अब इस टीम का कप्तान हुआ T20 World Cup 2026 से बाहर, जानिए किस 20 साल के बल्लेबाज ने किया रिप्लेस
T20 World Cup 2026: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में आयरलैंड और जिम्बाब्वे की टीमों को बड़ा झटका लगा है. इन दोनों टीमों के खिलाड़ी चोट के चलते वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं. आयरलैंड ने तो अपने कप्तान को ही खो दिया है. उनकी जगह पर टीम में 20 साल के खिलाड़ी को शामिल किया गया है. ये दोनों खिलाड़ी कौन हैं जो बाहर हुए हैं और इनकी जगह पर कौन स्क्वाड में शामिल हुए हैं, आइए जानते हैं.
कप्तान को घुटने में लगी गंभीर चोट
आयरलैंड के कप्तान पॉल स्टर्लिंग के घुटने में लिगामेंट डैमेज हो गया है और वो आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाकी मैच नहीं खेल पाएंगे. बुधवार को ऑस्ट्रेलिया से आयरलैंड की 67 रन की हार के दौरान कैच लेते समय स्टर्लिंग के दाहिने घुटने में चोट लग गई थी और अनुभवी कप्तान ने उसी मैच में बैटिंग के लिए क्रीज पर लौटते समय एक तेज सिंगल लेने की कोशिश में एक बार फिर घुटने को और खराब कर दिया.
20 वर्षीय खिलाड़ी ने स्टर्लिंग को किया रिप्लेस
टी20 वर्ल्ड कप इवेंट टेक्निकल कमेटी ने स्टर्लिंग के रिप्लेसमेंट खिलाड़ी को मंजूरी दे दी है, जिसमें अनकैप्ड युवा खिलाड़ी सैम टॉपिंग तुरंत आयरलैंड की 15-खिलाड़ियों की टीम में शामिल हो गए हैं. टॉपिंग बाएं हाथ के ओपनिंग बैट्समैन हैं, जिन्होंने पिछले साल अबू धाबी में अफगानिस्तान A के खिलाफ चार दिन के मैच में आयरलैंड A के लिए खेला था. आयरलैंड के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर ग्रीम वेस्ट ने कहा कि, स्टर्लिंग का एक्सपीरियंस खोना एक बहुत बड़ा झटका था, हालांकि उन्हें टॉपिंग से रिप्लेसमेंट के तौर पर बहुत उम्मीदें हैं.
A big blow for Ireland at the #T20WorldCup with injury forcing their captain to be replaced ????
— ICC (@ICC) February 13, 2026
Details ????https://t.co/e7XP4HEtj7
जिम्बाब्वे को भी लगा बड़ा झटका
इस बीच जिम्बाब्वे को भी अपनी स्क्वाड में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसमें चोटिल अनुभवी ब्रेंडन टेलर की जगह बेन कुरेन को 15-प्लेयर ग्रुप में शामिल किया गया है.
आयरलैंड का स्क्वाड: मार्क अडायर, रॉस अडायर, बेन कैलिट्ज़, कर्टिस कैंपर, गैरेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, मैथ्यू हम्फ्रीज़, जोश लिटिल, बैरी मैकार्थी, हैरी टेक्टर, टिम टेक्टर, लोर्कन टकर, सैम टॉपिंग, बेन व्हाइट, क्रेग यंग.
जिम्बाब्वे का स्क्वाड: सिकंदर रज़ा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, ग्रीम क्रेमर, बेन करन, ब्रैडली इवांस, क्लाइव मडांडे, टिनोटेंडा मापोसा, तदिवानाशे मारुमानी, वेलिंगटन मसाकाद्ज़ा, टोनी मुनयोंगा, ताशिंगा मुसेकिवा, ब्लेसिंग मुज़राबानी, डियोन मायर्स, रिचर्ड नगारवा.
ये भी पढ़ें : ब्लेसिंग मुजारबानी ने रचा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 विकेट लेकर जिम्बाब्वे के लिए हासिल की खास उपलब्धि
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पति-पत्नि के विवाद में व्हाट्सएप और कॉल रिकॉर्डिंग अब होंगे पक्के सबूत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ कर दिया है कि पति-पत्नी के झगड़ों या तलाक के केस में अब व्हाट्सएप चैट और फोन की कॉल रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने माना कि आज के दौर में मोबाइल डेटा सच को सामने लाने का एक बहुत बड़ा जरिया है.
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का है. एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी दी थी. पति का कहना था कि उसकी पत्नी के किसी और के साथ अवैध संबंध हैं. इस बात को साबित करने के लिए उसने कोर्ट से पत्नी के व्हाट्सएप चैट और फोन रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर पेश करने की इजाजत मांगी थी.
पत्नी की दलील और निजता का सवाल
पत्नी ने पति की इस मांग का कड़ा विरोध किया. उसका कहना था कि पति ने उसका फोन हैक करके ये सारा डेटा निकाला है, जो कि उसकी 'प्राइवेसी' (निजता के अधिकार) का सीधा उल्लंघन है. जब फैमिली कोर्ट ने पति के हक में फैसला सुनाया, तो पत्नी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी.
प्राइवेसी बनाम निष्पक्ष सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले में बहुत ही व्यवहारिक स्टैंड लिया. कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार बहुत जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सच छिपाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाए. अदालत ने कहा कि केस की 'निष्पक्ष सुनवाई' का हक भी उतना ही जरूरी है. अगर मोबाइल के मैसेज या कॉल रिकॉर्डिंग से सच सामने आ सकता है, तो उन्हें सिर्फ प्राइवेसी के नाम पर नहीं रोका जा सकता.
फैमिली कोर्ट की विशेष शक्तियां
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट के पास कानून (धारा 14) के तहत कुछ खास ताकतें होती हैं. इसके मुताबिक, अगर कोई चीज केस को सुलझाने या सच तक पहुंचने में मदद करती है, तो कोर्ट उसे सबूत मान सकता है. भले ही उस सबूत को जुटाने का तरीका पूरी तरह सही न हो, लेकिन अगर वह जानकारी सही है, तो कोर्ट उसे स्वीकार कर सकता है.
ये भी पढ़ें- Rajpal Yadav Case: राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली कोई राहत, जानें कब होगी अगली सुनवाई?
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















