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चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन: पश्चिम बंगाल में 7 अधिकारी सस्पेंड, मतदाता सूची में हेराफेरी और लापरवाही के गंभीर आरोप
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने के काम में जुटी मशीनरी पर भारतीय चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में 'गंभीर कदाचार', 'कर्तव्य में लापरवाही' और 'वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग' के आरोप में सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए अधिकारियों में राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के AERO शामिल हैं। इनमें कैनिंग पूर्बा से दो अधिकारी, और सुती, मयनागुड़ी, समशेरगंज, देबरा व फरक्का विधानसभा क्षेत्रों से एक-एक अधिकारी शामिल हैं। जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दस्तावेजों की सही जांच नहीं की और बिना अनिवार्य प्रमाणों के ही कई नामों को मंजूरी दे दी।
दस्तावेजों और मैपिंग में मिलीं भारी खामियां
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों ने अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले की जाने वाली स्क्रूटनी के दौरान कई मामलों को बिना निर्धारित दस्तावेजों के ही क्लियर कर दिया था। इसके अलावा, मतदाताओं की पात्रता और मैपिंग में भी विसंगतियां पाई गईं।
अधिकारियों ने इन त्रुटियों को ठीक करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज किया, जिसे आयोग ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के साथ खिलवाड़ माना है। आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13CC के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और फॉर्म-7 पर सख्ती
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को मतदाता सूची में आपत्तियों (Form-7) के निपटारे के लिए समय सीमा बढ़ाने का निर्देश दिया था। आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को कड़ा संदेश दिया है कि फॉर्म-7 के तहत प्राप्त सभी आपत्तियों का निपटारा कानून के अनुसार और पारदर्शी तरीके से किया जाए।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से कटना नहीं चाहिए और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम शामिल नहीं होना चाहिए।
58 लाख नामों के हटने से मचा है सियासी घमासान
बता दें कि पश्चिम बंगाल में पुनरीक्षण प्रक्रिया के पहले चरण में ही लगभग 58 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें से 24 लाख को मृत, 19 लाख को स्थानांतरित और 12 लाख को लापता बताया गया है। इस भारी कटौती को लेकर राज्य में राजनीतिक घमासान जारी है।
तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र की साजिश बताया है, जबकि भाजपा का आरोप है कि ममता सरकार अवैध प्रवासियों के नाम बचाने की कोशिश कर रही है। अब अधिकारियों के निलंबन ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
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