Kochi Synagogue के पास आगजनी: आरोपी एबिन पॉल को पांच दिन की Police Custody
कोच्चि की एक अदालत ने केरलम के एर्णाकुलम मार्केट में एक यहूदी प्रार्थनास्थल के पास आगजनी के मामले में एक आरोपी को बृहस्पतिवार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। एर्णाकुलम के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिरामी ए. ने निकटवर्ती पुथेनक्रूज के निवासी एबिन पॉल (32) को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। याचिका की सुनवाई के दौरान पॉल के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह दवाएं ले रहा है।
वकील ने अनुरोध किया कि पुलिस हिरासत के दौरान पॉल को अपनी दवाएं लेने की अनुमति दी जाए। सरकारी अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपी के अन्य लोगों से संबंधों और अपराध के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। अभियोजक ने यह भी कहा कि पॉल कथित तौर पर मुवाट्टुपुझा में पुरानी कारों के एक शोरूम में इसी तरह की आगजनी की घटना में शामिल था।
उस मामले से संबंधित जानकारियां भी जुटाई जानी हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया और पुलिस को हर 48 घंटे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। यह घटना 12 अक्टूबर को तड़के करीब दो बजकर 30 मिनट पर हुई थी।
एर्णाकुलम मार्केट में कडवुभागम यहूदी प्रार्थनास्थल के सामने स्थित ब्लॉसम नर्सरी में आग लगा दी गई थी। यह इलाका कोच्चि सेंट्रल पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है। जांच के अनुसार, आरोपी नीले रंग की कार से घटनास्थल पर पहुंचा, वाहन से उतरा, नर्सरी पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी।
आरोप है कि वहां से भागने से पहले उसने अपने मोबाइल फोन से घटना का वीडियो भी बनाया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर निर्धारित ठिकानों को निशाना बनाता था, घटनाओं का वीडियो बनाता था और इसके बदले पैसे लेकर फुटेज भेजता था। पुलिस ने बताया कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किया जाता था।
आरोपी के फोन से मिले संदेशों में कथित तौर पर भारत के विभिन्न शहरों में यहूदी प्रार्थनास्थलों और उन पर हमलों का उल्लेख था। जांचकर्ता संदेशों के आदान-प्रदान में शामिल लोगों की पहचान, आरोपी के साथ उनके संबंधों और इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आगजनी किसी संगठित अभियान का हिस्सा थी। जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर एर्णाकुलम ग्रामीण पुलिस ने पुथेनक्रूज स्थित आरोपी के किराये के मकान की तलाशी ली और हेरोइन, फेंटानिल, ऑक्सीकोडोन, अल्प्राजोलम तथा केटामाइन सहित कई पदार्थ जब्त किए।
पुलिस ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियां भी इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संदेह से जुड़ी जानकारियों की जांच कर रही हैं।
CMRL मामले में Pinarayi Vijayan को झटका, केरल हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके रिश्तेदारों को झटका देते हुए केरल उच्च न्यायालय ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की उनकी याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की पीठ ने एकल न्यायाधीश के नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के आवेदन को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से पहले आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि अर्जियां खारिज होने के कारण उनकी अपील भी स्वतः खारिज हो जाती हैं।
उसने कहा कि नौ अक्टूबर के आदेश से ‘‘प्राथमिकी दर्ज किए जाने के विरुद्ध आवेदकों के संवैधानिक और कानूनी राहत मांगने के अधिकार प्रभावित नहीं हुए हैं।’’ अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी अपराध का संज्ञान लिए जाने से पहले तक प्राथमिकी रद्द कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की जा सकती है पीठ ने यह भी कहा कि संज्ञान लिए जाने के बाद, कार्यवाही को रद्द करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 (उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियां) का सहारा लिया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए यह स्पष्ट है कि संबंधित फैसले ने प्राथमिकी दर्ज करने के विरुद्ध आवेदकों के संवैधानिक या वैधानिक राहत के अधिकार को प्रभावित नहीं किया है और ऐसी स्थिति में यह नहीं माना जा सकता कि आवेदकों ने मांगी गई अनुमति देने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस दलील दी है।’’ अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 66(2) के तहत संज्ञेय अपराध का संकेत देने वाले पर्याप्त सबूत और जानकारी उपलब्ध कराता है, तो ऐसे मामले में प्रारंभिक जांच कराने की कोई जरूरत नहीं होती। पीठ ने दोहराया कि भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
विजयन, वीणा और रियास ने अपनी अपीलों में दावा किया था कि नौ अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से पहले एकल न्यायाधीश द्वारा उनका पक्ष नहीं सुना गया। यह अपील सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (वीएसीबी) की विशेष जांच इकाई-एक द्वारा सोमवार को कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले के संबंध में विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद दायर की गई थी। केरल उच्च न्यायालय ने नौ अक्टूबर को वीएसीबी को राज्य पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच और छापेमारी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि सीएमआरएल ने आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था।
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