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History of Iran Chapter 3 | रेजा शाह पहलवी को गद्दी क्यों छोड़नी पड़ी |Teh Tak

साल 1925 में परर्शिया में पहलवी वंश का राज शुरू हुआ। इसके राजा का नाम रेजा शाह पहलवी था। रेजा शाह ने 16 सालों तक परर्शिया पर राज किया। लेकिन जब तक इन्होंने राज किया परर्शिया बदल चुका था। साल 1935 में शाह ने परशिया का नाम बदलकर ईरान कर दिया। दरअसल परशिया के लोग पहले इस इलाके को ईरान ही बुलाते थे। जबकि परर्शिया नाम बाहर के लोगों से मिला था। रेजा के बाद उनके बेटे रजा शाह पहलवी ईरान के शाह बने। बाप बेटे ने मिलकर करीब 53 साल तक ईरान पर राज किया। 1953 में ईरान में एक नए युग का दौर शुरू हुआ और इसके अगवा मोहम्मद रजा पहलवी बने। ईरान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई मोहम्मद मुसादिक सरकार का राज्य कायम था। लेकिन फिर इसका तख्तापलट हो गया। इस तख्तापलट के पीछे लंबे समय से अमेरिका और ब्रिटेन का हाथ होने की संभावना जताई जा रही थी। अब अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा सार्वजनिक किए गए कुछ अहम कागजातों से इस पूरी घटना के पीछे अमेरिका की भूमिका को स्पष्ट कर दिया है और साबित हो गया है कि इस पूरी घटना के पीछे सीआईए का हाथ था। इन्हीं कागजातों में बताया गया है कि किस तरह तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने ईरान में गुप्त ऑपरेशन की मदद से मोसेदक सरकार का तख्ता पलट कराया। 1953 से लेकर 1977 तक ईरान में शाह रेजा पहलवी ने अमेरिका की मदद से हुकूमत चलाई। 1960 के दशक में शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने वाइट रिवॉल्यूशन शुरू किया था। महिलाओं को वोट का अधिकार, बड़े जमींदारों से जमीनें लेकर गरीब किसानों को सस्ते दामों में बांटना, साक्षरता मिशन और पश्चिमीकरण। पहलवी को उम्मीद थी कि इस रिवॉल्यूशन से ईरान में एक बड़ा वर्ग पैदा होगा जो हमेशा उनका वफादार होगा। 

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रेजा शाह पहलवी को गद्दी क्यों छोड़नी पड़ी

1953 से लेकर 1977 तक ईरान में शाह रेजा पहलवी ने अमेरिका की मदद से हुकूमत चलाई। फिर आती है तारीख 14 अक्टूबर 1971 की ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने एक पार्टी पारसी एंपायर की 2500वीं वर्षगांठ मनाने के लिए रखी थी। जगह चुनी गई थी प्राचीन शहर पर्सेपोलिस, जो उस समय ईरान की ऐतिहासिक राजधानी था। शाही डिनर का आयोजन उस वीरान रेगिस्तान में हुआ जो शीराज शहर से करीन 60 किमी दूर था। वहां पानी नहीं था, कांच नहीं थी, लेकिन शाह का ख्वाब था, पर्सेपोलिस को एक बार फिर से जिंदा करना। लिहाजा 160 एकड़ में फैले रेशम के टेट्स बनाए गए, जिन्हें गोल्डन सिटी कहा गया। 37 किलोमीटर लंबा फ्रेंच सिल्क इस्तेमाल हुआ। 50,000 यूरोपीय चिड़ियों को मंगवाया गया, ताकि संगीत और यकृति का संगम हो, हालांकि वे चिड़ियों कुछ ही दिनों में गर्मी से मर गई। पार्टी के करीब 600 खास मेहमानों में प्रिंसेस ग्रेस और प्रिंस रेनियर (Monaco), ब्रिटेन की राजकुमारी ऐनी और प्रिंस फिलिप, अमेरिका के उपराष्ट्रपति स्पाइरो ऐग्न्यू और अफ्रीकी सम्राट हाइले सेलासी जैसे चेहरे मौजूद थे। सेलासी तो 72 लोगों के लाव-लश्कर के साथ पहुंचे। उनका कुत्ता भी साथ था, जिसकी गर्दन पर हीरे जड़ा पट्टा था। भले ही मौका ईरानी इतिहास का था, लेकिन खाना फ्रेंच था, ताकि यह दिखाया जा सके कि ईरान अब एक आधुनिक, परिष्कृत राष्ट्र है। 120 बेटर, 40 शेफ, और 150 टन आधुनिक रसोई के सामान फ्रांस से लाए गए। कुल 18 टन खाना, जिसमें 2700 किलो मांस, 30 किलो ईरानी कैवियार, और वर्फ के ट्रक शामिल थे। साथ ही 2,500 बोतल संपेन, 1,000 बोतल बोडों और 1,300 बोतल वर्गडी वाइन भी थी। शाही भोज 5 घंटे से ज्यादा चला, जो गिनीज बुक में दर्ज हुआ। तीन दिन के इस शाही जलसे के नाद मेहमान तो लौट गए, लेकिन अब शाह को अपने ही देश की जनता का सामना करना था। मीडिया में खबरे आई कि इस पार्टी पर उस वक्त 10 करोड़ डॉलर खर्च किए गए। यानी आज के हिसाब से करीब 50 करोड़ डॉलर। जव ईरान के गरीव और हाशिये पर जी रहे लोगों को इस खर्च की भनक लगी तो शाह के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा। 

