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Delhi में Har Ghar Tiranga और विरोध मार्च को लेकर राष्ट्रीय ध्वज पर छिड़ी सियासी बहस

(नीलम बाघा) नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर स्वतंत्रता दिवस से पहले सरकार का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हो या कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च, देशभक्ति, असहमति और विरोध-प्रदर्शन पर जारी बहस में तिरंगे का प्रदर्शन अहम बिंदु बनकर उभरा है। कॉजपा ने अपने उन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद समर्थन जुटाने के लिए ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के आयोजन की घोषणा की थी, जो विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से बाहर किए गए जंतर-मंतर क्षेत्र में घुस गए थे और वहां राष्ट्रीय ध्वज थामकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। कनॉट प्लेस में 16 अक्टूबर को तिरंगे के साथ कॉजपा के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने रोक लगा दी थी।

पुलिस ने इसके लिए अनुमति न होने, निषेधाज्ञा लागू होने और भगदड़ मचने के खतरे का हवाला दिया था। मार्च शुरू होने से कुछ घंटे पहले 20 से अधिक पुलिसकर्मी कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे और उन्हें दो नोटिस थमाए। विपक्षी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इन पाबंदियों की आलोचना करते हुए एक सुर में कहा था, “तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है।” उन्होंने सवाल उठाया था कि राष्ट्रीय ध्वज को केंद्र में रखकर किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन को क्यों रोका जा रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) नेता अनीश गवांडे ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “पुलिस का हमें मार्च निकालने की इजाजत न देना सरकार की कायरता को दिखाता है। जो लोग ‘हर घर तिरंगा’ की वकालत करते हैं, वे सड़कों पर तिरंगा देखकर इतने डरे हुए क्यों हैं?” सीईसी के पद से कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉजपा के आंदोलन का समर्थन कर रहे अभिनेता प्रकाश राज ने ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो संदेश में विरोध-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “डर साफ दिख रहा है।

मैं मोदी जी से पूछता हूं, आपके ‘हर घर तिरंगा’ नारे का क्या हुआ? आपने ही तो ‘हर घर तिरंगा’ शुरू किया था और अब क्या आप शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने वाले छात्रों और युवाओं को गिरफ्तार करेंगे? हमारे पास संविधान की ताकत है।

हमारे पास विरोध करने का अधिकार है।” हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदर्शनकारियों की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे अपनी राजनीति चमकाने के लिए तिरंगे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इसकी गरिमा कम हो रही है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, “उनके (प्रदर्शनकारियों के) घरों को ही देख लीजिए; शायद आपको पता चले कि उन्होंने 13 से 15 अगस्त के बीच तिरंगा नहीं फहराया था, लेकिन आज वे दिल्ली में तिरंगा लेकर घूम रहे हैं, ताकि अराजकता पैदा कर सकें।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने पूरे देश के लिए ‘हर घर तिरंगा’ पहल की शुरुआत की है। तिरंगा हमारे सम्मान, प्रतिष्ठा और गौरव का प्रतीक है।

हम कभी भी इसकी गरिमा को कम नहीं होने देंगे... यह कभी भी अराजकता का प्रतीक नहीं हो सकता।” आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2022 में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के जरिये नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि उनमें देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ावा दिया जा सके। मार्क्सवादी कांग्रेस पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने मार्च के दौरान कहा, “यह अजीब बात है कि भारत में राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है।

हम तिरंगा थामे दिल्ली की सड़कों पर डटे रहेंगे, चाहे वे हमें दबाने की कितनी भी कोशिश क्यों न कर लें।” जानी-मानी अर्थशास्त्री और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रोफेसर जयंती घोष ने कहा कि देशभक्ति को केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शनों को थोपने तक सीमित नहीं किया जा सकता और राष्ट्रीय प्रतीक पर सभी नागरिकों का समान अधिकार है। उन्होंने कहा, “देशभक्ति का मतलब ऊपर से थोपी गई दिखावटी गतिविधियां नहीं है, जैसा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के मामले में था। बल्कि यह तो लगभग सभी भारतीयों के भीतर गहराई से बसी एक भावना है, जो पूरी तरह से स्वैच्छिक है; इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता और न ही थोपा जाना चाहिए।” घोष ने कहा कि तिरंगा न केवल देश के प्रति प्रेम को दर्शाता है, बल्कि उन आदर्शों को भी दिखाता है, जिनके लिए आजादी हासिल की गई थी और संविधान तैयार किया गया था।

