अमेरिका ईरान के माथे पर एयरक्राफ्ट कैरियर्स और खूंखार लड़ाकू विमान लेकर खड़ा है। तो वहीं इन सबके बीच एक और बड़ा खुलासा हो गया है। यह खुलासा किया है चीन की सेटेलाइट तस्वीरों ने। जिसने दिखा दिया है कि जॉर्डन के मुआफक साल्टी एयरबेस पर अमेरिका का सुपर डिफेंस सिस्टम ठाड यानी कि टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस तैनात हो चुका है। जिनकी तैनाती की यह तस्वीरें सवाल उठा रही हैं कि क्या अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी कर चुका है और हमले के बाद किसी भी जवाबी हमले से निपटने के लिए अमेरिका इन डिफेंस सिस्टमकी तैनाती कर रहा है। इसकी तैनाती उस बेस पर की गई है जिसे अमेरिकी फौजों का मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण फॉरवर्ड लोकेशन माना जाता है और इसलिए ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाही से पहले अमेरिका इस बेस पर अपने आप को मजबूत कर रहा है और अब चीन ने अमेरिका के इस चाल को बेनकाब कर दिया जहां इस पूरे मामले में चीन की सेटेलाइट्स का एक अलग खेल सामने आया है।
इस सिस्टम की तैनाती का खुलासा करने के पीछे चीनी कंपनी मिजार विजन का हाथ है। जिसकी सेटेलाइट तस्वीरों ने इन सिस्टम्स की तैनाती को सार्वजनिक कर दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन यह जानकारी ईरान तक पहुंचाना चाह रहा था? कुछ रिपोर्ट्स तो ऐसा दावा कर रही हैं कि चीनी युद्ध पोर्ट पर्शियन गल्फ के पास तैनात है और अमेरिकी गतिविधियों पर लगातार नजर भी बनाए हुए हैं। इन सबके बीच चीन की तरफ से अमेरिकी सिस्टम की लोकेशन लीक करना ईरान के लिए बेहद अहम हो जाता है। जहां किसी भी अमेरिकी कारवाही के बाद ईरान इस जानकारी की मदद से अमेरिकी बेसिस पर घातक हमलों को अंजाम दे सकता है। जिससे अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
थार्ड एक एडवांस एंटीबैलेस्टिक मिसाइल सिस्टम है जो दुश्मनों की बैलेस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह वायुमंडल के अंदर भी काम करता है और वायुमंडल के बाहर भी। अमेरिका के पास इसकी अब सिर्फ आठ बैटरीियां मौजूद हैं और इसमें इस्तेमाल होने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक भी अब अमेरिका के पास सीमित रह गया है। जॉर्डन का मुआफाक साल्टी बेस ईरान के बेहद करीब है और अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई भी कारवाई करता है तो उसे सबसे पहले मिडिल ईस्ट में मौजूद अपनी फौजों की रक्षा को मजबूत करना होगा।
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भारत और इजराइल के संबंध बेहद अच्छे हैं और इसी पर बात करते हुए इजराइली प्रधानमंत्री भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं। अपने इस भाषण में नेतन्याहू बात करते दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी महीने होने वाली इजराइल यात्रा की। दरअसल , नेतन्याहू का यह वीडियो सामने आया है जिसमें वह मन से कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि अगले हफ्ते यहां कौन आ रहा है? नरेंद्र मोदी इजराइल और भारत के बीच जबरदस्त गठबंधन है। भारत में इजराइल बेहद लोकप्रिय है। आपको याद दिला दें 2017 में पीएम मोदी की ऐतिहासिक इजराइल यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे दी थी। अब नेतन्याहू ने अपने बयान में यह भी कहा है कि कई देश हैं जो इजराइल के साथ रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं। जहां वो जर्मनी का जिक्र भी करते हैं। लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने भारत का नाम लिया उससे यह साफ है कि भारत उनके लिए सिर्फ एक साझेदार नहीं बल्कि एक स्ट्रेटेजिक पिलर बन चुका है।
कुछ अहम जानकारियां जानिए
प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा से दोनों देशों के बीच रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपने तीसरे कार्यकाल में इजराइल की यह पहली यात्रा होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2017 में इजराइल का दौरा किया था, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 25 साल पूरे होने का प्रतीक था। अपनी पिछली यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू ने रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर बातचीत की थी। इस बार, दोनों नेताओं के पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा करने की उम्मीद है।
भारत-इजराइल ने द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए
पिछले साल नवंबर में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की इजराइल यात्रा के दौरान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए संदर्भ शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, सितंबर में इजराइल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर हस्ताक्षर किए। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उसी वर्ष गोयल की यात्रा के दौरान, भारत और इजराइल ने रक्षा, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी साझाकरण संभव हो सकेगा।
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