Wipro का Q2 Net Profit 1.4 प्रतिशत घटकर 3201 करोड़ रुपये रहा, Revenue में बढ़त
देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो के वित्तीय नतीजे मिले-जुले रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 1.4% घटकर 3,201 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, पहली तिमाही के मुकाबले मुनाफे में 4.7% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, कंपनी की कुल आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी हुई है।
विप्रो ने गुरुवार को जारी नतीजों में बताया कि जुलाई से सितंबर 2026 की अवधि में उसकी कुल आय 9.1% बढ़कर 24,752.7 करोड़ रुपये पहुंच गई। हालांकि, तिमाही आधार पर आय में 1.1% की कमी आई है। कंपनी के आईटी सेवा कारोबार से होने वाली आय सालाना आधार पर 0.3% बढ़कर 2,611.5 मिलियन डॉलर रही। स्थिर मुद्रा के आधार पर इस कारोबार की आय में सालाना 0.6% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछली तिमाही के मुकाबले यह लगभग स्थिर रही।
कंपनी के नए कारोबार से जुड़े आंकड़ों में कमजोरी दिखाई दी। दूसरी तिमाही में कुल नए सौदों का मूल्य 2,595 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले स्थिर मुद्रा के आधार पर 22.9% कम है। बड़े सौदों का मूल्य भी 58.6% गिरकर 674 मिलियन डॉलर रह गया। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी को नए कारोबार हासिल करने के मामले में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कारोबार का परिचालन लाभ मार्जिन 16.5% रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अंक कम है, लेकिन पिछली तिमाही से 0.5 प्रतिशत अंक बेहतर रहा। प्रति शेयर आय सालाना आधार पर 4.2% बढ़कर 3.23 रुपये हो गई। तिमाही आधार पर इसमें 0.9% की बढ़त दर्ज की गई।
कंपनी के नकदी प्रवाह में अच्छी मजबूती दिखाई दी। दूसरी तिमाही में परिचालन से 5,300 करोड़ रुपये की नकदी आई, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 61.3% अधिक है। यह तिमाही के शुद्ध मुनाफे का 165.8% रही। वहीं, पिछले 12 महीनों के आधार पर स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर 13.8% दर्ज की गई।
विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक श्रीनी पल्लिया ने कहा कि कंपनी के रणनीतिक निवेशों से नए बाजारों में पहुंच बनाने, नए ग्राहक जोड़ने और मौजूदा ग्राहकों के साथ कारोबार बढ़ाने में मदद मिल रही है। उनके मुताबिक, परामर्श सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित रणनीति से बड़े बदलाव वाले नए काम मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आने वाले समय में तकनीकी और कारोबारी बदलाव का अहम आधार बताया।
मुख्य वित्त अधिकारी अपर्णा अय्यर ने कहा कि कारोबार और कर्मचारियों में निवेश जारी रहने के बावजूद कंपनी ने अपना परिचालन लाभ मार्जिन बढ़ाकर 16.5% किया है। उन्होंने नकदी प्रवाह को भी मजबूत बताया।
वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही के लिए कंपनी ने आईटी सेवा कारोबार से 2,571 मिलियन डॉलर से 2,625 मिलियन डॉलर तक की आय का अनुमान दिया है। यह स्थिर मुद्रा के आधार पर पिछली तिमाही के मुकाबले 1.5% की गिरावट से लेकर 0.5% की बढ़त तक हो सकता है।
शेयर बाजार में गुरुवार को विप्रो का शेयर 1.82% बढ़कर 174.05 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, साल की शुरुआत से अब तक इसमें करीब 35% की गिरावट आ चुकी है। मौजूदा भाव पर कंपनी का कुल बाजार मूल्य करीब 1,72,402 करोड़ रुपये है। निवेशकों की नजर अब कंपनी की आय, नए सौदों और एआई से मिलने वाले कारोबार पर टिकी है।
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और आईटी, बैंकिंग तथा उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,534 अंक यानी 2.11% की बढ़त के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 375 अंक यानी 1.66% चढ़कर 22,997.35 पर पहुंच गया। बाजार में इस तेजी के पीछे कई अहम कारण रहे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में कमी और रुपये का मजबूत होना प्रमुख हैं।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को 1 डॉलर से ज्यादा गिर गईं। निवेशक एक ओर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से तेल की ढुलाई का खर्च कम करने के प्रयासों का भी असर दिखा। अमेरिका ने कुछ जहाजों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने की दिशा में कदम उठाए हैं।
ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 1.76 डॉलर यानी 1.75% गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 1.02 डॉलर यानी 1.07% घटकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल सस्ता होने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ती है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हो सकती है।
इस बीच सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी बनी रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। कंपनियों के बेहतर नतीजों और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण निवेशकों का रुख भारतीय आईटी शेयरों की ओर बढ़ा।
हालांकि, वैश्विक बाजारों से संकेत कमजोर रहे। अमेरिका में सितंबर की महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहने के बाद एशियाई बाजारों में गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7% फिसला, जबकि जापान का निक्केई 225 भी 1.3% नीचे रहा। अमेरिका के शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट दर्ज की गई, जहां एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सुधार भारतीय बाजार के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनका मानना है कि भारतीय शेयर बेचकर इन कंपनियों में निवेश कर रहे विदेशी संस्थागत निवेशक अपनी रणनीति बदल सकते हैं। आगामी बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की समीक्षा के संकेत भी बाजार को सहारा दे सकते हैं।
रुपये की मजबूती ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। गुरुवार को रुपया शुरुआती कारोबार में 0.2% मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 94.92 पर पहुंच गया। पिछले सप्ताहांत भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए थे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इन उपायों का असर फिलहाल सीमित समय तक रह सकता है और वैश्विक दबाव बने रहने की आशंका है।
कुल मिलाकर, तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को राहत मिली है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक महंगाई और कच्चे तेल की आगे की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
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