उन्होंने कहा कि कथित कदाचार और जवाबदेही की कमी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी हैं। घोष ने कहा, “विरोध-प्रदर्शनों को जिस तरह दबाया जा रहा है, उससे साफ पता चलता है कि सत्ता में बैठे लोग बिना किसी जवाबदेही के हमेशा के लिए सत्ता में बने रहना चाहते हैं। वहीं, तिरंगे और संविधान की प्रति जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल शासकों को यह याद दिलाता है कि हमारे देश की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकती।” जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) के पूर्व अध्यक्ष सूरजीत मजूमदार ने कहा कि देशभक्ति का अर्थ देश और उसके लोगों की तरक्की के प्रति प्रतिबद्धता तथा इस उद्देश्य के लिए त्याग करने की तत्परता है, चाहे खतरा विदेशी ताकतों से हो या अपनी ही सरकार से।

उन्होंने कहा कि ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान लोगों ने जोखिम उठाए, जबकि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सरकारी तंत्र का समर्थन हासिल था। विरोध मार्च में हिस्सा लेने वाले एक छात्र ने पुलिस की तैनाती के स्तर पर सवाल उठाए। उसने पूछा कि युवा प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की क्या जरूरत थी।

पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, जो अधिकारियों को कुछ खास खतरों और गड़बड़ियों को रोकने के लिए आदेश जारी करने का अधिकार देती है। साथ ही, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के एक चुनिंदा समूह को किसी दूसरी जगह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने में मदद करने का प्रस्ताव भी दिया। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन को लेकर कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

एक सूत्र के मुताबिक, लोगों से बार-बार वहां से हट जाने की अपील किए जाने के बावजूद शुक्रवार को कनॉट प्लेस और उसके आसपास भीड़ जमा हो गई, जिसके चलते कानूनी कार्रवाई की गई। प्रतिबंधों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के कदम को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त बहस छिड़ गई है। ‘एक्स’ पर एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “जो सरकार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को बढ़ावा दे रही है, वही अब ‘लहरा दो तिरंगा’ के आह्वान से असहज नजर आ रही है।

तिरंगा हर भारतीय का है, न कि किसी सरकार, पार्टी या विचारधारा का।” एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा कि नेताओं को हिरासत में लेकर से उन लोगों की आवाज नहीं दबाई जा सकती, जो अपनी बात रखने के लिए दृढ़ हैं। उसने लिखा, “लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब वह असहमति को सुनता है, न कि तब जब वह उससे डरता है।” एक उपयोगकर्ता ने पूछा, “तो क्या अब हम तभी तिरंगा प्रदर्शित कर सकते हैं, जब मोदी इजाजत देंगे?” कुछ उपयोगकर्ताओं ने एक अलग ‘तिरंगा मार्च’ की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क था कि केंद्र की ‘हर घर तिरंगा’ पहल ने पहले ही नागरिकों को अपने घरों में तिरंगा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

एक उपयोगकर्ता ने 2022 में अभियान शुरू होने के बाद से अपने घर पर फहराए गए तिरंगे की ओर इशारा करते हुए कहा, “इसलिए ‘दीपके तिरंगा यात्रा’ की कोई जरूरत नहीं है।” एक अन्य उपयोगकर्ता ने आयोजकों पर राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय ध्वज का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए लिखा, “‘हर घर तिरंगा’ का मतलब है हर घर में तिरंगा, न कि सड़कों पर...।” समर्थकों और आयोजकों के लिए तिरंगा उस विरोध-प्रदर्शन का मुख्य हिस्सा है, जिसका मकसद एक सार्वजनिक संदेश देना है। वहीं, इस मार्च पर सवाल उठाने वालों को लगता है कि प्रदर्शनकारियों के तिरंगा लहराने के पीछे देशभक्ति से ज्यादा राजनीति है।

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Ishaq Dar ने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से की बातचीत, कूटनीति पर दिया जोर

