Responsive Scrollable Menu

मस्क ने दबाया किल स्विच बटन, चीख पड़ा यूक्रेन, सही निकला भारत का अनुमान!

पिछले कुछ महीनों और सालों में इस बात पर कितनी तीखी बहस छिड़ी हुई थी कि भारत में विदेशी सेटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को तुरंत एंट्री क्यों नहीं दी जा रही है? लगातार यह सवाल पूछे गए, दबाव बनाए गए कि आखिर भारत अपनी क्लीयरेंस प्रक्रिया को इतना कड़ा क्यों रखे हुए? उस समय भारत के सुरक्षा हल्कों और नीति निर्माताओं का सिर्फ एक ही बुनियादी तर्क था। राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है। डाटा का नियंत्रण और आपात स्थिति में नेटवर्क का स्विच किसके हाथ में होगा? यह सबसे बड़ा सुरक्षा सवाल था और आज यूक्रेन के रणक्षेत्र से जो तकनीकी और सामरिक रिपोर्ट सामने आई है, उन्होंने इस बात को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। यूक्रेन के फ्रंट लाइन से आ रही रिपोर्ट बताती है कि 160 कि.मी. प्रति घंटे से अधिक रफ्तार पर चलने वाले टर्मिनल्स की कनेक्टिविटी अचानक बाधित हो गई। इसका सीधा असर वहां के आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन और काउंटर ड्रोन रक्षा प्रणालियों पर पड़ा है।

इसे भी पढ़ें: ये संयोग या प्रयोग! इधर ट्रंप ने पुतिन से हाथ मिलाया, उधर यूक्रेन में स्टारलिंक की रफ्तार पर मस्क ने ताला लगाया

आधुनिक युद्ध अब सिर्फ पारंपरिक हथियारों का खेल नहीं रहा है। आज का कॉम्बैट पूरी तरह से डिजिटल नेटवर्क, हाई स्पीड, डाटा, ट्रांसमिशन और रियल टाइम कोऑर्डिनेशन पर टिका हुआ है। यूक्रेन में पिछले दो सालों से सेटेलाइट इंटरनेट की भूमिका एक जीवन रेखा यानी कि लाइफ लाइन की तरह है। अब पहली बात है इसकी आर्टिलरी कोऑर्डिनेशन। जी हां, तोपखाने की गोलेबारी सटीक बैठी या फिर नहीं। कोऑर्डिनेट्स में बदलाव करना है। यह सब ड्रोन से मिली लाइव वीडियो फीड के जरिए तय होता है। दूसरी बात कमांड एंड कंट्रोल। जी हां, जमीन पर तैनात इनफेंट्री यूनिट्स अपने बेस कमांड सेंटर से रियल टाइम संचार के लिए इसी नेटवर्क का उपयोग करती है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बात एफपीवी और इंटरसेप्टर ड्रोन। जी हां, आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन के टैंकों और ठिकानों को तबाह करने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इन मोशन टर्मिनल्स पर स्पीड लिमिट या कैप लगा दी गई है। अब जैसे ही ड्रोन या टर्मिनल की गति 160 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक होती है, कनेक्शन ड्रॉप हो जाता है। अब इसका सीधा असर देखिए किस पर पड़ता है। इसका पहला असर पड़ता है ऑफेंसिव ऑपरेशन का धीमा होना। जी हां, आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से बचने के लिए ड्रोंस को बहुत तेजी से उड़ना पड़ता है। धीमी गति का मतलब है कि दुश्मन का रडार और एयर डिफेंस उन्हें आसानी से मार गिराएगा। दूसरा है डिफेंसिव इंटरसेप्टर का बेकार होना। जी हां, जब दुश्मन के जेट पावर्ड या तेज गति वाले ड्रोंस हमला करते हैं तो उन्हें हवा में ही टकराने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोंस की रफ्तार 200 से 400 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। लेकिन अगर 160 किमी/ घंटे पर ही सिग्नल कट जाए तो ये इंटरसेप्टर हवा में ही दिशाहीन होकर गिर पड़ेंगे। यानी कि बिना किसी भौतिक हमले के सिर्फ सॉफ्टवेयर और नेटवर्क लेवल पर एक बदलाव ने पूरी सैन्य क्षमता को प्रभावित कर दिया है। 

