रोहतक के प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड में खुलासा:भांजे ने मामा की मौत का बदला लिया, कार में GPS ट्रैकर लगाया, सुनसान जगह पर गोलियां मारीं
रोहतक के प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान के मर्डर में खुलासा हुआ है। उसके मर्डर की पूरी प्लानिंग उस धर्मेंद्र के भांजे प्रदीप ने रची, जिस धर्मेंद्र की 2018 में सत्यवान ने हत्या की थी। प्रदीप ने योजनाबद्ध तरीके से सत्यवान की हत्या करके शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए नहर में फेंका था। प्रदीप ने 20 फरवरी को खेड़ी साध गांव सत्यवान के घर के बाहर खड़ी ब्रेजा कार पर GPS ट्रैकर लगा दिया था, ताकि वह उसका पीछा कर सके। यह पूरी घटना गली में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। इसी दिन जब सत्यवान कार लेकर निकला तो खरावड़ गांव के पास सुनसान जगह पर प्रदीप ने अपने साथियों संग मिलकर सत्यवान की गोलियां मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को जेएलएन नहर में फेंक दिया। पुलिस ने जांच करते हुए प्रदीप के 2 साथियों को पकड़ा। उनकी निशानदेही पर 24 फरवरी को सत्यवान का शव नहर से बरामद हुआ। पुलिस फिलहाल प्रदीप की तलाश कर रही है। पहले धर्मेंद्र की हत्या का मामला जानिए…. सत्यवान की पत्नी ने छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था 31 दिसंबर 2017 की रात को खेड़ी साध गांव में सत्यवान ने धर्मेंद्र नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की थी। सत्यवान की पत्नी ने धर्मेंद्र पर छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था। इसको लेकर दोनों में विवाद चल रहा था। धर्मेंद्र टैक्सी चलाता था। 31 दिसंबर को धर्मेंद्र नए साल की खुशी मनाने के लिए घूमने गया था। जब वह देर रात तक नहीं लौटा, तो उसका भाई रोहित उसे ढूंढने निकला। 31 दिसंबर 2017 को घर के बाहर गोली मारी रोहित ने धर्मेंद्र को उसके दो साथियों - हमायुंपुर निवासी दिनेश और दिल्ली के झाड़ौदा कलां निवासी प्रदीप के साथ बस अड्डे पर एक कार में बैठे हुए मिला। रोहित भी उनके साथ गाड़ी में बैठ गया और वे घर की तरफ चल पड़े। आरोप है कि जब धर्मेंद्र अपने भाई और दोस्तों के साथ सुबह करीब 3-4 बजे सत्यवान के घर के सामने पहुंचा, तो सत्यवान बाहर खड़ा था। जमानत पर बाहर आया था सत्यवान शिकायत के मुताबिक धर्मेंद्र ने सत्यवान से कहा कि उसने उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवा रखा है। इसके बाद सत्यवान घर के अंदर गया और एक पिस्तौल लेकर आया, जिससे उसने धर्मेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी। धर्मेंद्र के परिवार का कहना था कि सत्यवान की पत्नी ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में सत्यवान जेल में बंद था। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत लेकर वह बाहर आया था। अब जानिए प्रदीप ने कैसे सत्यवान की हत्या की…. 7 साल से हत्या का बदला लेना चाहता था पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र का भांजा प्रदीप अपने मामा की हत्या का बदला लेना चाहता था। इसलिए वह पिछले सात सालों से सत्यवान को मारने का मौका ढूंढ रहा था। प्रदीप ने अपने साथी, भिवानी के बापोड़ा निवासी मंजीत और भाली गांव निवासी मनीष के साथ मिलकर सत्यवान की हत्या की योजना बनाई। घर के बाहर खड़ी कार पर GPS ट्रैकर लगाया प्रदीप को अपने मामा की हत्या का बदला लेने का मौका आखिरकार 20 फरवरी को मिला, जिसकी वह सात सालों से तलाश कर रहा था। योजना के मुताबिक, प्रदीप ने 20 फरवरी की रात 1 बजकर 56 मिनट पर खेड़ी साध गांव में सत्यवान के घर के बाहर खड़ी ब्रेजा कार पर GPS ट्रैकर लगा दिया और वहां से चला गया। 