(सज्जाद हुसैन) इस्लामाबाद, 18 अक्टूबर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची ने “बदलते क्षेत्रीय हालात” और बगदाद में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक पर रविवार को चर्चा की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, डार ने टेलीफोन पर हुई बातचीत में अराघची से आग्रह किया कि वह क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान कूटनीति के जरिये करें। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत सऊदी अरब में हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों सहित अहम बुनियादी ढांचों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच हुई।

हूती विद्रोहियों ने इस महीने सऊदी अरब के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और आभा हवाई अड्डे सहित अन्य हवाई अड्डों को बार-बार निशाना बनाया है, जिससे उड़ानें बाधित हुई हैं और जानमाल का नुकसान भी झेलना पड़ा है। बयान में कहा गया है, “दोनों नेताओं ने बदलते क्षेत्रीय हालात और बगदाद में ओआईसी विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक पर चर्चा की। उप-प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री डार ने क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।” ओआईसी विदेश मंत्रियों की परिषद की 52वीं बैठक 17-18 अक्टूबर 2026 को इराक के बगदाद में आयोजित की जा रही है।

पाकिस्तान ओआईसी के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। बयान के मुताबिक, डार और अराघची ने आपस में करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। ईरान ने इस हफ्ते सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बातचीत में मदद करने की पेशकश की।

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में एक शिखर सम्मेलन के बाद सात अगस्त को ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

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  Sports

Babar Azam बने International Cricket में 16000 Runs बनाने वाले Pakistan के 5वें बल्लेबाज

पाकिस्तान के अनुभवी बल्लेबाज बाबर आजम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। रविवार, 18 अक्टूबर को श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय त्रिकोणीय सीरीज के पहले मुकाबले में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 16,000 रन पूरे कर लिए। रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में बाबर को इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए केवल 7 रन की जरूरत थी, जिसे उन्होंने पाकिस्तान की पारी के 5वें ओवर की आखिरी गेंद पर पूरा कर लिया।

इस उपलब्धि के साथ बाबर आजम पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16,000 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले केवल 5वें बल्लेबाज बन गए हैं। यह उनके लंबे क्रिकेट करियर की एक अहम उपलब्धि है। बाबर ने मई 2015 में पाकिस्तान के लिए एकदिवसीय मुकाबले से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। श्रीलंका के खिलाफ जारी यह मुकाबला उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 355वां मैच है।

पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक के नाम है। उन्होंने 1991 से 2007 के बीच 495 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले और कुल 20,541 रन बनाए। इस सूची में दूसरे स्थान पर यूनिस खान हैं, जिन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 17,790 रन बनाए थे। वहीं, मोहम्मद यूसुफ 17,134 रनों के साथ तीसरे और जावेद मियांदाद 16,213 रनों के साथ चौथे स्थान पर हैं।

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, बाबर आजम ने अब तक टेस्ट क्रिकेट में 66 मैच खेलकर 4,771 रन बनाए हैं। वहीं, 145 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनके नाम 4,596 रन दर्ज हैं। एकदिवसीय क्रिकेट में उन्होंने 144 मैचों में 6,633 रन बनाए हैं। तीनों प्रारूपों में पाकिस्तान की कप्तानी कर चुके बाबर अपनी बल्लेबाजी के दम पर टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बाबर आजम सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। वहीं, पाकिस्तान की ओर से एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में वह 9वें स्थान पर हैं। 16,000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करना इस बात का संकेत है कि उन्होंने अलग-अलग प्रारूपों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम है। उन्होंने 1989 से 2013 तक अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 34,357 रन बनाए। इस सूची में भारत के विराट कोहली दूसरे स्थान पर हैं, जिनके नाम 28,527 रन दर्ज हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 14 खिलाड़ी 20,000 से ज्यादा रन बना चुके हैं, लेकिन इस उपलब्धि को हासिल करने वाले खिलाड़ियों में पाकिस्तान का केवल 1 क्रिकेटर शामिल है। ऐसे में बाबर आजम के लिए 16,000 रन का आंकड़ा पार करना एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि है। अब उनकी नजर अपने प्रदर्शन को जारी रखने और पाकिस्तान को आगामी मुकाबलों में जीत दिलाने पर होगी।

Sun, 18 Oct 2026 22:51:00 +0530

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