इसे भी पढ़ें: CJP को विदेशी फंडिंग के आरोपों पर MEA ने दिया जवाब, Saudi Arabia पर हमले की निंदा की, Canada पर भी दिया बड़ा बयान


इस घटना ने पूरी दुनिया के सामने तीन कड़े भू राजनीतिक सबक रख दिए हैं। पहला किल स्विच का भूगोल। तकनीक कितनी भी एडवांस खरीद लें अगर उस तकनीक का नियंत्रण केंद्र और सर्वर आपकी सीमा से बाहर है तो संप्रभुता सिर्फ कागजों पर रह जाती है। अब विदेशी कंपनियों के साथ समस्या यह होती है कि उनके सर्वर, उनके सेटेलाइट गेटवे और उनकी नीतियां, उनकी अपनी घरेलू सरकार और अपने व्यवसायिक हितों से बंदी होती है। संकट के समय अगर आपको कहा जाए कि नियमों में बदलाव हो गया तो आपके पास बातचीत करने का समय नहीं बचता है। विदेश नीति में यह समझना बेहद जरूरी है कि व्यवसायिक साझेदारियां कभी भी स्थाई सैनिक गारंटी नहीं होती हैं। जब वैश्विक राजनीति में समीकरण बदलते हैं, जब चुनावी मौसम आते हैं या जब व्यापारिक प्राथमिकताओं में टकराव होता है तो सबसे पहले दबाव तकनीकी सप्लाई चेन पर बनाया जाता है। कल तक जो तकनीक आपकी सबसे बड़ी ताकत थी वो एक झटके में आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है। कोई भी बहुद्रवी कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो वो अंततः अपने सबसे बड़े ग्राहकों अपने घरेलू रक्षा विभागों और अपने शेयर धारकों के प्रति जवाबदेह होती है। किसी दूसरे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा हित उनके लिए प्राथमिकता नहीं हो सकते हैं। चलिए अब जानते हैं भारत की दूरदर्शिता और आत्मनिर्भरता का मॉडल।
 

Continue reading on the app

Why Pakistan Imploded | आज भारत Top 5 इकोनॉमी और पाकिस्तान कंगाल क्यों? | Globmaster

कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास कभी भुला नहीं सकता। भारत विभाजन के ठीक पहले एक अस्थाई सरकार बनी थी। जिसके प्रधानमंत्री थे जवाहर लाल नेहरू। इस सरकार के फाइनेंस मिनिस्टर थे लियाक़त अली खान और ये सरकार कांग्रेस-मुस्लिम लीग के लिए आखिरी मौका थी, पार्टीशन रोकने के लिए। पर ऐसा हुआ नहीं। दोनों एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते रहे। लियाकत पर इल्जाम लगता था कि फाइनेंस मिनिस्टर की हैसियत से वो किसी भी मंत्रालय को पैसा ही नहीं रिलीज करते थे। 16 अगस्त 1946 की एक तारीख हिन्दुस्तान की आजादी के इतिहास की ऐसी ही तारीख है जिसने बंटवारे की हकीकत पर मुहर लगा दी। मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में अपने स्वार्थ के लिए एक धड़े ने भारत को बांटने का दावा पेश कर दिया था। उनकी मांग थी पश्चिम के पेशावर से लेकर पंजाब के अमृतसर और कोलकाता समेत एक अलग राष्ट्र जो सिर्फ मुसलमानो के लिए बनेगा और जिसका नाम होगा पाकिस्तान। नतीजतन 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना और लियाकत अली खान इसके पहले प्रधानमंत्री बने। दोनों देश अलग एक साथ हुए और लगभग एकसाथ ही आगे बढ़े। लेकिन आज भारत कहां खड़ा है और पाकिस्तान की हालात तो किसी से भी छुपी नहीं है। दोनों देशों को आजादी एक साथ मिली। लेकिन एक बन गया दुनिया का महानतम देश और दूसरा बर्बाद, तबाह और दुनिया के लिए आतंक का अड्डा। 79 साल पहले बंटवारे के साथ ही भारत के भू-भाग पर ऐसी लकीर खीची जिसने जमीन, जंगल, लोग यहां तक की विचारों को भी बांट दिया। भारत और पाकिस्तान ने बंटवारे के बाद अपनी-अपनी नीति और नियती चुनी। लीकरों से शुरू हुआ खेल तकदीरों तक कितना पहुंचा।

