पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों को लेकर चल रहे विवाद के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों के लिए पुस्तक लेखन संबंधी नए दिशानिर्देश लाने के किसी प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है। एएनआई से बात करते हुए सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से ही नियम और कानून मौजूद हैं, जिनमें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) भी शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य मुद्दा दिशानिर्देशों का अभाव नहीं है, बल्कि यह है कि क्या किसी मौजूदा नियम का उल्लंघन किया गया है।
राजेश कुमार सिंह ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो, मुझे इस विशेष मुद्दे की जानकारी नहीं है जिसका आप जिक्र कर रहे हैं कि क्या नए दिशानिर्देशों पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा दिशानिर्देश हैं और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम लागू होता है। इस मामले में मुद्दा यह नहीं है कि दिशानिर्देश मौजूद नहीं हैं; मुद्दा यह है कि क्या किसी ने उनका उल्लंघन करने की कोशिश की है। सार्वजनिक सूत्रों से मुझे पता चला है कि एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। हालांकि, मुझे किसी नए दिशानिर्देश की जानकारी नहीं है, और वैसे भी, संवेदनशील मामलों में मौजूदा दिशानिर्देश और मौजूदा कानून, विशेष रूप से ओएसए, लागू होते हैं।
यह घटना तब सामने आई जब राहुल गांधी ने लोकसभा में जनरल नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का हवाला देने की कोशिश की, जिससे बजट सत्र के दौरान चीन के साथ 2020 के गतिरोध का मुद्दा चर्चा में आ गया और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। दिल्ली पुलिस ने 9 फरवरी को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार मंचों पर मिली जानकारी का संज्ञान लिया, जिसमें दावा किया गया था कि 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पुस्तक की एक प्री-प्रिंट प्रति प्रसारित की जा रही है। स्पेशल सेल ने "अभी तक स्वीकृत न हुई पुस्तक के कथित रिसाव/उल्लंघन" के संबंध में मामला दर्ज किया है।
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक के कथित रिसाव के संबंध में पेंगुइन इंडिया के अधिकारियों से लगातार दो दिनों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, दोनों दिन पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांचकर्ताओं ने पांडुलिपि और उसकी डिजिटल फाइलों के प्रबंधन और वितरण के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने संकेत दिया कि जांच आगे बढ़ने के साथ प्रकाशन गृह के प्रतिनिधियों को आने वाले दिनों में फिर से बुलाया जा सकता है।
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कभी बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोपों का सामना कर चुके तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। 2004 के ग्रेनेड हमले को लेकर उन पर साजिश रचने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में उन्हें अदालत से राहत मिल गई और अब सालों के निर्वासन के बाद वही तारिक रहमान सत्ता के सबसे ऊंचे पद तक पहुंचने की दहलीज पर खड़े हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक तारिक रहमान पर दर्जनों अपराधिक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों समेत लगभग 84 केस थे। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद कानूनी माहौल में काफी बदलाव देखा गया और 2026 की शुरुआत तक ज्यादातर बड़े मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया। इसमें 2004 में शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले का मामला भी शामिल है। जिसमें उन्हें 2018 में उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।
देश के इतिहास में यह पहली बार है, जब शेख हसीना की पार्टी चुनाव में नहीं है। यह अवामी लीग का अपना फैसला नहीं था, बल्कि उस पर थोपा गया। जो पार्टी बांग्लादेश की मुक्ति से लेकर अभी तक, उसके हर राजनीतिक-सामाजिक बदलाव की साक्षी रही है, उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर करना सही तो नहीं कहा जा सकता। बीएनपी या जमात सत्ता में जो भी आए, उसके ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी देश की जनता की ख्वाहिशों को पूरा करने की। अंतरिम सरकार आम लोगों में भरोसा जगाने में असफल रही है। चुनाव में बीएनपी की जीत तय मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है तो उसके सामने जनता की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती होगी।
BNP या जमात सत्ता में जो भी तरह के आरोप लगते हैं, तो तमाम तरह की शंकाएं सिर उठाएंगी। आए, उसके ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी देश की जनता की ख्वाहिशों को पूरा करने की। अंतरिम सरकार आम लोगों में भरोसा जगाने में असफल रही है। चुनाव में BNP की जीत तय मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है तो उसके सामने जनता की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती होगी।
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