तेल बाजार में बड़ा उलटफेर: सरसों तेल हुआ सस्ता, Global Market से सोयाबीन-पाम महंगा
मौसम खुलने के बाद मंडियों में आवक बढ़ने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल-तिलहन में गिरावट देखी गई। मांग कमजोर रहने से सोयाबीन तिलहन में भी नरमी रही। दूसरी ओर, विदेशी बाजारों में तेजी रहने के बीच सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में सुधार आया। ऊंचे दाम पर सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे। शिकॉगो एक्सचेंज में रात लगभग 1.75 प्रतिशत की तेजी थी और फिलहाल यहां लगभग आधा प्रतिशत की तेजी चल रही है।
सरसों का तेल सस्ता हुआ
मलेशिया एक्सचेंज में साढ़े तीन बजे 2.5 प्रतिशत से भी ज्यादा की मजबूती थी। विदेशी बाजारों में तेजी रहने से मुख्यत: आयातित तेल-तिलहनों के दाम मजबूत रहे। बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात और मौजूदा तेजी के दौर के बीच सोयाबीन तेल के दाम मजबूत रहे। वहीं मिलवालों की ओर से दाम में घट-बढ़ किये जाने से सोयाबीन तिलहन के दाम में मामूली नरमी है। विदेशों में मजबूती रहने के कारण पाम-पामोलीन तेल के दाम भी मजबूत बंद हुए।
सोयाबीन-पाम तेल महंगा हुआ
होली के लिए नमकीन बनाने वाली कंपनियों की मांग बढ़ने से बिनौला तेल के दाम में भी मजबूती देखी गइ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर रहने से भी आयात महंगा बैठ रहा है जिससे दाम और मजबूत रहे। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, मौसम खुलने के बाद मंडियों में सरसों की आवक बढने के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम में गिरावट है।
सोयाबीन तेल-रहित खल (डीओसी) के महंगे दाम पर मांग कमजोर रहने के बीच मिलवालों की ओर से दाम घटाये जाने के कारण सोयाबीन तिलहन के दाम में भी बेहद मामूली गिरावट है। सूत्रों ने कहा कि महंगा होने की वजह से सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे। तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे: सरसों तिलहन - 6,725-6,750 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली - 7,040-7,415 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 17,250 रुपये प्रति क्विंटल। मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,735-3,035 रुपये प्रति टिन। सरसों तेल दादरी- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल। सरसों पक्की घानी- 2,345-2,445 रुपये प्रति टिन। सरसों कच्ची घानी- 2,345-2,490 रुपये प्रति टिन। सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,550 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,150 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,850 रुपये प्रति क्विंटल। बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,800 रुपये प्रति क्विंटल। पामोलिन एक्स- कांडला- 12,700 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल। सोयाबीन दाना - 5,425-5,475 रुपये प्रति क्विंटल। सोयाबीन लूज- 5,025-5,075 रुपये प्रति क्विंटल।
Jeet Adani की चेतावनी- AI से तय होगी राष्ट्रीय संप्रभुता, भारत को चाहिए अपना Cloud Infrastructure
अदाणी समूह के कार्यकारी निदेशक जीत अदाणी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय अपना स्वयं का कृत्रिम मेधा (एआई) बुनियादी ढांचा तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई आने वाले समय में राष्ट्रीय संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगा। कारोबारी दिग्गज गौतम अदाणी के छोटे पुत्र जीत अदाणी ने भारत की इंटेलिजेंस सेंचुरी (बौद्धिक सदी) का खाका पेश करते हुए संप्रभुता के तीन प्रमुख स्तंभों ऊर्जा, कंप्यूट और क्लाउड, तथा सेवाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये तीनों भारत की एआई रणनीति के केंद्र में हैं।
भारत को ऊर्जा और कंप्यूटिंग सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी
यहां ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में अदाणी ने कहा कि अपने एआई भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भारत को ऊर्जा और कंप्यूटिंग सेवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। उन्होंने अक्षय ऊर्जा समूहों को एआई डेटा केंद्रों और औद्योगिक गलियारों के साथ एकीकृत करने की योजनाओं का विवरण देते हुए कहा, एआई कोड में लिखा जाता है, लेकिन यह बिजली से संचालित होता है... इसलिए ऊर्जा सुरक्षा ही वास्तव में बौद्धिक सुरक्षा है। टिकाऊ ऊर्जा हमारे लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बनेगी। कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे पर उन्होंने कहा, ‘‘क्लाउड संप्रभुता का अर्थ अलगाव नहीं, बल्कि स्वायत्तता है।
एआई का सबसे पहला लाभ भारतीय नागरिकों को मिलना चाहिए
भारत को अपनी महत्वपूर्ण एआई जरूरतों को घरेलू स्तर पर ही पूरा करना चाहिए। हमारे स्टार्टअप, शिक्षा जगत, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए उच्च-क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं तक स्वदेशी पहुंच होनी चाहिए।’’ अदाणी ने जोर देकर कहा कि एआई का सबसे पहला लाभ भारतीय नागरिकों को मिलना चाहिए, जिससे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने संप्रभु और हरित-ऊर्जा आधारित एआई मंचों के लिए अदाणी समूह की 100 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया।
जीत ने इसे ‘पांच-गीगावाट और 250 अरब डॉलर के एकीकृत ऊर्जा-एवं-कंप्यूट परिवेश’ की शुरुआत बताया, जिसे भारत की बौद्धिक क्रांति को गति देने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, ‘सवाल अब यह नहीं है कि भारत एआई सदी में शामिल होगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या एआई सदी के बुनियादी ढांचे, बुद्धिमत्ता, मानकों और मूल्यों पर भारत की छाप होगी? मेरा दृढ़ विश्वास है कि ऐसा जरूर होगा।’’ उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह बिजली से संचालित होने वाले उद्योगों ने भू-राजनीति को बदला और इंटरनेट ने वाणिज्य का कायाकल्प किया, उसी तरह कृत्रिम मेधा अब संप्रभुता को नए सिरे से परिभाषित करेगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi





















