भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: सर्बिया के राष्ट्रपति ने की भारत की सराहना
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अवसर पर सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने आयोजन की सफलता के लिए भारत को बधाई दी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भारत की पहल की सराहना की।
राष्ट्रपति वुसिक ने कहा, “सबसे पहले मैं एआई जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बेहद सफल आयोजन के लिए भारत को बधाई देना चाहता हूं। यह मुद्दा अब पारंपरिक मीडिया और सोशल नेटवर्क्स में भी प्रमुख विषय बन गया है, जो अपने आप में बड़ी सफलता है।” उन्होंने कहा कि भारत ने एआई के बुनियादी ढांचे, डेटा सेंटर और कंप्यूटर समेत विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश शुरू किया है। सर्बिया भी, एक छोटा देश होने के बावजूद, इसी दिशा में प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह समिट सीखने और आपसी सहयोग को मजबूत करने का बेहतरीन अवसर रहा, जिससे सुरक्षित और संतुलित एआई वातावरण सुनिश्चित करने तथा वैश्विक चिंताओं से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को प्रेरणादायक बताया।
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने समिट के दौरान सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों की समीक्षा की और उन्हें आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में व्यापार और निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और भारत-सर्बिया की पारंपरिक मित्रता को दोहराया, जो मजबूत जन-जन संपर्क पर आधारित है।
पांच दिवसीय भारत एआई इम्पैक्ट समिट में 110 से अधिक देशों और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी रही। इसमें लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष और करीब 45 मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
समिट का उद्देश्य एआई पहलों को भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ तथा वैश्विक सिद्धांत ‘एआई फॉर ह्यूमैनिटी’ के अनुरूप आगे बढ़ाना है। यह उच्चस्तरीय भागीदारी भारत और सर्बिया के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सतत् सांस्कृतिक विरासत के साथ नव वर्ष का जश्न मनाएं
बीजिंग, 19 फरवरी (आईएएनएस)। अश्व नव वर्ष के आगमन के साथ ही चीन की धरती लालटेन और सजावट से सज गई, और आनंद व शांति से भर गई।
वसंत उत्सव से पहले, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और आम जनता से मुलाकात की और उन्हें नए साल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश भर के सभी जातीय समूहों के लोगों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की और मातृभूमि की समृद्धि और शक्ति की कामना की।
वसंत उत्सव चीनी राष्ट्र की सांस्कृतिक स्मृति को संजोए रखता है और चीनी जनता की सामूहिक भावनाओं का प्रतीक है। राष्ट्रपति शी वसंत उत्सव संस्कृति सहित उत्कृष्ट पारंपरिक चीनी संस्कृति को विरासत में लेने और बढ़ावा देने को बहुत महत्व देते हैं। फू(भाग्य) अक्षर चिपकाना, लकड़ी के ढोल बजाना, और चीनी नव वर्ष के लिए स्टीम्ड बन्स बनाना... जैसे-जैसे वसंत उत्सव नजदीक आता है, शी हमेशा लोगों के साथ नव वर्ष का जश्न मनाते हैं और शुभकामनाएं भेजते हैं।
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा, “मेरी सबसे बड़ी कामना है कि सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं और समृद्धि मिले। उन्होंने आगे कहा कि हजारों वर्षों से चली आ रही त्योहार मनाने की सांस्कृतिक परंपराएं चीनी राष्ट्र, चीनी जनता और सभी चीनी पुत्र-पुत्रियों को जोड़ने वाला एक आध्यात्मिक बंधन हैं। उन्होंने निर्देश दिया, वसंत उत्सव के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों में जनता के बीच लोकप्रिय सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जा सकता है, ताकि त्योहार को और अधिक उत्सवपूर्ण और आनंदमय बनाया जा सके।”
उत्साहपूर्ण माहौल चीनी संस्कृति के निरंतर विकास का एक जीवंत प्रमाण है। राष्ट्रपति शी ने गहराई से कहा, “उत्कृष्ट पारंपरिक चीनी संस्कृति चीनी राष्ट्र की आध्यात्मिक जीवनरेखा है और उत्कृष्ट पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के बिना चीनी शैली का आधुनिकीकरण संभव नहीं है।”
चीन की विशाल भूमि पर नजर डालते हुए, हम अपनी आध्यात्मिक भूमि को संस्कृति से पोषित करते हैं। परंपरा और आधुनिकता के मेल से चीनी संस्कृति और भी अधिक चमकती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
डीकेपी/
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