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कसरत के बाद गाय का दूध पीने से हड्डियां होती हैं मजबूत, बढ़ती उम्र में फ्रैक्चर से बचाव संभव: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। बढ़ती उम्र के साथ एक प्रवृत्ति जो बहुत आम होती है, वो ये कि लोग कसरत को खुद से कोसों दूर कर देते हैं, खाने-पीने में लापरवाही बरतते हैं, और धीरे-धीरे कमजोर होती हड्डियों के कारण लाचार हो जाते हैं। लेकिन एक शोध उन्हें इसमें सुधार करने की हिदायत भी देता है और नसीहत भी। चीनी वैज्ञानिकों ने पाया है कि वर्कआउट के बाद दूध पीने की एक आसान आदत बाद में हड्डियों को बचाने में मदद कर सकती है।

स्टडी से पता चलता है कि कसरत के साथ दूध पीने से बुज़ुर्गों में जानलेवा फ्रैक्चर का खतरा कम हो सकता है।

ये नतीजे जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन, हेल्थ एंड एजिंग में पब्लिश हुए, जहां शोधार्थियों ने यह जांच की कि क्या एक्सरसाइज के बाद प्रोटीन लेने से बुज़ुर्गों की हड्डियों को लाभ हो सकता है।

साइंटिस्ट्स ने पाया कि प्रोटीन हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका निभाता है। यह कैल्शियम अवशोषण को बढ़ाता है। एक मिनरल है जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है और बुढ़ापे में गिरने पर फ्रैक्चर का खतरा कम कर सकता है।

गाय का दूध और सोया दूध दोनों को प्रोटीन के आसान और असरदार सोर्स के तौर पर पहचाना गया।

स्टडी में 60 साल और उससे ज्यादा के 82 स्वस्थ व्यस्कों को शामिल किया गया। सभी सहभागी ऐसी किसी भी परेशानी से नहीं जूझ रहे थे जो प्रोटीन लेने या हड्डियों के मेटाबॉलिज्म पर असर डाल सकती थीं।

उन्होंने आठ हफ्ते का लगातार व्यायाम किया, जिसमें रेजिस्टेंस और बैलेंस ट्रेनिंग के तीन हफ्ते का सत्र शामिल था।

इसमें भाग लेने वाले लोगों को चार ग्रुप में बांटा गया। इनमें से एक सिर्फ वो थे जो कसरत करते थे, और दो ग्रुप उनके भी थे जो कसरत के बाद या तो गाय का दूध पीते थे या फिर सोया मिल्क लेते थे।

गाय के दूध वाले समूह में शामिल लोगों ने वर्कआउट खत्म करने के एक घंटे बाद 240 एमएल लो-फैट दूध पिया। सोया दूध वाले ग्रुप वालों को थोड़ी कम मात्रा में दूध दिया गया ताकि यह पक्का हो सके कि दोनों समूह हर सत्र में लगभग 7 से 8 ग्राम प्रोटीन लें।

प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के बीच बैलेंस बनाए रखने के लिए, दोनों दूध वाले ग्रुप्स ने हर ट्रेनिंग सेशन के बाद 60 ग्राम उबले हुए शकरकंद भी खाए। ऐसा आठ हफ्ते के प्रोग्राम में बदस्तूर जारी रखा गया।

आठ हफ्तों के बाद, सबसे ज्यादा असर उन लोगों में देखा गया जिन्होंने कसरत के बाद गाय का दूध पिया था। वो ज्यादा चपल और सक्रिय तो दिखे ही, उनकी हड्डियों की मजबूती भी बढ़ी।

इसी आधार पर नतीजा निकाला गया कि ज्यादा कसरत के साथ दूध पीना, ज्यादा उम्र के लोगों में हड्डियों की कमजोरी को रोकने और फ्रैक्चर के खतरे को कम करने का एक असरदार तरीका हो सकता है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारती एयरटेल का एनबीएफसी शाखा के जरिए फाइनेंस सेक्टर में बड़ा दांव; करेगी 20,000 करोड़ रुपए का निवेश

मुंबई, 23 फरवरी (आईएएनएस)। भारती एयरटेल ने सोमवार को घोषणा की कि वह अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) शाखा एयरटेल मनी लिमिटेड के जरिए डिजिटल लेंडिंग कारोबार का विस्तार करने के लिए अगले कुछ वर्षों में 20,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी।

टेलीकॉम कंपनी ने कहा कि यह नया निवेश भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत करेगा और देश में मौजूद क्रेडिट गैप को कम करने में मदद करेगा।

कुल 20,000 करोड़ रुपए के निवेश में से 70 प्रतिशत राशि एयरटेल स्वयं लगाएगी, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि प्रमोटर समूह भारती एंटरप्राइजेज लिमिटेड के माध्यम से लाई जाएगी।

भारती एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि कंपनी के लेंडिंग प्लेटफॉर्म की सफलता यह दिखाती है कि वह तकनीक, डेटा और ग्राहकों के भरोसे को बड़े स्तर पर प्रभावी तरीके से जोड़ने में सक्षम है।

उन्होंने कहा, हमारा एनबीएफसी विस्तार इस मजबूत आधार को और सुदृढ़ करता है और यह हमारे उस लक्ष्य को दर्शाता है जिसमें हम भरोसे, नवाचार और वित्तीय समावेशन पर आधारित भविष्य के लिए तैयार डिजिटल लेंडिंग कारोबार बनाना चाहते हैं।

एयरटेल मनी लिमिटेड को 13 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एनबीएफसी लाइसेंस प्राप्त हुआ है।

कंपनी ने कहा कि यह कदम वित्तीय समावेशन को गहराई देने और देश भर के ग्राहकों को सरल, सुरक्षित और नवाचारी डिजिटल वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक रणनीतिक विस्तार है।

