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Vastu Shastra Tips: Vastu Tips के मुताबिक चांदी का सिक्का और धातु का कछुआ लाते हैं सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर की बनावट, दिशा और वहां मौजूद वस्तुओं का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि घर में रखी कुछ चीजें पॉजिटिव वातावरण बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। वहीं इनका संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। वहीं यह भी माना जाता है कि अगर शुभ वस्तुओं को सही स्थान पर रखा जाए, तो घर में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं इसके साथ ही धन, करियर और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में पॉजिटिव परिणाम मिल सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको वास्तु शास्त्र की दृष्टि से घर में रखना बेहद शुभ माना जाता है।

चांदी का सिक्का

धार्मिक परंपराओं में चांदी को पवित्र और शुभ माना जाता है। वास्तु के मुताबिक घर में चांदी का सिक्का रखने से सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रह सकता है। इसका संबंध मां लक्ष्मी और चंद्रमा से माना जाता है। वहीं अगर आप चांदी के सिक्के को पूजा स्थान या फिर तिजोरी में रख सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में आर्थिक समृद्धि का मार्ग मजबूत होता है और धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।

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गुलाब का पौधा

गुलाब को सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुलाब का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है। वास्तु के मुताबिक घर में गुलाब का पौधा लगाने से सकारात्मकता बढ़ती है और इसको बालकनी, छत या किसी ऐसे स्थान पर लगाया जा सकता है, जहां पर इस पौधे को पर्याप्त धूप मिल सके। गुलाब का पौधा आर्थिक स्थिति और करियर से जुड़े मामलों में अच्छा और शुभ प्रभाव ला सकता है।

धातु का कछुआ

वास्तु के मुताबिक कछुए को शुभता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। घर में पीतल या चांदी से बना कछुआ रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसका संबंध भगवान श्रीहरि के कच्छप अवतार से भी जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि धातु का कछुआ करियर में प्रगति के लिए और परिवार के सदस्यों में सामंजस्य बनाए रखने में सहायक होता है।

हल्दी की गांठ

हल्दी का संबंध देवगुरु बृहस्पति और भगवान श्रीहरि से माना जाता है। इस कारण पूजा-पाठ में हल्दी का विशेष महत्व होता है। वास्तु मान्यता के मुताबिक घर में हल्दी की गांठ को रखने से सुख-समृद्धि और वैभव आता है। इसको पूजा स्थान में रखा जा सकता है। वहीं गुरुवार के दिन हल्दी से जुड़े धार्मिक उपाय करना शुभ माना जाता है।

कौड़ियां

इनको मां लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है और धन-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। घर की तिजोरी या फिर पूजा स्थान पर पांच कौड़ियां रखना शुभ माना जाता है। इनको मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर पूजा करने की परंपरा है। वास्तु के मुताबिक इससे घर में आर्थिक समृद्धि और पॉजिटिविटी आती है।

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Shardiya Navratri Day 3: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र और आरती

शारदीय नवरात्रि का पर्व चल रहा है। हर जगह नवरात्रि की धूम और उत्साह देखने को मिल रही है। नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। इस दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरुप साहस, शक्ति, शांति और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करनें वाली देवी मानी जाती है। उनका यह स्वरुप दुष्टों के लिए कठोर है, वहीं भक्तों के लिए करुणा और ममता से भरा हुआ है। देवी मां की विधिवत रुप से पूजा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सुख-शांति बनीं रहती है। आइए नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र, आरती और उनकी पौराणिक कथा।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

- नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

- फिर पूजा स्थल की सफाई करके मां चंद्रघंटा का ध्यान करें।

- पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर और संकल्प लेकर की जा सकती है।

- मां को लाल या पीले फूल अर्पित करें।

- अब कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप से विधिपूर्वक पूजन करें।

- देवी को फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।

- मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

- आखिर में देवी मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें।

- पूजा करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक देवी का स्मरण करें।

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बने पकवान अर्पित करें। आप चाहे तो देवी मां को खीर का भोग लगा सकते हैं। केसर, इलायची और मेवों से तैयार खीर भी प्रसाद के तौर पर चढ़ा सकते हैं। साथ ही आप दूध से बनीं हुई मिठाइयां और मौसमी फल को अर्पित कर सकते हैं। भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और प्रसाद को परिवार तथा अन्य भक्तों में बांटें। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से देवी मां की कृपा प्राप्त होती है।

मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने स्वर्गलोक पर अधिकार करने का प्रयास किया, जिससे सभी देवता चिंतित हो उठे। असुर के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से सहायता मांगी।

देवताओं की पीड़ा सुनकर त्रिदेवों सहित अन्य देवताओं के तेज से एक दिव्य देवी का प्राकट्य हुआ। सभी देवताओं ने देवी को अपनी शक्तियों के अनुरूप अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र और इंद्रदेव ने घंटा दिया। अन्य देवताओं ने भी उन्हें दिव्य शक्तियां प्रदान कीं।

अनेक अस्त्रों और दिव्य तेज से संपन्न देवी ने महिषासुर को युद्ध के लिए चुनौती दी। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंततः देवी ने महिषासुर का अंत करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। इस कथा के माध्यम से देवी के पराक्रम, धर्म की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश मिलता है।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।

कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।

मां चंद्रघंटा मंत्र

ऐं श्रीं शक्तयै नम:

चंद्रघंटा स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

प्रार्थना मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

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