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Tata Sons में N. Chandrasekaran की तीसरी पारी लगभग तय, लीडरशिप पर बोर्ड ने जताया पूरा भरोसा

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस अपने कार्यकारी अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन को तीसरी बार जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। बोर्ड अगले सप्ताह उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी देगा, जिसके बाद एक असाधारण आम बैठक (ईजीएम) बुलाई जाएगी। यह फैसला उनके दूसरे कार्यकाल की समाप्ति से ठीक एक वर्ष पहले लिया जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार चंद्रशेखरन जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। गैर-कार्यकारी पदों के लिए 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति नीति लागू होती है, लेकिन कार्यकारी भूमिका में यह अपवाद माना जाता है। बता दें कि 2016 में भी इसी तरह का विशेष प्रावधान किया गया था, जब रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री के बाद अंतरिम तौर पर समूह की कमान संभाली थी।

गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी रखता है, ने पिछले वर्ष अक्टूबर में सर्वसम्मति से चंद्रशेखरन को कार्यकारी भूमिका में दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। सूत्रों का कहना है कि यह कदम नेतृत्व में निरंतरता का स्पष्ट संकेत देने के लिए उठाया जा रहा है, खासकर उस समय जब समूह कई बड़े और पूंजी-गहन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

इसी बीच टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शीर्ष प्रबंधन अगले सप्ताह टाटा संस बोर्ड के सामने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुति देगा। हाल के महीनों में वैश्विक टेक शेयरों में गिरावट और एआई आधारित नवाचारों के तेज विस्तार ने पारंपरिक आईटी सेवाओं के मॉडल पर दबाव बनाया है। ऐसे में बोर्ड की ओर से निगरानी और रणनीतिक दिशा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बता दें कि टाटा संस बोर्ड को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एयर इंडिया से जुड़े अहम अपडेट भी दिए जाएंगे। एयर इंडिया, जिसे समूह ने अधिग्रहण के बाद पुनर्गठित करने का बड़ा अभियान शुरू किया, वर्ष 2025 में चुनौतियों से घिरा रहा। अहमदाबाद विमान दुर्घटना जैसी घटनाओं ने परिचालन और छवि, दोनों स्तरों पर असर डाला। हालांकि समूह का दीर्घकालिक लक्ष्य एयरलाइन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाना है।

चंद्रशेखरन ने अपने वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले पांच वर्षों में समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी और एयर इंडिया जैसे क्षेत्रों में लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर खुद को “फ्यूचर फिट” बनाने की दिशा में काम किया है। उनका दावा है कि वित्त वर्ष 2027 तक नए व्यवसाय समूह की शीर्ष पांच राजस्व देने वाली कंपनियों में शामिल होंगे और लाभप्रद स्थिति में पहुंचेंगे।

वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो टाटा संस की आय वित्त वर्ष 2025 में 24 प्रतिशत बढ़कर 5.92 लाख करोड़ रुपये पहुंची, जबकि शुद्ध लाभ 17 प्रतिशत घटकर 28,898 करोड़ रुपये रहा। वहीं पूरे टाटा समूह की सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त राजस्व 15.34 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 1.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वर्तमान बाजार पूंजीकरण 24.39 लाख करोड़ रुपये के आसपास है।

गौरतलब है कि टाटा संस की आय का बड़ा हिस्सा उन कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड से आता है, जिनमें उसकी हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से लेकर 71.74 प्रतिशत तक है। पिछले वर्ष कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ अपना पंजीकरण स्वेच्छा से वापस लेते हुए 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुका दिया था, ताकि वह गैर-सूचीबद्ध ढांचे में संचालन जारी रख सके।

चंद्रशेखरन को फरवरी 2022 में दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल दिया गया था। वे पहले टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे और 2016 में टाटा संस बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें अध्यक्ष नियुक्त किया गया। समूह के भीतर उन्हें रणनीतिक विस्तार, वैश्विक अधिग्रहण और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था नीतिगत अनिश्चितताओं और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है, टाटा समूह नेतृत्व की स्थिरता के जरिए दीर्घकालिक रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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सिगरेट के दाम बढ़े, Stock Market में ITC, Godfrey Phillips के शेयर बने रॉकेट, निवेशक हुए मालामाल।

शेयर बाजार में तंबाकू कंपनियों के शेयरों में अचानक तेजी देखने को मिली। सिगरेट बनाने वाली प्रमुख कंपनियों आईटीसी लिमिटेड, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड और वीएसटी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों में 20 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज की गई। बाजार में यह तेजी मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिनमें कहा गया कि कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का असर उपभोक्ताओं पर डालने के लिए कीमतों में इजाफा किया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार हाल ही में केंद्र सरकार ने सिगरेट पर उत्पाद शुल्क ढांचे में बदलाव और जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद कंपनियों ने मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए कीमतें बढ़ाने का कदम उठाया है। विश्लेषकों का अनुमान था कि कर ढांचे में बदलाव से ईबीआईटी में 8 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद यह गिरावट लगभग 2 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है।

बताया जा रहा है कि आईटीसी अलग-अलग ब्रांड्स में 20 से 40 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा सकती है। नई दरों पर शिपमेंट जल्द बाजार में पहुंचने की संभावना है। वहीं, खुदरा विक्रेता भी पुराने स्टॉक को ऊंचे दाम पर बेचते देखे जा रहे हैं।

शेयर बाजार में आईटीसी का शेयर लगातार तीसरे सत्र में मजबूत रहा और दिन में 2 प्रतिशत चढ़कर 331 रुपये के आसपास पहुंच गया। पिछले तीन सत्रों में इसमें करीब 5.5 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया का शेयर बीएसई पर 20 प्रतिशत के अपर सर्किट के साथ 2,481 रुपये पर पहुंच गया, जिससे दो दिनों में इसकी तेजी 15 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वीएसटी इंडस्ट्रीज में भी सुबह के कारोबार में 3.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि नए कर ढांचे के तहत सिगरेट पर उत्पाद शुल्क को 2,050 रुपये से 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक के दायरे में पुनर्गठित किया गया है, इसके अलावा 40 प्रतिशत जीएसटी लागू है। इससे सिगरेट पर कुल कर भार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते मांग, मुनाफे और अवैध व्यापार बढ़ने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।

बजट में नेशनल कैलैमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (एनसीसीडी) से जुड़ा एक तकनीकी बदलाव भी किया गया है। सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर वैधानिक एनसीसीडी दर 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगी। हालांकि, बजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचना के माध्यम से प्रभावी दर फिलहाल 25 प्रतिशत ही बनी रहेगी। सरल शब्दों में कहें तो अभी तत्काल कर वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि भविष्य में दर बढ़ाने के लिए कानूनी प्रावधान तैयार किया गया है।

आईटीसी के दिसंबर तिमाही नतीजों पर नजर डालें तो कंपनी ने सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत राजस्व वृद्धि दर्ज की थी। एफएमसीजी-ओदर्स श्रेणी में दोहरे अंकों की वृद्धि और सिगरेट कारोबार में स्थिर मांग इसका मुख्य कारण रही है। सिगरेट से आय में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे 7 प्रतिशत वॉल्यूम ग्रोथ का समर्थन मिला है।

हालांकि, सिगरेट खंड का मार्जिन घटकर 59.9 प्रतिशत पर आ गया, जो कई तिमाहियों का निचला स्तर है। उच्च लागत वाले पत्ते (लीफ इन्वेंट्री) की खपत के कारण मार्जिन पर दबाव देखा गया। प्रबंधन ने संकेत दिया है कि मौजूदा फसल चक्र में पत्ते की खरीद कीमतें नरम पड़ी हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में सुधार संभव है।

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