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अखबार और दुनिया की सबसे बड़ी इस्लामिक क्रांति

अपने काल में ईरान में अमेरिकी सभ्यता को फलने फूलने तो दिया लेकिन साथ ही साथ आम लोगों पर कई तरह के अत्याचार भी किए। ऐसे में कई धार्मिक गुरु शाह के खिलाफ होली। फिर आती है 6 जनवरी 1978 की तारीख। ईरान में लोग अभी सुबह-सुबह जागे ही थे। अखबार वाला अखबार फेंक कर गया। लोगों ने इसे खोला सामने पन्ने पर जो खबर उन्हें दिखाई दी तो कुछ ने अखबार फाड़ कर फेंक दिया। तो कुछ ने वो अखबार जहां से आया था वहीं उठाकर बाहर फेंक दिया। कई तो ऐसे थे जो अगला पिछला सोचे बिना सड़क पर उतर गए। इस एक सुबह के अखबार ने दुनिया के सबसे बड़ी क्रांति में से एक छेड़ दी थी। ईरान में तख्ता पलट की नींव रख दी गई थी और साथ ही नींव एक मुस्लिम राष्ट्र की भी रख दी गई थी।  उन दिनों जो स्टोरी इसमें छपी वह कह रही थी कि अयातुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी एक ब्रिटिश एजेंट हैं। उपनिवेशवाद की सेवा कर रहे हैं। खुमैनी की ईरानी पहचान पर भी सवाल है और उन पर अनैतिक जीवन जीने का आरोप है। 12 से 18 घंटे में बवाल भयंकर बढ़ चुका था। पुलिस ने देखते ही गोली मारो का आदेश दिया। कम से कम 20 लोग मारे गए। अखबारों पर सेंसरशिप भी लगा दी गई। नवंबर 1964 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 6 महीने के बाद रिहाई के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री हसन अली मंसूर के सामने उन्हें पेश किया गया। खुमैनी से माफी मांगने को कहा। उन्होंने मना किया तो उन्हें हसन ने एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। बाद में हसन की किसी अज्ञात हमलावर ने हत्या कर दी। माना गया कि खुमैनी के समर्थक की तरफ से इसे अंजाम दिया गया। चार लोगों को सजा हुई और खुमैनी किसी अज्ञात जगह पर चले गए।

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2026 इसुजु वी-क्रॉस भारत में लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹25.50 लाख:अब सिर्फ 4x4 ऑप्शन में मिलेगी; 10.3-इंच टचस्क्रीन और 360-डिग्री कैमरा जैसे नए फीचर्स

इसुजु इंडिया ने भारतीय बाजार में अपने पॉपुलर पिक-अप ट्रक वी-क्रॉस का 2026 अपडेटेड मॉडल लॉन्च कर दिया है। नए मॉडल की सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने अब इसके 4x2 वैरिएंट को पूरी तरह बंद कर दिया है, यानी अब यह कार केवल 4x4 ऑप्शन में ही खरीदी जा सकेगी। एडवेंचर और ऑफ-रोडिंग के शौकीनों के लिए इसमें कई हाई-टेक फीचर्स जोड़े गए हैं, जो इसे पहले से ज्यादा प्रीमियम बनाते हैं।

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Abhishek Sharma फ्लॉप, टॉप ऑर्डर फेल! T20 World Cup में South Africa से हार के बाद बढ़ी Team India की मुश्किलें

