ईरान अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर अब झुकने को तैयार हो गया। हालांकि उसने कहा है कि इसके लिए अमेरिका को पहले प्रतिबंधों में ढील देनी होगी। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों की बौछार की हुई है। हालांकि दोनों देशों ने ओमान की मध्यस्था में इनडायरेक्ट बातचीत जरूर की है। लेकिन अमेरिका और ईरान अब स्विट्जरलैंड में भी मिलने वाले हैं और ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर जो संकेत दिए हैं कि वो कुछ कदम पीछे हटा सकता है। ईरानी उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने भी कह दिया है कि उनका देश अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करने के लिए उस पर विचार करने के लिए तैयार है। बशर्ते वाशिंगटन बैन हटाने पर चर्चा करने को तैयार हो जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ईरान परमाणु समझौता तोड़ दिया था और इसके बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ कई कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने पिछले साल ही ईरान पर परमाणु सुविधाओं पर जबरदस्त बमबारी की और इस समय अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत ईरान के पास जबरदस्त नजदीक से घेरा डाले हुए हैं। दरअसल एक इंटरव्यू में माजिद ने यह कह दिया कि अब जिम्मेदारी अमेरिका की है। उन्होंने कहा कि यह साबित करना है कि वह समझौता करना चाहते हैं। अब यह बात ईरान ने जाहिर करके गेंद अमेरिका के पाले में डाल दी है। अगर वह ईमानदार हैं तो मुझे यकीन है कि हम एक समझौते की राह पर जरूर आगे बढ़ेंगे। ईरान का यह बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान के बीच में आया है। अमेरिका और ईरान ने इस महीने ओमान की मध्यस्था में ही इनडायरेक्ट बातचीत शुरू की।
दोनों देशों के वार्ताकार जिनेवा में एक बार फिर मिलकर के इसी विषय पर बातचीत आगे बढ़ाएंगे। और ईरानी उप विदेश मंत्री ने ओमान में अमेरिका के साथ हुई बैठक को कमोबेश पॉजिटिव दिशा में ही बताया। लेकिन यह भी कहा कि अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बातचीत को पूरी तरह से पॉजिटिव बताया। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान जल्द परमाणु समझौता नहीं करता तो उसके खिलाफ सैन्य कारवाई के विकल्प पूरी तरह से खुले हुए हैं। उन्होंने बार-बार मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी की ओर इशारा भी किया।
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भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने मुंबई के पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में तेल की तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एक अत्याधुनिक अभियान में तेल और तेल आधारित माल से लदे तीन विदेशी जहाजों को रोका गया और जब्त किया गया। अधिकारियों ने बताया कि ये जहाज कथित तौर पर रूस और ईरान जैसे संघर्षग्रस्त देशों से सस्ता तेल प्राप्त कर रहे थे और उसे समुद्र के बीच में ही अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित कर रहे थे। इस तरीके से तस्कर तटीय देशों द्वारा लगाए गए करों और शुल्कों से बचते हुए भारी मुनाफा कमा रहे थे।
संदिग्ध जहाज और छिपी हुई पहचान
तीनों जहाजों, जिनकी पहचान स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जाफजिया के रूप में हुई है, ने कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने नाम और झंडे बदल लिए थे। हालांकि उनके आईएमओ नंबर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पहले प्रतिबंधित किए गए जहाजों से मेल खाते थे, ईरान की राष्ट्रीय ईरानी तेल कंपनी (एनआईओसी) ने इन जहाजों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया। अधिकारियों को संदेह है कि ये जहाज खुले समुद्र में अवैध तेल हस्तांतरण में शामिल थे और नियामक निगरानी से बच रहे थे।
ऑपरेशन का विवरण
5 फरवरी को, आईसीजी के जहाजों ने मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में तीन संदिग्ध जहाजों को रोका। एक विशेष बोर्डिंग टीम ने गहन निरीक्षण किया, जिसमें शामिल थे:
इलेक्ट्रॉनिक डेटा सिस्टम की जाँच
जहाज के दस्तावेजों का सत्यापन
चालक दल से पूछताछ
जाँच में तस्करी के पूरे तौर-तरीकों का खुलासा हुआ।
अत्याधुनिक निगरानी से तस्करी नेटवर्क का खुलासा
तटरक्षक बल की प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली ने सबसे पहले भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध रूप से संचालित एक मोटर टैंकर का पता लगाया। आगे की डिजिटल जांच और डेटा विश्लेषण से समुद्र में तेल आधारित माल के अवैध परिवहन में शामिल दो और जहाजों की पहचान करने में मदद मिली।
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