20 फरवरी को खरावड़ गांव के पास हत्या की 20 फरवरी की सुबह सत्यवान अपने भाई को छोड़ने खरखौदा गया। वहां से वह रोहतक की जिला कोर्ट आया और दोपहर को अपने घर लौट रहा था। GPS ट्रैकर से लोकेशन पता करते हुए प्रदीप ने मनीष और मंजीत के साथ मिलकर खरावड़ गांव के पास सत्यवान को घेर लिया। यहां उन्होंने सत्यवान को गोलियां मार दीं और उसके शव को साथ ले गए। पत्थर से शव बांधकर नहर में फेंका पुलिस के मुताबिक, शव बरामद न हो, इसलिए प्रदीप और उसके साथियों ने सत्यवान के शव को पत्थर से बांधकर जवाहर लाल नेहरू नहर में फेंक दिया। बंधा होने के कारण शव आगे जाने की बजाय वहीं नीचे चला गया और फूलकर ऊपर भी नहीं आया। 23 फरवरी की रात को 2 आरोपी गिरफ्तार IMT पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 23 फरवरी की रात को मनीष और मंजीत को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने सत्यवान की हत्या की बात कबूल कर ली। 24 फरवरी को पुलिस दोनों को जेएलएन नहर लेकर पहुंची। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने गोताखोरों को नहर में उतारा। गोताखोरों ने शव को नीचे से बाहर निकाला। आरोपियों से 5 देसी पिस्तौल व 5 रौंद मिले SP सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि सत्यवान की हत्या करने के मामले में पुलिस ने 2आरोपियों को पकड़ा है। दोनों आरोपियों से पुलिस ने 5 देसी पिस्तौल व 5 रौंद बरामद किए। आरोपियों को हथियार किसने सप्लाई किए, इसके बारे में अभी पूछताछ चल रही है।
भारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत:भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूला
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। सेना का फोकस अब केवल महंगी मिसाइलों पर नहीं, बल्कि इनके ‘मिनी मॉडल्स’ के बड़े भंडार पर है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर हमारे पास किफायती लेकिन उच्च तकनीक वाले हथियार होंगे, तो हम लंबी जंग (हाई डेंसिटी वार) में किसी भी बड़े दुश्मन को पीछे धकेलने में सक्षम होंगे। रक्षा संबंधी कमेटी की रिपोर्ट- कम लागत में देश में बनें हथियार संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस रणनीति पर सकारात्मक रुख दिखाया है। समिति ने जोर दिया है कि भीषण और लंबे युद्ध की स्थिति में भारत को ऐसे हथियारों की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर और कम लागत में देश के भीतर ही बनाए जा सकें। इसी नीति के तहत बजट में आवंटित राशि का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है ताकि युद्ध के समय विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर न रहना पड़े। जंग में टिके रहने के लिए जरूरी स्वदेशी हथियार इजरायल-हमास जंग में इजरायल को चंद हजार के रॉकेट गिराने के लिए 50 लाख की मिसाइलें खर्च करनी पड़ीं। यूक्रेन-सूडान में सस्ते ड्रोन्स ने करोड़ों के टैंकों को मलबे में बदल चौंका दिया। वहीं, म्यांमार में विद्रोहियों ने जुगाड़ से बड़े हमलों को नाकाम किया। इनसे सबक मिला कि जंग केवल बड़े हथियारों से नहीं, बल्कि सस्ते, स्वदेशी और हथियारों के बड़े भंडार से जीती जा सकती है। ये भी तैयारी: इजराइल से ‘आयरन बीम’ मिलेगा स्वदेशी ताकत के साथ भारत इजराइल से ‘आयरन बीम’ जैसी लेजर आधारित प्रणाली हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। यह तकनीक चंद रुपयों की बिजली खर्च कर रॉकेटों को हवा में जला देती है। दूसरी ओर, भारत छोटे हथियारों के हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस ने पिनाका रॉकेट सिस्टम (बेबी ब्रह्मोस का वर्जन) में गहरी रुचि दिखाई है। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत ने K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया: पनडुब्बी से 3500km की रेंज तक मार करेगी भारत ने बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ये मिसाइल 2 टन तक न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। K-सीरीज की मिसाइलों में “K” अक्षर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है। इनकी भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका रही है। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 




















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)



