनीष और मंजीत को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने सत्यवान की हत्या की बात कबूल कर ली। 24 फरवरी को पुलिस दोनों को जेएलएन नहर लेकर पहुंची। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने गोताखोरों को नहर में उतारा। गोताखोरों ने शव को नीचे से बाहर निकाला। आरोपियों से 5 देसी पिस्तौल व 5 रौंद मिले SP सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि सत्यवान की हत्या करने के मामले में पुलिस ने 2आरोपियों को पकड़ा है। दोनों आरोपियों से पुलिस ने 5 देसी पिस्तौल व 5 रौंद बरामद किए। आरोपियों को हथियार किसने सप्लाई किए, इसके बारे में अभी पूछताछ चल रही है।
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