CEC Gyanesh Kumar का इस्तीफा मांगा, INDIA Bloc ने Chennai में किया प्रदर्शन
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ टीवीके, उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य घटक दलों ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ के लिये मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को चेन्नई में प्रदर्शन शुरू किया। टीवीके, उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य घटक दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन में भाग लिया। वीसीके के संस्थापक थोल थिरुमावलवन ने एसआईआर को द्रमुक की चुनावी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।
वह अप्रैल में हुए चुनावों के बाद द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होकर टीवीके सरकार का समर्थन करने लगे थे। उन्होंने कहा, ‘‘द्रमुक को लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने और चुनावी हेरफेर की एक सुनियोजित प्रक्रिया के जरिये हराया गया।’’ उन्होंने संकेत दिया कि तत्कालीन सत्तारूढ़ दल को चुनाव में नुकसान पहुंचाने के लिए खास लोगों को निशाना बनाया गया था। बृहस्पतिवार को हुए प्रदर्शन का नेतृत्व तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख बी मणिकम टैगोर ने किया।
इसमें टीवीके की ओर से स्कूल शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने प्रतिनिधित्व किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ‘इंडिया’ गठबंधन के कार्यकर्ता जुटे। उन्होंने अपनी-अपनी पार्टियों के झंडे लहराए और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सीईसी के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।
प्रदर्शन में विभिन्न वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं, विशेषकर मुस्लिमों, आदिवासी समूहों और वंचित समुदायों के लोगों के नाम व्यवस्थित तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अकेले तमिलनाडु में 97 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से संविधान कमजोर होता है और यह ‘‘लोकतंत्र का संहार’’ है।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि चुनावी प्रक्रिया में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में हेरफेर किया जा रहा है। उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनुचित तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल करने की मांग की। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ अपनी पार्टी के लंबे समय से चले आ रहे रुख और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराया।
वीसीके सांसद थिरुमावलवन ने कहा कि अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में द्रमुक की हार ‘‘स्वाभाविक हार नहीं थी।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाकर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग ने मिलकर ‘‘वोटों की चोरी’’ की और ‘‘साजिश’’ रची। प्रदर्शन में शामिल थिरुमावलवन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘वोटों की सुनियोजित चोरी हुई और सत्तारूढ़ सरकार तथा निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की साजिश रची।
मतदाताओं के नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, दूसरी जगह दर्ज या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों के तहत हटाए जा रहे हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के एसआईआर का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों, अल्पसंख्यक समुदायों और वंचित समूहों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन में एमडीएमके के संस्थापक वाइको और माकपा तथा भाकपा के प्रदेश सचिव पी शनमुगम और एम वीरापांडियन सहित अन्य नेता भी शामिल हुए।
Varunastra और GSAT-7C से बढ़ेगी सैन्य ताकत, एंटी-सबमरीन व संचार क्षमता के लिए 4,106 करोड़ का करार
रक्षा मंत्रालय (MoD) ने भारत के सैन्य संचार नेटवर्क और पानी के भीतर युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लगभग 4,106 करोड़ रुपये के दो बड़े रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए GSAT-7C संचार उपग्रह और भारतीय नौसेना के लिए 'वरुणास्त्र' हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद शामिल है, जिससे स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। ये अनुबंध गुरुवार (15 अक्टूबर) को नई दिल्ली में रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबारासु की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किए गए। इन दोनों समझौतों का उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाना है। साथ ही, ये सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक-इन-इंडिया' पहलों के तहत महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों में आत्मनिर्भरता लाने की कोशिशों को भी आगे बढ़ाते हैं।
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रक्षा मंत्रालय ने GSAT-7C सैटेलाइट क्षमता के लिए बेंगलुरु की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) को 2,563 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया है। स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित यह सैटेलाइट भारतीय वायु सेना के संसाधनों के बीच सुरक्षित और निर्बाध संचार को मजबूत करेगा। सैन्य अभियानों में तालमेल बिठाने और वायु सेना के विभिन्न प्लेटफॉर्मों के बीच कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित संचार बहुत महत्वपूर्ण है। GSAT-7C क्षमता का उद्देश्य एक अधिक मजबूत संचार नेटवर्क प्रदान करना है, जिससे भारतीय वायु सेना को अपने परिचालन समन्वय और प्रभावशीलता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह अनुबंध देश के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंतरिक्ष और संचार तकनीकों को विकसित करने और बनाने के भारत के प्रयासों को भी मजबूत करता है, जिससे महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम होती है।
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भारतीय नौसेना 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो हासिल करेगी
एक अलग समझौते में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 'वरुणास्त्र' हेवीवेट टॉरपीडो की आपूर्ति हेतु हैदराबाद की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 1,543 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। 'वरुणास्त्र' एक स्वदेशी, जहाज से लॉन्च किया जाने वाला एंटी-सबमरीन (पनडुब्बी-रोधी) टॉरपीडो है, जिसे नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी द्वारा विकसित किया गया है। दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए इस हथियार में बेहतरीन पैंतरेबाज़ी (manoeuvring) की क्षमता है और यह लंबी दूरी से भी दुश्मन की पनडुब्बियों को अपना निशाना बना सकता है। इस खरीद से नौसेना की एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है, जो समुद्री सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जहाज से लॉन्च किए जाने वाले टॉरपीडो नौसैनिक जहाजों को पानी के भीतर मौजूद खतरों से निपटने में सक्षम बनाते हैं। ये दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के अभियानों में एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होते हैं।
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