पिछले दो वर्षों में एयरटेल ने एक डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके माध्यम से अब तक 9,000 करोड़ रुपए से अधिक के लोन वितरित किए जा चुके हैं।

कंपनी ने बताया कि उसके लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (एलएसपी) मॉडल ने अनुशासित अंडरराइटिंग प्रक्रिया, बेहतर पोर्टफोलियो प्रबंधन और रियल-टाइम जोखिम निगरानी के कारण मजबूत वृद्धि हासिल की है।

उसने यह भी कहा कि 500 से अधिक डेटा वैज्ञानिकों द्वारा समर्थित डेटा और एनालिटिक्स इंजन से लैस उसका डिजिटल प्लेटफॉर्म तेज गति से विस्तार करने में सक्षम रहा है, जबकि ऋण प्रदर्शन भी संतोषजनक बना हुआ है।

नियामकीय आवश्यकताओं के तहत एयरटेल मनी ने स्पष्ट किया कि उसे आरबीआई अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन केंद्रीय बैंक कंपनी की वित्तीय स्थिति या उसकी देनदारियों की वापसी की गारंटी नहीं देता।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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  Sports

Abhishek Sharma फ्लॉप, टॉप ऑर्डर फेल! T20 World Cup में South Africa से हार के बाद बढ़ी Team India की मुश्किलें

रविवार रात जो हुआ उसने कई पुराने सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं। लगातार 12 टी20 विश्व कप मैच जीतने के बाद भारत की लय साउथ अफ्रीका ने जिस अंदाज में तोड़ी, उसने टीम के भीतर और बाहर दोनों जगह बेचैनी बढ़ा दी है।

अहमदाबाद में खेले गए इस मुकाबले में भारत को 76 रन से हार झेलनी पड़ी। बता दें कि इस हार के बाद टीम का नेट रन रेट -3.80 तक गिर गया है, जो सुपर आठ की दौड़ में बड़ी चिंता की बात है। अब समीकरण साफ है जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ सीधे मुकाबले जीतना ही एकमात्र रास्ता बचा है। रन रेट पर नजर रखने की गुंजाइश फिलहाल कम ही दिखती है।

गौरतलब है कि टूर्नामेंट से पहले भारत को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। पिछले 20 महीनों में टीम ने आक्रामक और संतुलित क्रिकेट खेलते हुए लगातार सफलता हासिल की थी। लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में वही टीम बिखरी हुई नजर आई।

सबसे बड़ी चिंता शीर्ष क्रम की है। अभिषेक शर्मा लगातार तीसरी बार शून्य पर आउट हुए। आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष टी20 बल्लेबाज माने जाने वाले अभिषेक के लिए यह दौर आत्मविश्वास पर भारी पड़ता दिख रहा है। रविवार को उन्होंने पहली गेंद पर चौका जरूर लगाया, लेकिन जल्द ही नियंत्रण खो बैठे। मौजूद जानकारी के अनुसार पांच मैचों में चार बार पहले ओवर में विकेट गिर चुका है, जो टीम की शुरुआत पर बड़ा असर डाल रहा है।

ओपनिंग संयोजन भी सवालों के घेरे में है। अभिषेक और इशान किशन दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और नंबर तीन पर भी बाएं हाथ के तिलक वर्मा का होना विपक्षी टीमों को रणनीतिक बढ़त दे रहा है। साउथ अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने ऑफ स्पिन से फिर शुरुआती झटका दिलाया। लगातार तीसरे मैच में पहले ओवर में ऑफ स्पिनर को विकेट मिला, जो सोचने वाली बात है।

तिलक वर्मा की स्थिति भी आसान नहीं रही। तिलक वर्मा टूर्नामेंट से ठीक पहले चोट और सर्जरी से उबरे थे। लंबे ब्रेक के बाद सीधे बड़े मंच पर उतरना आसान नहीं होता। उन्होंने शुरुआत में 25 और 30 के आसपास की पारियां खेलीं, लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरी ही गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि नंबर तीन पर लगातार शुरुआती विकेट गिरने का दबाव उन पर साफ दिख रहा है।

टीम संयोजन को लेकर भी चर्चा तेज है। अक्षर पटेल को बाहर रखकर वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया। तर्क यह था कि पावरप्ले में ऑफ स्पिन से साउथ अफ्रीका के बाएं हाथ के बल्लेबाजों को रोका जाए। लेकिन जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की शानदार गेंदबाजी के चलते वह योजना लागू ही नहीं हो पाई। बाद में डेवॉल्ड ब्रेविस और डेविड मिलर ने स्पिनरों पर दबाव बना दिया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अक्षर जैसा अनुभवी ऑलराउंडर बेहतर विकल्प साबित हो सकता था।

अब नजरें आगे के मुकाबलों पर टिक गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में होने वाला मैच निर्णायक माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि संतुलन बनाने के लिए संजू सैमसन को शामिल किया जा सकता है, ताकि दाएं हाथ का विकल्प मिले। 

टीम प्रबंधन के लिए यह समय त्वरित फैसलों का है। कोच गौतम गंभीर पहले ही दबाव में हैं। बता दें कि घरेलू टूर्नामेंट में हार का असर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस किया जाता है। ऐसे में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत रखना और संयोजन में स्पष्टता लाना बेहद जरूरी है।

फिलहाल गणित सरल है। भारत को अपने अगले दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे और उम्मीद करनी होगी कि साउथ अफ्रीका अपने बाकी मैच भी जीतकर समीकरण आसान कर दे। रन रेट की जटिल गणना में उलझने के बजाय टीम को अपने खेल पर लौटना होगा। समय कम है, चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन मौका अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
Mon, 23 Feb 2026 21:14:01 +0530

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