इसे भी पढ़ें: Israel Airspace: पाकिस्तान समेत 24 से अधिक देशों के पायलटों और क्रू पर लगा प्रतिबंध

पाकिस्तान में लालच तंत्र की शुरुआत


हजारों वर्षों की विरासत, सैकड़ों सालों की गुलामी से मुक्ति, विशाल आबादी, अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं में बंटा देश। आजादी के साथ ही भारत की जिम्मेदारी जितनी बड़ी थी। मजहब के नाम पर एक टुकड़ा लेकर अलग होने वाले पाकिस्तान का लालच उतना ही अधिक था। भारत की कुल रकम का 17.5 फीसदी पैसा पाकिस्तान को दिया गया। पाकिस्तान को अपना आधा अधूरा संविधान बनाने में 26 साल लग गए। जिन्ना की मौत पाकिस्तान निर्माण के 13 महीने बाद ही हो गई। कई रिपोर्ट्स में लिखा भी है कि जिन्ना के आखिरी शब्द थे कि पाकिस्तान बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी। जिन्ना की मौत के साथ ही पाकिस्तान में सत्ता का लालच सिर चढ़कर बोलने लगा। पाकिस्तान का पहला चुनाव इससे पंजाब प्रांत में मार्च 1951 में हुआ। इस दौरान भी जनता ने सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया। बल्कि चुनिंदा लोगों ने ही वोट डाले। बाद में पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 1958 तक पाकिस्तान में 8 प्रधानमंत्री अधूरे कार्यकाल के साथ अलविदा हो चुके थे। 

सेक्युलरिज्म को संविधान में जगह


भारत इस नए मुल्क के निर्माण का सबसे बड़ा सूत्रधार था। लड़ाई खत्म होने के बाद शेख मुजीब की आवामी लीग ने सरकार बनाई। शेख मुजीब आजाद बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री बने। 1971 में जब देश  बना तो उसने खुद को एक सेक्युलर देश के रूप में उद्घोषित किया। ये साउथ एशिया का पहला मुस्लिम बहुसंख्यक देश था जिसने सेक्यूलरिज्म को अपने संविधान में जगह दी। शेख मुजीब कहा करते थे मुस्लिम अपने धर्म का पालन करे। हिन्दू, बौद्ध, ईसाई अपने धर्म का पलान करे। हम सिर्फ धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध करेंगे। शेख मुजीब को प्यार से लोग बंग बंधु भी करते थे। बंग बंधु को बांग्लादेश का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है। 


पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट की शुरुआत


साल 1958 में पाकिस्तान में पहली बार तख्तापलट हुआ था। उस वक्त पाकिस्तानी आर्मी ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को बढ़ावा दिया। पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्ज़ा ने पाकिस्तानी संसद और प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को भंग कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने देश में मार्शल लॉ लागू कर आर्मी कमांडर इन चीफ जनरल अयूब खान को देश की सत्ता सौंप दी। तेरह दिन बाद ही अयूब खान ने तख्तापलट करते हुए देश के राष्ट्रपति को पद से हटा दिया था और खुद नए राष्ट्रपति बन गए थे। 

Continue reading on the app

  Sports

IND W vs ZIM W: जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में टीम इंडिया को क्या मिलेगा? शेफाली वर्मा ने बताया प्लान

India vs Zimbabwe Women 1st T20I: भारत और जिम्बाब्वे के बीच पहला टी20 मैच 16 अक्टूबर को खेला जाएगा. रायपुर में खेला जाएगा मैच. Thu, 15 Oct 2026 19:20:41 +0530

  Videos
See all

Jio IPO 2026: Jio के IPO को लेकर निवेशकों में गजब का उत्साह | Investments | Jio Platforms #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-15T14:10:31+00:00

AAJTAK 2 LIVE | DELHI RAIN | WEATHER UPDATE | झमाझम बारिश का बड़ा अलर्ट जारी | AT2 LIVE #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-15T14:08:00+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers