प्रधानमंत्री ऑफिस आज सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा:PM करेंगे उद्घाटन; साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट मीटिंग रखी, यह 78 सालों तक सत्ता का केंद्र रहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, मोदी दोपहर करीब 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के नाम का अनावरण करेंगे। फिर शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करने के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कर्तव्य भवन-1 और 2 में केंद्र सरकार के मंत्रालयों के नए ऑफिस होंगे। वर्तमान में PMO और मंत्रालयों के ऑफिस नई दिल्ली स्थित सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में है। ये दोनों इमारतें करीब 78 सालों से देश की सत्ता का केंद्र रही हैं। शुक्रवार को यहां सरकार के कामकाज का आखिरी दिन होगा। सेवा तीर्थ में शिफ्ट होने से पहले PM मोदी साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक करेंगे। यह बैठक शुक्रवार शाम 4 बजे तय है। यह ब्रिटिश काल के सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में आखिरी कैबिनेट बैठक होगी। ₹1189 करोड़ की लागत से बना सेवा तीर्थ सेवा तीर्थ का मतलब है ‘सेवा का स्थान’। पहले इसका नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ रखा गया था, लेकिन 2 दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ रखा गया। यह नई दिल्ली में दारा शिकोह रोड पर एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में स्थित है। यह करीब 2.26 लाख वर्ग फीट (करीब 5 एकड़) में बना है। इसे एल एंड टी कंपनी ने ₹1189 करोड़ में बनाया है। सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में तीन इमारतें हैं- सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) है। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का ऑफिस है। ये सभी ऑफिस पहले अलग-अलग जगहों पर थे। कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ-2 में शिफ्ट हो चुका है। नए PMO के पास ही प्रधानमंत्री का नया आवास भी बन रहा है। इसके तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित मौजूदा आवास से नए आवास में शिफ्ट हो जाएंगे। हालांकि, अभी इसकी तारीख सामने नहीं आई है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त-रक्षा सहित कई मंत्रालय वहीं कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को जगह दी गई है। इससे पहले गृह मंत्रालय लुटियंस दिल्ली के रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ ब्लॉक परिसर से जनपथ में बनी कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग में शिफ्ट हो चुका है। गृह मंत्रालय को नए कॉम्प्लेक्स में 347 कमरे आवंटित किए गए हैं। करीब 90 सालों से देश का गृह मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से ही संचालित हो रहा था। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1, 2 का निर्माण सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। इसी प्रोजेक्ट के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ बनाए गए हैं। कर्तव्य पथ के दोनों तरफ के इलाके को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक कई इमारतों का री-डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन शामिल है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं कर्तव्य भवन-1 और 2 बिल्डिंग में डिजिटल तकनीकों से लैस ऑफिस, जनता से सीधे संपर्क के लिए पब्लिक एरिया और सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन की व्यवस्था है। सरकार का कहना है कि इससे मंत्रालयों के बीच तालमेल, कामकाज की स्पीड और लोगों की भागीदारी बेहतर होगी। बिल्डिंग्स को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, वाटर कन्जर्वेशन सिस्टम, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और एनर्जी एफिशिएंट कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स का इस्तेमाल किया गया है। इनसे पर्यावरण पर असर कम पड़ेगा और कामकाज की क्वालिटी बढ़ेगी। इन कैंपस में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस एमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं। इससे अधिकारियों और विजिटर्स के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित मौहाल रहेगा। 6 अगस्त 2025 : PM ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अगस्त 2025 को कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-3 बिल्डिंग का उद्घाटन किया था। इसमें गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, पेट्रोलियम और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के ऑफिस हैं। कर्तव्य भवन-3 कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की पहली बिल्डिंग है। CCS में कुल 10 ऑफिस बिल्डिंग और एक कन्वेंशन सेंटर शामिल है। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक बनेंगे नेशनल म्यूजियम सरकार की योजना है कि नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदला जाएगा। इसे विश्वस्तरीय म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां भारत की सभ्यता को दिखाया जाएगा। इसमें करीब 25 से 30 हजार कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। यह दुनिया के सबसे बड़े म्यूजियम्स में से एक होने की संभावना है। सरकार का दावा- पुराने बिल्डिंग्स में मेंटेनेंस खर्च ज्यादा सरकार के मुताबिक, कई दशकों से केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रालय और ऑफिस सेंट्रल विस्टा एरिया में अलग-अलग और पुराने बिल्डिंग में काम कर रहे थे। इससे कामकाज में तालमेल की दिक्कतें, संचालन में देरी, रखरखाव का बढ़ता खर्च और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण की कमी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। इसलिए नए बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के जरिए इन सभी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की गई है। अब प्रशासनिक कार्यों को एक ही जगह आधुनिक और भविष्य के अनुरूप सुविधाओं के साथ संचालित किया जाएगा। --------------------------------- सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें.. मोदी बोले- मंत्रालयों के लिए ₹1500 करोड़ किराया चुका रही सरकार, कर्तव्य भवन से यह परेशानी दूर होगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में दिल्ली में कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-03 बिल्डिंग का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि कर्तव्य भवन में विकसित भारत की नीतियां बनेंगी। ये सिर्फ इमारत नहीं, करोड़ों लोगों के सपनों को साकार करने की भूमि है। पीएम ने कर्तव्य भवन की जरूरत के बारे में बताया था कि 100 सालों से होम मिनिस्ट्री एक ही बिल्डिंग में है। कुछ मंत्रालय किराए की बिल्डिंग में हैं। सालाना 1500 करोड़ रुपए रेंट देना पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें…
कांग्रेस का कैप्टन को न्योता क्यों:2027 चुनाव से पहले पार्टी में गुटबाजी, 2 बार सरकार बनवाई; सोनिया गांधी के कहने पर पहले भी आ चुके
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह की याद आ गई है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने गुरूवार को कहा कि कैप्टन अगर कांग्रेस में आना चाहें तो हाईकमान विचार कर सकता है। बघेल के इस बयान से एक तरफ राजनीतिक गलियारों में हलचल हो गई तो दूसरी तरफ कांग्रेस में CM कुर्सी पर नजरें टिकाए बैठे सीनियर लीडरशिप में हड़कंप मच गया। कांग्रेस के कैप्टन पर डोरे डालने की बड़ी वजह पार्टी में चुनाव से पहले चल रही गुटबाजी है। जिसमें कोई भी एक-दूसरे के अंडर काम करने को तैयार नहीं। राहुल गांधी की चेतावनी के बाद भी किसी पर फर्क नहीं पड़ा। वहीं कांग्रेस ये भी जानती है कि पंजाब में जब बादलों का गोल्डन टाइम चल रहा था तो उसका तोड़ कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ही निकाला और 2 बार कांग्रेस की सरकार बनाई। ऐसी कौन सी वजहें, जिनसे कांग्रेस को कैप्टन की याद आई, क्या कैप्टन कांग्रेस जॉइन करेंगे, कैप्टन के आने से कांग्रेस में क्या असर पड़ेगा, जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट… पहले जानिए, कैप्टन ने कांग्रेस क्यों छोड़ी थी कैप्टन की अगुआई में कांग्रेस ने पंजाब में 2017 में 117 में से 77 सीटें जीतीं और सरकार बनाई। कैप्टन ही मुख्यमंत्री भी बने। हालांकि कैप्टन ने पंजाब में अपने स्टाइल में सरकार चलाई। वह हाईकमान कल्चर को ज्यादा तरजीह नहीं देते थे। इसके चलते कांग्रेस हाईकमान उनसे खुश नहीं था। इसी वजह से कांग्रेस के कैप्टन विरोधी खेमे ने साल 2021 में नवजोत सिद्धू को एक्टिव किया। हाईकमान तक पैरवी कर सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का प्रधान बना दिया। सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ बगावत का मोर्चा खोल दिया। कैप्टन को बिना बताए हाईकमान ने विधायक दल की मीटिंग बुलाई। इसका पता चलते ही कैप्टन ने इस्तीफा देकर कांग्रेस छोड़ दी। कैप्टन ने इसे कांग्रेस की गलती करार दिया था कि पार्टी उनकी अगुआई में आराम से सरकार बना सकती थी। कैप्टन के जाने से कांग्रेस को क्या नुकसान हुआ, 5 पॉइंट में जानिए… पंजाब इंचार्ज को कैप्टन को न्योता इतना महत्वपूर्ण क्यों पंजाब की सियासत में कैप्टन की भूमिका कितनी अहम… सोनिया के कहने पर पहले भी कांग्रेस में आ चुके कैप्टन खुद भी कह चुके, कांग्रेस को मिस करता हूं कैप्टन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि आज भी उनके कांग्रेस हाईकमान से अच्छे रिश्ते हैं। कांग्रेस एक फैमिली की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, वह मिल लेते थे। मगर, भाजपा में ये सिस्टम नहीं है। दोनों में कई अंतर हैं। कैप्टन ने आगे कहा था- जब से मैं BJP में आया हूं, मुझे नहीं लगता एक-दो बार से ज्यादा बार हाईकमान से मिल पाया हूं। BJP में नियम बहुत हैं। वो कुछ नहीं बताते। किसी से कुछ नहीं पूछते। अभी 2027 में पंजाब का इलेक्शन होना है। मगर मुझसे एक बार भी नहीं पूछा गया कि कैप्टन साहब किस को कहां से चुनाव लड़वाया जा सकता। मैं BJP में हूं लेकिन कांग्रेस को मिस करता हूं। कैप्टन के आने से कांग्रेस को क्या फायदा पंजाब में कांग्रेस लीडरशिप की इगो से जूझ रही है। सभी नेता खुद को एक-दूसरे से बड़े कद का समझ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस वर्कर ग्राउंड लेवल पर खुद को लीडरलैस महसूस कर रहे हैं। उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि किसकी अगुआई पर चलना है। एक के साथ चलो तो दूसरा नाराज हो जाता है। कैप्टन चूंकि पहले भी 2 बार पार्टी प्रधान रह चुके हैं तो वह अगुआई के लिए बैस्ट फेस साबित हो सकते है। दूसरा, कैप्टन ही अकालियों के दबदबे के टाइम में कांग्रेस की सरकार बनाने में कामयाब रहे थे। ऐसे में कांग्रेस सोच रही है कि कैप्टन वह करिश्मा दोबारा कर सकते हैं। कैप्टन के आने से पिछली बार बदलाव के बहाने AAP के हक में शिफ्ट हुए जट्ट सिख वोट बैंक को कांग्रेस की तरफ झुका सकते हैं। खासकर, 117 में से सबसे ज्यादा 69 सीटों वाले मालवा में कांग्रेस को बैनिफिट हो सकता है। पंजाब में इस वक्त लॉ एंड ऑर्डर को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। कैप्टन के समय में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सख्ती को विरोधी भी मानते हैं।
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