रविवार रात जो हुआ उसने कई पुराने सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं। लगातार 12 टी20 विश्व कप मैच जीतने के बाद भारत की लय साउथ अफ्रीका ने जिस अंदाज में तोड़ी, उसने टीम के भीतर और बाहर दोनों जगह बेचैनी बढ़ा दी है।

अहमदाबाद में खेले गए इस मुकाबले में भारत को 76 रन से हार झेलनी पड़ी। बता दें कि इस हार के बाद टीम का नेट रन रेट -3.80 तक गिर गया है, जो सुपर आठ की दौड़ में बड़ी चिंता की बात है। अब समीकरण साफ है जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ सीधे मुकाबले जीतना ही एकमात्र रास्ता बचा है। रन रेट पर नजर रखने की गुंजाइश फिलहाल कम ही दिखती है।

गौरतलब है कि टूर्नामेंट से पहले भारत को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। पिछले 20 महीनों में टीम ने आक्रामक और संतुलित क्रिकेट खेलते हुए लगातार सफलता हासिल की थी। लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में वही टीम बिखरी हुई नजर आई।

सबसे बड़ी चिंता शीर्ष क्रम की है। अभिषेक शर्मा लगातार तीसरी बार शून्य पर आउट हुए। आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष टी20 बल्लेबाज माने जाने वाले अभिषेक के लिए यह दौर आत्मविश्वास पर भारी पड़ता दिख रहा है। रविवार को उन्होंने पहली गेंद पर चौका जरूर लगाया, लेकिन जल्द ही नियंत्रण खो बैठे। मौजूद जानकारी के अनुसार पांच मैचों में चार बार पहले ओवर में विकेट गिर चुका है, जो टीम की शुरुआत पर बड़ा असर डाल रहा है।

ओपनिंग संयोजन भी सवालों के घेरे में है। अभिषेक और इशान किशन दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और नंबर तीन पर भी बाएं हाथ के तिलक वर्मा का होना विपक्षी टीमों को रणनीतिक बढ़त दे रहा है। साउथ अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने ऑफ स्पिन से फिर शुरुआती झटका दिलाया। लगातार तीसरे मैच में पहले ओवर में ऑफ स्पिनर को विकेट मिला, जो सोचने वाली बात है।

तिलक वर्मा की स्थिति भी आसान नहीं रही। तिलक वर्मा टूर्नामेंट से ठीक पहले चोट और सर्जरी से उबरे थे। लंबे ब्रेक के बाद सीधे बड़े मंच पर उतरना आसान नहीं होता। उन्होंने शुरुआत में 25 और 30 के आसपास की पारियां खेलीं, लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरी ही गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि नंबर तीन पर लगातार शुरुआती विकेट गिरने का दबाव उन पर साफ दिख रहा है।

टीम संयोजन को लेकर भी चर्चा तेज है। अक्षर पटेल को बाहर रखकर वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया। तर्क यह था कि पावरप्ले में ऑफ स्पिन से साउथ अफ्रीका के बाएं हाथ के बल्लेबाजों को रोका जाए। लेकिन जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की शानदार गेंदबाजी के चलते वह योजना लागू ही नहीं हो पाई। बाद में डेवॉल्ड ब्रेविस और डेविड मिलर ने स्पिनरों पर दबाव बना दिया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अक्षर जैसा अनुभवी ऑलराउंडर बेहतर विकल्प साबित हो सकता था।

अब नजरें आगे के मुकाबलों पर टिक गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में होने वाला मैच निर्णायक माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि संतुलन बनाने के लिए संजू सैमसन को शामिल किया जा सकता है, ताकि दाएं हाथ का विकल्प मिले। 

टीम प्रबंधन के लिए यह समय त्वरित फैसलों का है। कोच गौतम गंभीर पहले ही दबाव में हैं। बता दें कि घरेलू टूर्नामेंट में हार का असर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस किया जाता है। ऐसे में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रखना और संयोजन में स्पष्टता लाना बेहद जरूरी है।

फिलहाल गणित सरल है। भारत को अपने अगले दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे और उम्मीद करनी होगी कि साउथ अफ्रीका अपने बाकी मैच भी जीतकर समीकरण आसान कर दे। रन रेट की जटिल गणना में उलझने के बजाय टीम को अपने खेल पर लौटना होगा। समय कम है, चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन मौका अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
Mon, 23 Feb 2026 21:14:01 +0530

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