पानीपत रिफाइनरी में सुरक्षा बलों पर पथराव:हड़ताल कर रहे मजदूरों लाठी-डंडे लेकर दौड़े, कईं गाड़ियां तोड़ीं, माहौल तनावपूर्ण
पानीपत रिफाइनरी में सोमवार को मजदूरों ने अर्धसैनिक बलों पर पथराव किया। मजदूर ओवरटाइम, अधिकारियों के दुर्व्यवहार समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने उनसे शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करने की बात कही। इसके बाद, मजदूर लाठी-डंडों से लैस होकर आगे बढ़ने लगे। कुछ मजदूरों ने पथराव किया और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के पास खड़ी कई गाड़ियों को पलट दिया। वहां 10 से ज़्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस भी रिफाइनरी पहुंच गई। पुलिस और सुरक्षा बल मिलकर माहौल को शांत करने की कोशिश की। रिफाइनरी में हंगामे की तस्वीरें… DSP बोले- पुलिस ने व्यवस्था संभाली DSP सिटी राजबीर ने कहा कि मजदूरों ने कुछ मांगों को लेकर आज सोमवार को हड़ताल का ऐलान किया था। हड़ताल के दौरान यहां माहौल गर्म हो गया। मौके पर पुलिस ने कानून व्यवस्था को संभाल लिया है। साथ ही मजदूरों के पदाधिकारियों से बात की गई है। उन्होंने अपनी कुछ मांगें लिखित रूप में दी हैं। अभी माहौल शांतिपूर्वक है। रिफाइनरी में काम कर रहे मजदूरों की ये मांग…..
दिल्ली हाईकोर्ट बोला- बेरोजगार पत्नी आलसी नहीं:उसके काम को नजरअंदाज करना नाइंसाफी; गृहिणी का योगदान पति को ठीक से काम करने लायक बनाता है
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बेरोजगार पत्नी को “आलसी” बताकर मेंटेनेंस से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने 16 फरवरी को दिए फैसले में कहा कि घरेलू श्रम का भी आर्थिक मूल्य है और इसे नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा। अदालत ने कहा कि घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना और कमाने वाले जीवनसाथी को सहयोग देना भी श्रम है, भले ही वह बैंक खाते में नजर न आए। केवल कमाने की क्षमता के आधार पर मेंटेनेंस से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि क्षमता और वास्तविक आय अलग अवधारणाएं हैं। मामला 2012 में हुई शादी से जुड़ा है। पत्नी का आरोप है कि 2020 में पति ने उसे और नाबालिग बेटे को छोड़ दिया। निचली अदालतों ने यह कहते हुए अंतरिम मेंटेनेंस देने से इनकार कर दिया था कि पत्नी शिक्षित और सक्षम है, लेकिन उसने नौकरी नहीं की। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में पत्नी की किसी आय का प्रमाण न मिलने पर उसे घरेलू हिंसा कानून के तहत 50 हजार रुपए अंतरिम मेंटेनेंस देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मेंटेनेंस के मामले अक्सर अत्यधिक टकरावपूर्ण हो जाते हैं, जो परिवार और बच्चों के हित में नहीं होता। कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में मध्यस्थता को अधिक रचनात्मक विकल्प बताया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)




