सूर्य-शुक्र ने बनाया शुक्रादित्य राजयोग, इन 3 राशियों का चमक सकता है लक, शुरू होगा गोल्डन टाइम, खुलेंगे सफलता के नए द्वार
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य और दैत्यों के गुरु शुक्र की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। दोनों ग्रह हर माह राशि परिवर्तन करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्तमान में आत्मा, पिता व सम्मान के कारक माने जाने वाले सूर्य और प्रेम व सौंदर्य के कारक कहे जाने वाले शुक्र कुंभ राशि (शनि …
8 मिनट का वो रूहानी गाना, दिल की धड़कन बन गया वो 'पिया', छिपा है प्रेम और विरह का दर्द
कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो सीधे दिल में उतरकर जुबान पर चढ़ जाते हैं. ऐसा ही एक गाना है, जिसको सुनने के बाद पता ही नहीं लगता 8 मिनट कहा खत्म हो गए. बात कर रहे हैं, उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की अमर सूफी कव्वाली 'पिया रे पिया रे' की. सूफी सम्राट की गहराई से भरी आवाज इस धुन को दिल की धड़कन बना देती है. बोल सरल लेकिन गहरे हैं: 'पिया रे पिया रे...थारे बिना लागे नाहीं म्हारा जिया रे... नैनों ने थारी कैसा जादू किया रे' यहां ‘पिया’ शब्द यहां महज प्रेमी नहीं, बल्कि उस परम सत्ता का प्रतीक है, जिससे मिलने की तड़प हर इंसान के भीतर छिपी होती है. गीत में प्रेम की मिठास भी है और विरह का दर्द भी, जो हर श्रोता को भीतर तक छू जाता है. नुसरत साहब की आलाप और सुरों की उठान मानो आत्मा को एक अलग ही संसार में ले जाती है, जहां इश्क सांसारिक सीमाओं से ऊपर उठकर इश्क-ए-हकीकी बन जाता है. यही वजह है कि यह कलाम आज भी सूफी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा हुआ है.
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