एआई सम्मेलन से देश में इनोवेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप, रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा : सस्मित पात्रा
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी स्थित भारत मंडपम में सोमवार से एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत हो गई। इस सम्मेलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
कार्यक्रम में दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रतिनिधि और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में स्वास्थ्य, शिक्षा और सुशासन के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्रांतिकारी उपयोगों पर व्यापक चर्चा हो रही है। आयोजकों का कहना है कि यह एक्सपो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एआई फॉर ऑल’ के विजन को नई मजबूती देगा।
भाजपा सांसद सस्मित पात्रा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रमुख भी शामिल हो रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारत एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से देश में इनोवेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप, रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पॉलिसी और लेजिस्लेशन से जुड़े विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श हो रहा है। यह समिट दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारत को एआई हब के रूप में देखा जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग देश को विकसित बनाने में कारगर साबित होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया देते हुए सस्मित पात्रा ने कहा कि इस समझौते में कई फायदे हैं, हालांकि कुछ चिंताएं भी हैं। उन्होंने कहा कि टैरिफ में कमी आई है। भले ही यह शून्य प्रतिशत नहीं है। भारत पहले ही यूके और यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील कर चुका है और अमेरिका के साथ यह समझौता विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत लेकर आया है, जो ऊंचे टैरिफ से प्रभावित थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र एक संवेदनशील विषय है और जब तक पूरा कागजी काम सामने नहीं आता, तब तक अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय इंतजार करना बेहतर होगा।
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर में लापरवाही के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है। योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से न कटें, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित रह जाएं तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि आयोग ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए बीएलओ स्तर पर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
यूएई के बजाय अब अमेरिका से सोना-चांदी का आयात बढ़ाएगा भारत
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पहले ही अमेरिका से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। अब सरकार की योजना कीमती धातुओं के आयात में भी बदलाव करने की है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत अब यूएई के बजाय अमेरिका से अधिक सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहा है।
इस कदम से सोना-चांदी की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है और अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन (ट्रेड सरप्लस) भी कम हो सकता है।
अमेरिका सोना और चांदी के व्यापार का एक बड़ा वैश्विक केंद्र है। वह सोना (जिसमें स्क्रैप और वेस्ट भी शामिल है) और चांदी का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका कनाडा, भारत और ब्रिटेन जैसे देशों को अरबों डॉलर की कीमती धातुएं निर्यात करता है। इन निर्यातों में कच्चा, परिष्कृत और आभूषण रूप में तैयार सोना-चांदी शामिल होता है।
भारत अमेरिका को लगभग 2.8 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से करीब 1.5 अरब डॉलर का आयात करता है। इस तरह गैर-समुद्री कृषि उत्पादों में भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का व्यापारिक अधिशेष (सरप्लस) हासिल है।
अधिकारी ने बताया कि भारत में आयात होने वाले किसी भी कृषि उत्पाद को जैव-सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा। देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) खाद्य पदार्थों की अनुमति नहीं है। अमेरिका से आयात होने वाले कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) भी लागू है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता भारत के डेटा सेंटर उद्योग के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इससे उन्नत तकनीक तक पहुंच, निवेश में वृद्धि और परिचालन लागत में कमी आएगी।
पहले एंटरप्राइज जीपीयू सर्वर पर 20 से 28 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, जिससे भारत में डेटा सेंटर स्थापित करना सिंगापुर जैसे देशों की तुलना में महंगा पड़ता था। अब शुल्क में कटौती से जीपीयू-तैयार डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत लगभग 14 प्रतिशत तक कम होने की संभावना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत व्यापक टैरिफ कटौती, कई उत्पाद श्रेणियों में शून्य शुल्क पहुंच, डिजिटल और तकनीकी सहयोग में वृद्धि तथा किसानों, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए संतुलित ढांचा तैयार किया गया है।
साल 2024 में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 86.35 अरब डॉलर रहा। इस समझौते से टेक्सटाइल, लेदर, रत्न एवं आभूषण, कृषि, मशीनरी, होम डेकोर, फार्मास्यूटिकल और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा।
समझौते के तहत 30.94 अरब डॉलर के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं 10.03 अरब डॉलर के निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे बड़ी मात्रा में भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में कम शुल्क या पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच के साथ प्रवेश कर सकेंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता काफी बढ़ेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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