रंग और गुलाल तो बाद में.. होली से पहले 20 रुपए की 'कान्हा पिचकारी' ने जीता कानपुर का दिल, यहां जानिए मार्केट में इस बार क्या कुछ है खास
होली पर परंपरा है कि सबसे पहले लोग अपने आराध्य को अबीर-गुलाल अर्पित करते हैं. अब इसी परंपरा में एक नया रंग जुड़ गया है. कई परिवार अब भगवान के साथ प्रतीकात्मक होली खेलने के लिए खास पिचकारी खरीद रहे हैं. मंदिरों और घरों में स्थापित ठाकुर जी के लिए यह छोटी पिचकारी खास तौर पर ली जा रही है. रंग बाजार के व्यापारी राजेश गुप्ता बताते हैं, “इस बार ग्राहकों की सोच में बदलाव दिख रहा है. लोग बच्चों के साथ-साथ भगवान के लिए भी अलग से पिचकारी ले रहे हैं. ₹20 वाली कान्हा पिचकारी की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है. रोज सैकड़ों पीस बिक रहे हैं.”
नौकरी नहीं मिली... खेती को बनाया हथियार, 2 बीघा में लगाया गोभी, 70 दिन में कमाया डेढ़ लाख रुपये
कृषि न्यूजः मेहनत और सकारात्मक सोच से गोंडा के प्रगतिशील किसान जितेंद्र कुमार मौर्य ने बेरोजगारी को अवसर में बदल दिया. ग्रेजुएशन के बाद नौकरी न मिलने पर उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ सीजनल सब्जियों की खेती शुरू की. पिता से प्रेरणा लेकर उन्होंने रिसर्च के बाद टमाटर, मिर्च, भिंडी, लौकी और कद्दू के साथ इस समय फूलगोभी व पत्ता गोभी की खेती पर फोकस किया है. करीब दो बीघा में गोभी की फसल उगा रहे जितेंद्र बताते है कि 14-15 हजार रुपये की लागत में 60-70 दिन में फसल तैयार हो जाती है. एक सीजन में उन्हें लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है. उनका मानना है कि पारंपरिक खेती से हटकर सीजनल सब्जियों की खेती किसानों को कम लागत में बेहतर मुनाफा दे सकती है.
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